US Missile Attack

मिडिल ईस्ट महायुद्ध : अमेरिका ने ईरान के 170 ठिकानों पर दागीं मिसाइलें, बुशहर न्यूक्लियर फैसिलिटी के पास एयरस्ट्राइक से भड़का तेहरान

अंतर्राष्ट्रीय अमेरिका ईरान

एजेंसी, तेहरान। US Missile Attack On Iran : पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर अपने चरम स्तर पर पहुंच गया है, जहां संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य जंग शुरू हो चुकी है। अमेरिकी सेना ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए बुधवार की देर रात ईरान के भीतर स्थित 90 से अधिक रणनीतिक ठिकानों पर भीषण बमबारी की। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 2 दिनों के भीतर अमेरिकी लड़ाकू विमानों और नौसेना ने ईरान के 170 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए घातक मिसाइलें और आधुनिक ड्रोन दागे हैं। इस विनाशकारी हमले के बाद ईरान ने अमेरिका पर अपनी एकमात्र बुशहर परमाणु बिजली फैसिलिटी के बेहद नजदीक हवाई हमला करने का बेहद संगीन आरोप लगाया है, जिससे पूरे क्षेत्र में परमाणु संकट का खतरा मंडराने लगा है।

बुशहर परमाणु संयंत्र के पास भीषण धमाके और तबाही

अंतर्राष्ट्रीय समाचार एजेंसी अल जजीरा के मुताबिक, बुशहर परमाणु बिजली फैसिलिटी के पास यह जोरदार हवाई हमला दोपहर के करीब 12 बजे हुआ। यह हमला उस समय किया गया जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने अभियानों के खत्म होने का दावा किया था, जिसके कुछ ही घंटों बाद इस संवेदनशील इलाके को दहला दिया गया। बुशहर के गवर्नर मोहम्मद मोजफ्फरी ने बुधवार को शहर पर हुए अमेरिकी हमलों की पुष्टि की है, हालांकि उन्होंने परमाणु संयंत्र और खार्ग द्वीप को सीधे निशाना बनाए जाने की खबरों का खंडन किया है। इसके बावजूद, सोशल मीडिया और सैटेलाइट तस्वीरों में बुशहर परमाणु क्षेत्र के पास से आसमान में ऊंचे लॉजिस्टिक और धुएं के गुबार उठते हुए साफ देखे गए हैं, जिसने वैश्विक बिरादरी की चिंता बढ़ा दी है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी

अमेरिकी सेना की मध्य कमान यानी सेंट्रल कमांड ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस बड़े सैन्य ऑपरेशन की रणनीतिक जानकारी साझा की है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, इन सुनियोजित हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन और मिसाइल भंडारण केंद्रों, सैन्य स्पीड बोट और होर्मुज स्ट्रेट के पास तटीय इलाकों में मौजूद प्रमुख सैन्य ठिकानों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि जून महीने के अंत में दो दिनों तक किए गए जवाबी हमलों की तुलना में इस बार की गई कार्रवाई करीब 14 गुना ज्यादा बड़ी और आक्रामक है। इस हमले का मुख्य उद्देश्य ईरान की उस आक्रामक क्षमता को कुचलना है जिसके जरिए वह अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक मार्गों को बाधित कर रहा था।

जवाब में ईरान का अमेरिकी सैनिक अड्डों पर बड़ा पलटवार

इस भीषण अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान ने भी चुप न बैठते हुए खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर अपने घातक ड्रोनों और मिसाइलों से तीव्र पलटवार किया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसने कतर, कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सेना के करीब 85 ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। ईरानी सेना के मुताबिक, इस जवाबी कार्रवाई में कुवैत में तैनात अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल सिस्टम, कतर में मौजूद अर्ली वॉर्निंग सैटेलाइट एंटीना और बहरीन में अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय व फ्यूल टैंक को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने भी इस बात की पुष्टि की है कि उनके क्षेत्र में हुए ईरानी हमले में 1 व्यक्ति घायल हुआ है, जबकि उनकी सेना ने 3 बैलिस्टिक मिसाइल, 1 क्रूज मिसाइल और 10 ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया।

राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा एलान और सीजफायर समझौता खत्म

इस सैन्य टकराव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो समिट के दौरान एक बहुत बड़ा और कड़ा कूटनीतिक बयान दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान के साथ पूर्व में हुआ सीजफायर समझौता यानी सहमति पत्र अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है। उन्होंने दोटूक लहजे में कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अमेरिकी प्रशासन अब ईरान के साथ भविष्य में किसी भी तरह की कोई नई डील या समझौता करने का कतई इच्छुक नहीं है। ट्रंप के इस रुख से साफ है कि अमेरिका अब ईरान के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई के रास्ते पर आगे बढ़ चुका है।

बातचीत के रास्ते बंद और रेलवे पुलों पर हमले को बताया युद्ध अपराध

अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा है कि धमकियों और बमबारी के इस माहौल में अमेरिका से किसी भी स्तर की कोई बातचीत या समझौता मुमकिन नहीं है। उन्होंने कहा कि वार्ता की मेज पर आने से पहले अमेरिका को पुराने अंतर्राष्ट्रीय समझौतों का सम्मान करना सीखना होगा। इसी दौरान, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर देश के पूर्वी हिस्से में मशहद जाने वाले मुख्य रेलवे मार्ग पर बने दो महत्वपूर्ण पुलों को उड़ाने का आरोप लगाया है। ईरान ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर किए गए इस हमले को खुला युद्ध अपराध करार दिया है, जिसके कारण तेहरान और मशहद के बीच चलने वाली सभी यात्री ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह से बंद करना पड़ा है।

होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा भारी तनाव और भारतीय जहाज वापस लौटा

इस भीषण गोलाबारी और सैन्य गतिविधियों के कारण रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही पर बहुत बुरा असर पड़ा है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने साफ कहा है कि अमेरिकी सैन्य दखलअंदाजी और मनमानी के चलते अब इस समुद्री मार्ग पर यातायात को सामान्य करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। युद्ध के कारण इस रूट पर जहाजों की आवाजाही पहले के मुकाबले महज 50 प्रतिशत ही रह गई है। इस बढ़ते खतरे को देखते हुए कुवैत से 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर आ रहा भारतीय झंडे वाला एक विशाल तेल टैंकर ‘लीला वादिनार’ बुधवार को होर्मुज स्ट्रेट के पास ओमान के तट से अचानक वापस लौट गया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला चरमराने का खतरा पैदा हो गया है।

पूर्व सुप्रीम लीडर खामेनेई की अंतिम यात्रा और बदले के नारे

इन हमलों के बीच ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का पार्थिव शरीर इराक के नजफ और कर्बला जैसे पवित्र शिया स्थलों पर धार्मिक रस्में पूरी करने के बाद एक विशेष विमान से ईरान के मशहद शहर पहुंचा। मशहद की सड़कों पर लाखों की संख्या में शोक संतप्त लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। इस अंतिम यात्रा के दौरान लोगों के हाथों में लाल रंग के बैनर और लाल झंडे दिखाई दिए, जिन्हें शिया परंपरा में कत्ल का बदला लेने का प्रतीक माना जाता है। भीड़ में बड़े पैमाने पर “बदला-बदला” के नारे लग रहे थे और लोगों के पास अंग्रेजी में लिखे बैनर भी थे जिन पर “हम ट्रंप को मार देंगे” लिखा हुआ था। खामेनेई को उनकी अंतिम इच्छा के मुताबिक इराक और विश्वभर से आए लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मशहद स्थित बेहद पवित्र इमाम रजा की दरगाह के पास सुपुर्द-ए-खाक किया जा रहा है।

नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई पर मंडराया सुरक्षा का खतरा

पूर्व सर्वोच्च नेता के निधन और अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के भीतर सुरक्षा चिंताओं का स्तर बहुत बढ़ गया है। सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस अंतिम संस्कार के दौरान ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई पहली बार सार्वजनिक रूप से दुनिया के सामने आ सकते हैं, जो पिछले 1 हफ्ते से चल रहे सभी कार्यक्रमों से पूरी तरह दूर रहे हैं। उनके सार्वजनिक रूप से सामने आने की खबरों के बीच सुरक्षा एजेंसियां अत्यधिक सतर्क हैं क्योंकि पिछले हफ्ते ही इजरायल ने आधिकारिक बयान देकर कहा था कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर सीधे तौर पर उनके निशाने पर हैं। इस त्रिकोणीय संघर्ष ने पूरे मिडिल ईस्ट को एक महायुद्ध की आग में झोंक दिया है।

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