एजेंसी, जकार्ता। PM Modi Indonesia Visit Brahmos Deal : भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को अपनी अत्यंत महत्वपूर्ण तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंचे। जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष विमान इंडोनेशिया के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ, वहां की वायुसेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों ने हवा में ही उनके विमान को चारों तरफ से घेरकर एस्कॉर्ट किया और उन्हें विशेष सुरक्षा प्रदान की। यह प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का इंडोनेशिया का तीसरा दौरा है, जो दोनों देशों के बीच लगातार गहरे होते रणनीतिक और कूटनीतिक रिश्तों की गवाही देता है। जकार्ता के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने स्वयं उपस्थित होकर प्रधानमंत्री मोदी का बेहद गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। हवाई अड्डे पर पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और पारंपरिक इंडोनेशियाई सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ उनका भव्य स्वागत सत्कार किया गया, जो दोनों देशों की साझी सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करता है।
Landed in Jakarta. I’m touched by President Prabowo Subianto’s gesture of welcoming me at the airport.
In 2018 we elevated our relations to a Comprehensive Strategic Partnership, which has benefitted our people.
During this visit, President Prabowo Subianto and I will hold… pic.twitter.com/rG61TGGDdY
— Narendra Modi (@narendramodi) July 6, 2026
ब्रह्मोस मिसाइल रक्षा सौदे पर लग सकती है अंतिम मुहर
इस द्विपक्षीय यात्रा का सबसे मुख्य और रणनीतिक एजेंडा दोनों देशों के बीच होने वाला एक बड़ा रक्षा समझौता माना जा रहा है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, दोनों शीर्ष नेताओं के बीच होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में करीब 2,500 करोड़ रुपये की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली के सौदे पर अंतिम मुहर लगने की पूरी संभावना व्यक्त की जा रही है। यदि यह रक्षा समझौता सफलतापूर्वक संपन्न हो जाता है, तो फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया भारतीय रक्षा उद्योग से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दुनिया का दूसरा विदेशी ग्राहक बन जाएगा। आपको बता दें कि ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ और रूस की कंपनी ‘एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनिया’ के एक संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा किया गया है, जिसे वर्तमान समय में दुनिया की सबसे तेज और अचूक ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है।
प्रम्बानन शिव मंदिर का दौरा और 2,000 साल पुराने सांस्कृतिक संबंध
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने इस विशेष दौरे के दौरान इंडोनेशिया के सबसे भव्य और ऐतिहासिक हिंदू मंदिर परिसर प्रम्बानन का भी दौरा करेंगे। 9वीं शताब्दी में निर्मित यह विशाल मंदिर भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को पूरी तरह समर्पित है और इसे यूनेस्को द्वारा अपनी प्रतिष्ठित विश्व धरोहर सूची में भी शामिल किया गया है। इंडोनेशिया वर्तमान समय में दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश माना जाता है, क्योंकि यहाँ की लगभग 85% आबादी इस्लाम धर्म को मानती है। इसके बावजूद इस देश की संपूर्ण सांस्कृतिक विरासत पर प्राचीन हिंदू और बौद्ध सभ्यताओं की बेहद गहरी छाप साफ दिखाई देती है। यहां आज भी बड़े पैमाने पर पारंपरिक रामलीला का मंचन किया जाता है, वहां की राष्ट्रीय विमानन सेवा का नाम गरुड़ एयरलाइन है और अतीत में वहां के 20 हजार रुपिया के नोट पर भगवान गणेश की भव्य तस्वीर भी छप चुकी है। भारत और इंडोनेशिया के बीच ये व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध करीब 2,000 साल पुराने हैं, जो बिना किसी सैन्य शासन के केवल विचारों और व्यापार के माध्यम से वहां तक पहुंचे थे।
भारत के लिए बेहद रणनीतिक है इंडोनेशिया का साबंग पोर्ट
सामरिक दृष्टिकोण से इंडोनेशिया का साबंग पोर्ट भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के अत्यंत करीब स्थित है। वर्ष 2018 में जब प्रधानमंत्री मोदी ने जकार्ता की यात्रा की थी, तब दोनों देशों ने साबंग पोर्ट के विकास और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बढ़ाने पर एक महत्वपूर्ण सहमति व्यक्त की थी। इस रणनीतिक साझेदारी के तहत दोनों देश मिलकर इस बंदरगाह के बुनियादी ढांचे का विकास करने, समुद्री संपर्क को सुदृढ़ करने, लॉजिस्टिक सहयोग को बढ़ावा देने और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को अत्यधिक मजबूत करने पर लगातार काम कर रहे हैं, जिससे इस पूरे समुद्री मार्ग पर व्यापार और सुरक्षा को सुगम बनाया जा सके।
पीएम मोदी का 102वां विदेश दौरा और तीन देशों की महायात्रा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल का यह कुल 102वां विदेश दौरा है, जिसके तहत वह इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की छह दिवसीय संयुक्त यात्रा पर रवाना हुए हैं। 6 जुलाई से 11 जुलाई 2026 तक चलने वाली यह तीन देशों की महायात्रा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति, ‘महासागर’ दृष्टिकोण और एक स्वतंत्र, खुले तथा समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। जकार्ता में राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करने के बाद पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के विशेष निमंत्रण पर मेलबर्न के लिए रवाना होंगे, जहां रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश और खेल विज्ञान जैसे आधुनिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। दौरे के अंतिम चरण में पीएम मोदी न्यूजीलैंड के ऑकलैंड जाएंगे, जहां प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ आर्थिक और व्यावसायिक संबंधों को नई गति देने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भी सार्थक बातचीत की जाएगी।
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