Reliance CBI

बैंकिंग नियमों के उल्लंघन पर बड़ी कार्रवाई : सीबीआई ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और होम फाइनेंस सहित सात के खिलाफ मुंबई कोर्ट में पेश की पहली चार्जशीट

महाराष्ट्र मुंबई राष्ट्रीय

एजेंसी, मुंबई। Reliance CBI Chargesheet : देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित केंद्रीय जांच एजेंसी यानी सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) ने कॉर्पोरेट जगत और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े एक बेहद बड़े और कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में एक बहुत बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। सीबीआई ने रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) से संबंधित वित्तीय हेरफेर और धोखाधड़ी के मामले में अपनी पहली आधिकारिक चार्जशीट (आरोपपत्र) अदालत में दाखिल कर दी है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में स्थित सीबीआई मामलों की विशेष अदालत के समक्ष पेश की गई इस पहली चार्जशीट में देश के एक बड़े रिलायंस ग्रुप की दो प्रमुख कंपनियों समेत आरसीएफएल के पांच पूर्व शीर्ष और वरिष्ठ अधिकारियों को मुख्य आरोपी बनाया गया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने इन सभी आरोपियों पर बेहद सुनियोजित तरीके से आपराधिक साजिश रचने और देश के सार्वजनिक क्षेत्र के कई सरकारी बैंकों को करोड़ों रुपए का भारी-भरकम वित्तीय नुकसान पहुंचाने का बेहद संगीन आरोप लगाया है।

रिलायंस की दो बड़ी कंपनियां और पांच पूर्व शीर्ष अधिकारी बनाए गए आरोपी

सीबीआई द्वारा मुंबई की विशेष अदालत में पेश किए गए इस पहले आरोपपत्र में रिलायंस ग्रुप की जिन दो बड़ी दिग्गज कंपनियों को सीधे तौर पर आरोपी बनाया गया है, उनमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) के नाम शामिल हैं। इन कॉर्पोरेट संस्थाओं के अलावा, जांच एजेंसी ने आरसीएफएल के भीतर फैले भ्रष्टाचार की परतें खोलते हुए कंपनी के पांच पूर्व वरिष्ठ और सर्वोच्च पदों पर रहे अधिकारियों को भी नामजद किया है। इन आरोपियों में कंपनी के पूर्व निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) देवांग प्रवीण मोदी, पूर्व निदेशक रविंद्र सोमयाजुला राव और पूर्व निदेशक धनंजय भगवानप्रसाद तिवारी शामिल हैं। इनके साथ ही बैंक लोन की निगरानी करने वाले पूर्व एग्जीक्यूटिव रिस्क ऑफिसर राजेश कृष्णमूर्ति और पूर्व चीफ रिस्क ऑफिसर लव चतुर्वेदी का नाम भी इस चार्जशीट में मुख्य आरोपियों के रूप में दर्ज किया गया है।

लोन के पैसों का हुआ गलत इस्तेमाल, शेल कंपनियों के जरिए किया गया फंड डायवर्जन

केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई द्वारा की गई अब तक की गहन कूटनीतिक और वित्तीय जांच में यह बेहद चौंकाने वाला सच सामने आया है कि रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड द्वारा देश के विभिन्न सार्वजनिक और सरकारी बैंकों से जो सैकड़ों करोड़ रुपए का बिजनेस लोन लिया गया था, उसका उपयोग उन निर्धारित और तय शर्तों के अनुरूप बिल्कुल नहीं किया गया जिनके लिए बैंकों ने पैसा मंजूर किया था। जांच एजेंसी का सीधा और पुख्ता आरोप है कि बैंकों से मिले इस भारी-भरकम फंड को विभिन्न बिचौलिया संस्थाओं और माध्यम (कंड्यूट) कंपनियों के एक गुप्त नेटवर्क के जरिए घुमाया गया। इस तरह हेरफेर करके बैंकों के इस पूरे पैसे को रिलायंस एडीए ग्रुप की ही विभिन्न दूसरी सहयोगी कंपनियों के खातों तक अवैध रूप से डायवर्ट कर पहुँचाया गया, जो पूरी तरह से गैरकानूनी है।

बैंकिंग नियमों और शर्तों की उड़ी धज्जियां, बैंकों को हुआ भारी नुकसान

सीबीआई ने कोर्ट को सौंपे गए दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से कहा है कि आरोपियों द्वारा किया गया फंड का यह डायवर्जन सीधे तौर पर लोन एग्रीमेंट की शर्तों और रिजर्व बैंक के बैंकिंग नियमों का एक बहुत बड़ा और गंभीर उल्लंघन था। इस पूरी आपराधिक कूटनीति के कारण कर्ज देने वाले देश के सार्वजनिक क्षेत्र के सरकारी बैंकों को गलत और अवैध तरीके से एक बहुत बड़ा वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा है, जबकि दूसरी ओर इन तमाम मुख्य आरोपियों और उनसे जुड़ी कॉर्पोरेट संस्थाओं व शेल कंपनियों को अनुचित और अवैध रूप से करोड़ों रुपए का सीधा लाभ पहुंचा है। जांच एजेंसी ने इन सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय कानून के तहत आपराधिक साजिश (क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी) रचने और धोखाधड़ी (चीटिंग) करने समेत कई अन्य कड़े कानूनी प्रावधानों और विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।

रिलायंस एडीए ग्रुप के खिलाफ चल रही है व्यापक जांच, आ सकती हैं कई और चार्जशीट

विशेष अदालत के समक्ष अपनी बात रखते हुए जांच एजेंसी सीबीआई के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मामले की लंबी जांच के दौरान देश और विदेश से जुटाए गए बेहद महत्वपूर्ण और पुख्ता वित्तीय डाक्यूमेंट्स, डिजिटल सबूतों और अन्य चश्मदीद साक्ष्यों के ठोस आधार पर ही यह पहली प्रारंभिक चार्जशीट दाखिल की गई है। यह पूरा मामला रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़े कथित बैंक लोन डिफॉल्ट और धोखाधड़ी के उन कई मामलों की व्यापक जांच का एक मुख्य हिस्सा है, जिनकी फाइलें सीबीआई काफी समय से खंगाल रही है। केंद्रीय एजेंसी अभी भी इस पूरे घोटाले में फंड्स के अंतिम इस्तेमाल, उनके कथित डायवर्जन के रास्तों और बैंकिंग सिस्टम में मौजूद कमियों का फायदा उठाने वाले अन्य चेहरों की बारीकी से जांच कर रही है। सीबीआई ने संकेत दिए हैं कि जैसे-जैसे आगे की जांच में नए तथ्य और सबूत सामने आएंगे, इस मामले में आने वाले दिनों में पूरक या अतिरिक्त आरोपपत्र (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) भी अदालत में दाखिल किए जा सकते हैं।

ये भी पढ़े : किश्तवाड़ और डोडा में कुदरत का कहर : भूस्खलन के बाद क्वार हाइड्रो प्रोजेक्ट में घुसा बाढ़ का पानी, युद्धस्तर पर राहत कार्य जारी

ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें

Leave a Reply