एजेंसी, अयोध्या। Ram Mandir Trust Donation : अयोध्या के ऐतिहासिक राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों के बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन दावों को जोरदार ढंग से खारिज करते हुए पहली बार अपने वित्तीय रिकॉर्ड सार्वजनिक किए हैं। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने मंगलवार को घोषणा की कि भक्तों द्वारा दान किया गया 32 किलोग्राम से अधिक सोना और 1518 किलोग्राम से अधिक चांदी सहित अन्य सभी बहुमूल्य वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। ट्रस्ट ने पारदर्शिता पर जोर देते हुए गठन के बाद से प्राप्त हुए दान, खर्च और कीमती धातुओं के उपयोग का एक विस्तृत ब्यौरा जारी किया है, जिसमें दावा किया गया है कि हर एक रुपये का हिसाब दर्ज है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) लगातार कार्रवाई कर रहा है। जांच एजेंसियां नकदी, दान पेटियों, सोना-चांदी, विदेशी मुद्रा और अन्य वित्तीय लेन-देन की गहन जांच में जुटी हैं, और अब तक प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
सोने की रामचरितमानस, चाँदी की ईंटें, हार और काकभुशुंडि…
राम मंदिर में ‘चोरी’ के दावे के बाद ट्रस्ट ने दिया पाई-पाई का हिसाब
कोषाध्यक्ष बोले- 2800 चीजें पूरी तरह सुरक्षितhttps://t.co/ehy7VYeJox pic.twitter.com/7w1gyuPme9
— ऑपइंडिया (@OpIndia_in) July 7, 2026
सोने और चांदी के चढ़ावे का विस्तृत लेखा-जोखा हुआ पेश
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए सोने और चांदी के दान का पूरा विवरण पेश किया। उन्होंने बताया कि भक्तों द्वारा दान की गई सभी 2926 कीमती चीजें पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका विधिवत हिसाब रखा गया है। सोने के लेखा-जोखा के अनुसार, 31 मार्च 2024 तक 16.765 किलोग्राम सोना मिला था, जबकि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 10.445 किलोग्राम और वर्ष 2025-26 में 5.050 किलोग्राम प्राप्त हुआ। इस प्रकार 31 मार्च 2026 तक सोने की कुल मात्रा 32.259 किलोग्राम हो गई है। चांदी के संबंध में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के पास कुल 1518.925 किलोग्राम चांदी और चांदी जैसी वस्तुएं मौजूद हैं। इसमें दान की गई चांदी को सरकारी देखरेख में पिघलाने के बाद प्राप्त 849.272 किलोग्राम शुद्ध चांदी भी शामिल है।
भारत सरकार की टकसाल में पिघलाई गई चांदी, स्वतंत्र फर्म ने किया भौतिक सत्यापन
चांदी के गायब होने के आरोपों पर स्पष्टीकरण देते हुए ट्रस्ट ने कहा कि दान में मिली चांदी को निर्धारित प्रक्रिया के तहत पिघलाया गया था। यह प्रक्रिया मंदिर निर्माण, धार्मिक उपयोग और सजावट से जुड़े कार्यों के लिए अपनाई गई थी। परिष्करण के लिए भेजी गई इस चांदी का प्रसंस्करण भारत सरकार की टकसाल में किया गया है, जिसके वजन, शुद्धता और तस्वीरों के रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित हैं। कोषाध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि सभी दान का सटीक रिकॉर्ड रखा गया है और एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म द्वारा हर साल उनका भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) कराया गया है। इसके साथ ही हर दानदाता को बकायदा रसीद भी दी गई है। उन्होंने आरोपों को लेकर राजनीति करने वालों से कहा कि यदि किसी के पास गड़बड़ी के प्रमाण हैं, तो वे उन्हें तुरंत एसआईटी को सौंप दें।
सोने की रामचरितमानस और हीरा जड़ित हार को किया गया प्रदर्शित
भक्तों के मन में फैले संशय को दूर करने और विरोधियों को जवाब देने के लिए सोमवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मीडिया के सामने दान में मिली कई अद्भुत और बहुमूल्य वस्तुएं प्रदर्शित की थीं। इन उपहारों में मुख्य आकर्षण का केंद्र सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस रही, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके अलावा एक भव्य हीरा जड़ित हार, चांदी की चरण पादुकाएं और चांदी की काकभुशुंडी की कलाकृति को भी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया। कोषाध्यक्ष गिरि ने पुष्टि की कि इन कीमती सामानों में मुकुट, हार, चांदी की ईंटें और प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद से देश-विदेश के भक्तों द्वारा भेंट की गई अन्य वस्तुएं शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक का विस्तृत रिकॉर्ड दानकर्ता के विवरण और तारीख के साथ दर्ज है।
ट्रस्ट को अब तक प्राप्त हुए 3264 करोड़ रुपये, निर्माण पर खर्च हुए 2370 करोड़
वित्तीय विवरण के अनुसार, ट्रस्ट के गठन के बाद से उसे निधि समर्पण अभियान, कॉर्पस फंड, देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए स्वैच्छिक योगदान से कुल 3264 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि प्राप्त हुई है। ट्रस्ट ने इसके खर्च का भी पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया है, जिसके तहत अब तक कुल 2370 करोड़ रुपये राम मंदिर के मुख्य निर्माण, मंदिर परिसर के भव्य विकास, पूंजीगत परियोजनाओं और धार्मिक एवं आधारभूत ढांचे के निर्माण पर खर्च किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, श्रद्धालुओं के चढ़ावे से प्राप्त राशि में से 391 करोड़ रुपये मंदिर के दैनिक संचालन, प्रशासनिक व्यवस्था, तीर्थयात्रियों की सुविधाओं, धार्मिक अनुष्ठानों और रखरखाव पर व्यय किए गए हैं। इस तरह अब तक कुल 2761 करोड़ रुपये विभिन्न मदों में खर्च किए जा चुके हैं, जबकि शेष राशि भविष्य की परियोजनाओं के लिए सुरक्षित रखी गई है।
प्रशासनिक व्यवस्था होगी मजबूत, महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार
इस पूरे विवाद के बीच, ट्रस्ट ने अपनी प्रशासनिक और वित्तीय प्रणाली को और अधिक पारदर्शी व मजबूत करने के लिए कई बड़े संगठनात्मक फैसले लिए हैं। इसके तहत मंदिर प्रशासन में एक मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा, हाल ही में संपन्न हुई ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है, और उनकी जगह कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है। ट्रस्ट ने साफ किया है कि जिस कथित चोरी की जांच चल रही है, वह कुछ बाहरी व्यक्तियों की आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा मामला है और उसका ट्रस्ट की आधिकारिक लेखा-प्रणाली या फंड प्रबंधन से कोई संबंध नहीं है। ट्रस्ट ने चढ़ावे में हुई गड़बड़ियों की एसआईटी जांच में पूर्ण सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा है कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ये भी पढ़े : टी20 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया फिर चैंपियन : जीतीं 22.27 करोड़, बाहर होकर भी इंडिया-पाकिस्तान मालामाल
ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें


