एजेंसी, नई दिल्ली। PM Modi Australia event row : आस्ट्रेलिया महाद्वीप के मेलबर्न शहर में आयोजित हुए ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ नामक भव्य प्रवासी भारतीय कार्यक्रम को लेकर भारत की आंतरिक राजनीति में एक नया विवाद और तीखा वाकयुद्ध छिड़ गया है। इस विशाल जनसभा के आयोजकों ने विपक्ष द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए किसी भी व्यक्ति को किसी भी प्रकार का आर्थिक प्रलोभन या पैसे नहीं दिए गए थे। दरअसल इससे पूर्व मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस स्वागत समारोह में भीड़ जुटाने के लिए भारी संख्या में भाड़े के लोगों को बुलाया गया था, जिसे अब आयोजकों ने सिरे से नकार दिया है।
कांग्रेस के बड़े नेताओं को पत्र लिखकर आयोजकों ने जताया कड़ा विरोध
मीडिया सूत्रों से प्राप्त नवीनतम जानकारियों के अनुसार, इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम के मुख्य प्रबंधन दल ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को एक आधिकारिक पत्र प्रेषित किया है। इस पत्र के माध्यम से आयोजकों ने कांग्रेस पार्टी से अपने विवादास्पद बयानों को तुरंत वापस लेने और इस अनुचित टिप्पणी के लिए बिना शर्त माफी मांगने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में कड़े शब्दों में लिखा है कि देश के राजनेताओं द्वारा दिया गया ऐसा गैर-जिम्मेदाराना बयान वहां रह रहे संपूर्ण भारतीय-आस्ट्रेलियाई समुदाय के आत्मसम्मान पर सीधा प्रहार और उनका घोर अपमान है। इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि इस पूरे आयोजन का वित्तीय खर्च न तो भारतीय जनता पार्टी ने उठाया है, न भारत सरकार ने और न ही आस्ट्रेलियाई प्रशासन ने।
क्या थे कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के आरोप और सोशल मीडिया का वह चर्चित वीडियो
विदित हो कि विगत 11 जुलाई को कांग्रेस पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा सहित दल के कई अन्य पदाधिकारियों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रधानमंत्री मोदी के आस्ट्रेलियाई कार्यक्रम से संबंधित एक वीडियो क्लिप साझा की थी। इस वीडियो को पोस्ट करते हुए विपक्षी नेताओं ने यह दावा किया था कि प्रधानमंत्री के स्वागत सत्कार को भव्य दिखाने के लिए भाड़े पर अनिवासी भारतीयों यानी एनआरआई को चार्टर्ड विमानों के जरिए मेलबर्न लाया गया था। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि वहां एकत्र हुई करीब 25 से 30 हजार लोगों की विशाल भीड़ को धन का लालच देकर और पैसे वितरित करके कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाया गया था, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकार की झूठी वाहवाही कराई जा सके।
चार्टर्ड विमानों के परिचालन के पीछे थी महीनों की कड़ी प्रशासनिक मेहनत
विपक्ष के इन तीखे हमलों पर अपना स्पष्टीकरण देते हुए समारोह की आयोजन समिति ने बताया कि विभिन्न दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले प्रवासी भारतीयों की सुविधा के लिए विशेष चार्टर्ड उड़ानों की व्यवस्था रातों-रात नहीं की गई थी, बल्कि इसके लिए पिछले कई महीनों से एक बेहद विस्तृत और सुनियोजित योजना पर काम चल रहा था। इस पूरी प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने के लिए हवाई कंपनियों से लंबी बातचीत, यात्रियों के बीच आपसी समन्वय और जटिल प्रशासनिक स्वीकृतियों को पूरा किया गया था। आयोजकों ने भावुक होते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री के प्रति अपना स्नेह प्रकट करने के लिए सैकड़ों स्वयंसेवकों ने अपने परिवारों को छोड़कर, अपने निजी व्यापार और पेशेवर दायित्वों को दांव पर लगाकर तथा व्यक्तिगत रूप से आर्थिक जोखिम उठाकर इस पूरे अभियान को सफल बनाने के लिए दिन-रात एक किया था।
आलोचना के अधिकार का सम्मान, परंतु प्रवासी भारतीयों की लोकतांत्रिक पसंद का अपमान अनुचित
आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने भारतीय राजनीतिक दलों को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत कांग्रेस पार्टी को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी की नीतियों की तीखी से तीखी आलोचना करने का पूरा और संवैधानिक अधिकार प्राप्त है, जिसका वे स्वागत करते हैं। परंतु राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चक्कर में विदेशों में भारत का नाम रोशन कर रहे प्रवासी समाज की देशभक्ति और उनकी लोकतांत्रिक पसंद को इस तरह से दुर्भावनापूर्ण तरीके से निशाना बनाना किसी भी दृष्टिकोण से न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी 9 और 10 जुलाई को आस्ट्रेलिया के आधिकारिक राजनयिक दौरे पर थे, जहां मेलबर्न के भव्य स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम में 30 हजार से भी अधिक भारतीय समुदाय के लोग स्वेच्छा से पहुंचे थे।
प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर मेलबर्न के स्टेडियम में दिखा अद्भुत नजारा
इस ऐतिहासिक सभा के दौरान जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच से भारतीय प्रवासियों को संबोधित कर रहे थे, तब उन्होंने वहां उपस्थित जनसमुदाय से एक विशेष आग्रह किया। प्रधानमंत्री की एक छोटी सी अपील पर स्टेडियम में मौजूद हजारों लोगों ने एक साथ अपने-अपने मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट जला दी। यह भव्य दृश्य आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए प्रदर्शित किया गया था, जिसकी गूंज दोनों देशों के कूटनीतिक हलकों में सकारात्मक रूप से देखी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में वहां उपस्थित भारी जनसैलाब की असीमित ऊर्जा की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि मेलबर्न के नागरिकों द्वारा किया गया यह स्वागत वास्तव में अभूतपूर्व और अत्यंत अद्भुत है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और भारत की बढ़ती वैश्विक रक्षा क्रेडिबिलिटी का किया जिक्र
अपने प्रभावशाली भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की आंतरिक सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का उल्लेख करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष रूप से नाम लिया। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया हमारी फार्मास्यूटिकल्स और डिफेंस सेक्टर की बढ़ती हुई साख तथा क्रेडिबिलिटी को बहुत करीब से देख रही है और इसका एक जीवंत प्रदर्शन सभी ने हालिया सैन्य अभियानों के दौरान देख ही लिया है। प्रधानमंत्री ने विरोधियों पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि आज के नए भारत की ताकत ऐसी है कि धमाके सीधे तौर पर आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों पर होते हैं और उनकी भयानक गूंज पूरी दुनिया के मंचों पर साफ-साफ सुनाई देती है।
सिडनी के बाद मेलबर्न का यह शो रहा पूरी तरह से ब्लॉकबस्टर और हाउसफुल
प्रधानमंत्री मोदी ने मेलबर्न के निवासियों के उत्साह को देखते हुए कहा कि यह पूरा शो पूरी तरह से हाउसफुल और एक ब्लॉकबस्टर फिल्म की तरह सुपरहिट साबित हुआ है। उन्होंने अपने पुराने दौरों को याद करते हुए भावुक मन से कहा कि इससे पहले वे दो बार सिडनी शहर में जाकर वहां के प्रवासी भारतीयों से मिल चुके थे, लेकिन उनके मन में मेलबर्न के नागरिकों से सीधे रूबरू होने की एक बहुत पुरानी और गहरी इच्छा थी। इसी अभिलाषा को पूरा करने के लिए उन्होंने इस बार अपने यात्रा कार्यक्रम में मेलबर्न को विशेष रूप से शामिल करने का निर्णय लिया था, जहां के प्रवासियों ने उनके स्वागत में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ी।
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