एजेंसी, नई दिल्ली। Bishnoi Goldy gang US action : कनाडा और अमेरिका में सक्रिय भारतीय मूल के कुख्यात अंडरवर्ल्ड नेटवर्क के खिलाफ विदेशी जांच एजेंसियों द्वारा शुरू की गई बड़ी दंडात्मक कार्रवाई के बीच भारत सरकार ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण और दो टूक आधिकारिक बयान जारी किया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि उसने कनाडा की एक शीर्ष पुलिस अधिकारी की उस हालिया गवाही और आधिकारिक टिप्पणी को बहुत गंभीरता से नोट किया है, जिसमें यह साफ कहा गया है कि वर्ष 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया में हुई सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की पड़ताल कर रहे जांच दल को ऐसा कोई भी ठोस सबूत नहीं मिला है, जिससे इस जघन्य हत्याकांड का संबंध किसी भी प्रकार से भारतीय सरकारी एजेंटों या भारतीय एजेंसियों से स्थापित किया जा सके।
#WATCH | On the US has charged Lawrence Bishnoi and his aide Goldy Brar of ordering the hit on Hardeep Singh Nijjar, MEA spokesperson Randhir Jaiswal says, regarding the operation by law enforcement agencies in the United States, we have seen the announcements made by the US… pic.twitter.com/v9CHTjtqcp
— All India Radio News (@airnewsalerts) July 14, 2026
जस्टिन ट्रूडो के पुराने और बेतुके दावों को कनाडाई पुलिस की शीर्ष अधिकारी ने किया खारिज
यह चौंकाने वाला कानूनी मोड़ उस समय सामने आया जब रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस की डिप्टी कमिश्नर लिसा मोरलैंड ने पिछले सप्ताह एक बड़ा बयान दिया। उनकी यह टिप्पणी तब आई जब अमेरिकी न्याय विभाग और वहां की फेडरल जांच एजेंसियों ने भारतीय जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके प्रमुख विदेशी जोड़ीदार सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ पर हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की सुपारी देने और उसकी हत्या का अंतिम आदेश पारित करने का आधिकारिक आरोप लगाया। मोरलैंड का यह आधिकारिक बयान कनाडा के तत्कालीन विवादित प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के उस पुराने और सनसनीखेज राजनीतिक आरोप को पूरी तरह से झुठलाता है, जिसमें उन्होंने बिना किसी ठोस सबूत के इस हत्याकांड का सारा ठीकरा सीधे तौर पर भारत सरकार के राजनयिकों पर मढ़ने का एक असफल प्रयास किया था।
अंतरराष्ट्रीय संगठित आपराधिक सिंडिकेट समाज और वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा
इस संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर नई दिल्ली में आयोजित एक आधिकारिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय के मुख्य प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सरकार का पक्ष बेहद मजबूती के साथ रखा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने दुनिया के कई प्रमुख देशों की धरती पर सक्रिय अंतरराष्ट्रीय संगठित आपराधिक नेटवर्क, ड्रग्स माफियाओं और उनके शीर्ष सरगनाओं के खिलाफ अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा हाल ही में की गई बड़ी घोषणाओं और कानूनी कार्यवाहियों का बारीकी से अवलोकन किया है। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि भारत का यह हमेशा से एक बेहद दृढ़ और अपरिवर्तनीय स्टैंड रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित होने वाले ये अपराध, आतंकवाद, नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी, मानव तस्करी और अत्याधुनिक गैर-कानूनी हथियारों का कारोबार किसी एक देश के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज और वैश्विक शांति के लिए एक अत्यंत गंभीर खतरा हैं।
आतंकवाद और सीमा-पार अपराधों को कुचलने के लिए भारत-अमेरिका में बढ़ रहा है मजबूत गठजोड़
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों के बीच के द्विपक्षीय संबंधों को रेखांकित करते हुए बताया कि आतंकवाद और सीमा-पार से संचालित होने वाले इस तरह के अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराधों को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए दोनों महाशक्तियों के बीच एक बेहद मजबूत, पारदर्शी और लगातार बढ़ता हुआ रणनीतिक सहयोग मौजूद है। भारत और अमेरिका की सुरक्षा तथा खुफिया एजेंसियों ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई जटिल ऑपरेशन्स में एक साथ मिलकर काम किया है और यह आपसी तालमेल वक्त के साथ और अधिक गहरा होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि विदेशी धरती पर सामने आई ये नई बातें हाल ही में अमेरिका की अदालत में दाखिल किए गए उस नए आरोप-पत्र की जानकारियों से पूरी तरह मेल खाती हैं, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई के वैश्विक संगठित अपराध गिरोह के सक्रिय गुर्गों को इन हिंसक वारदातों के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है।
कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा के बाद भारत-कनाडा संबंधों में आया व्यापक सुधार
उल्लेखनीय है कि ब्रिटिश कोलंबिया के एक स्थानीय गुरुद्वारे के ठीक बाहर हरदीप सिंह निज्जर की गोली मारकर की गई हत्या के कुछ हफ्तों के भीतर ही जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय संप्रभुता पर हमला करते हुए भारत सरकार को इसमें लपेटने की कोशिश की थी, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया था। उस दौर में जब दोनों देशों के आपसी रिश्ते इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे, तब भारत ने ओटावा प्रशासन पर यह गंभीर आरोप लगाया था कि वह वोट बैंक की सस्ती राजनीति के कारण खालिस्तान-समर्थक चरमपंथी तत्वों को कनाडा की सरजमीं का इस्तेमाल करने की खुली छूट दे रहा है। अक्टूबर 2024 में जब कनाडाई अधिकारियों ने भारत के उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा और 5 अन्य भारतीय राजनयिकों को इस मामले से जबरन जोड़ने की कोशिश की, तो भारत ने अपने अधिकारियों को वापस बुला लिया और जवाबी कार्रवाई में कनाडा के भी उतने ही राजनयिकों को देश से निष्कासित कर दिया। हालांकि पिछले वर्ष अप्रैल में हुए वहां के संसदीय चुनाव में लिबरल पार्टी के नए नेता मार्क कार्नी की शानदार जीत के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक कड़वाहट को दूर करने में बड़ी सफलता मिली और इस वर्ष मार्च में कार्नी की आधिकारिक भारत यात्रा के बाद से द्विपक्षीय रिश्तों में काफी सुधार दर्ज किया गया है।
2015 से भारतीय जेल में बंद है बिश्नोई, वहीं गोल्डी बराड़ पर अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने रखा बड़ा इनाम
कनाडाई पुलिस प्रमुख लिसा मोरलैंड ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया कि बिश्नोई गैंग न केवल भारत में बल्कि कनाडा, अमेरिका और दुनिया के कई अन्य कोनों में बड़े पैमाने पर जबरन वसूली, ड्रग्स की बड़ी तस्करी, अमीर व्यापारियों के अपहरण और टारगेट किलिंग जैसी खूनी गतिविधियों में लिप्त रहा है। मालूम हो कि लॉरेंस बिश्नोई वर्ष 2015 से ही भारत की एक अति-सुरक्षित जेल में बंद है और वहीं से अपने गिरोह को संचालित कर रहा है, जबकि उसका सबसे खास मोहरा गोल्डी बराड़ अभी भी विदेशों में छिपकर फरारी काट रहा है। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने बराड़ की गिरफ्तारी में मदद करने वाली कोई भी पुख्ता जानकारी साझा करने वाले व्यक्ति के लिए 50,000 अमेरिकी डॉलर के एक बड़े नकद इनाम की आधिकारिक घोषणा कर रखी है। अमेरिकी न्याय विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बिश्नोई, रविंदर ढांडा और जग्गू भगवानपुरिया के इस खतरनाक क्राइम सिंडिकेट के खिलाफ की गई यह हालिया फेडरल कार्रवाई दुनिया भर में फैली इनकी अवैध संपत्तियों और हिंसक साम्राज्य को नेस्तनाबूद करने के लिए कई वर्षों से चल रही एक बहुत बड़ी गोपनीय जांच का हिस्सा है।
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