एजेंसी, नई दिल्ली। 1 July 2026 Rule Changes : साल 2026 के सातवें महीने यानी 1 जुलाई की शुरुआत के साथ ही आम जनता के घरेलू बजट और जेब से जुड़े कई नियमों में बहुत बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। हर महीने की पहली तारीख को सरकार और विभिन्न विभागों द्वारा कई नए फैसले लागू किए जाते हैं, जिनका सीधा असर देश के नागरिकों की जिंदगी पर पड़ता है। इस बार 1 जुलाई से रसोई गैस सिलेंडर के दामों से लेकर राष्ट्रीय पहचान पत्र को अपडेट करने की फीस, नया पासपोर्ट बनवाने का खर्च, दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति और ऑटोमोबाइल मार्केट में कारों की कीमतों समेत कई महत्वपूर्ण नियमों में बड़े फेरबदल होने जा रहे हैं। इन बदलावों को ध्यान में रखकर ही आम आदमी को अपने पूरे महीने का वित्तीय बजट तैयार करना होगा।
कमर्शियल रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में फेरबदल की संभावना
हर महीने की पहली तारीख को देश की पेट्रोलियम कंपनियां रसोई गैस सिलेंडरों की नई कीमतें जारी करती हैं। पिछले महीने मिडिल ईस्ट यानी पश्चिम एशिया में जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण 1 जून को कमर्शियल रसोई गैस सिलेंडर के दामों में 53.50 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी, जिसने व्यापारियों और दुकानदारों का बजट बिगाड़ दिया था। हालांकि, अब केंद्र सरकार ने आम जनता और व्यापारियों को राहत देने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए कमर्शियल गैस सिलेंडरों के उपयोग और आपूर्ति पर लगी कई पुरानी पाबंदियों को पूरी तरह हटाने का एक बड़ा फैसला लिया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि 1 जुलाई को कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कीमतों में बड़ी कटौती या नरमी देखने को मिल सकती है।
डिजिटल पहचान पत्र पर अब 6 महीने तक मुफ्त में अपडेट होगा ईमेल एड्रेस
देश के नागरिकों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की तरफ से आई है। प्राधिकरण ने डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय पहचान पत्र से जुड़े ईमेल एड्रेस को अपडेट या संशोधित करने पर लगने वाली 75 रुपये की निर्धारित फीस को पूरी तरह से माफ करने का एलान किया है। सरकार का यह नया नियम 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होकर अगले छह महीनों के लिए यानी 31 दिसंबर 2026 तक पूरी तरह लागू रहेगा। इस अवधि के दौरान कोई भी नागरिक अपने मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे बिना एक भी रुपया खर्च किए अपने पहचान पत्र में नया ईमेल एड्रेस बिल्कुल मुफ्त में अपडेट करवा सकता है।
पासपोर्ट बनवाना हुआ बेहद महंगा, 2012 के बाद सर्विस फीस में सबसे बड़ी बढ़ोतरी
विदेश यात्रा की इच्छा रखने वाले नागरिकों को 1 जुलाई से अपनी जेब काफी ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी, क्योंकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने साधारण और तत्काल दोनों ही श्रेणियों के पासपोर्ट आवेदनों पर ली जाने वाली सर्विस फीस में भारी इजाफा कर दिया है। यह बढ़ी हुई दरें भारत के भीतर और विदेशों में स्थित सभी भारतीय दूतावासों में प्रोसेसिंग फीस के रूप में समान रूप से लागू होंगी। मंत्रालय के अनुसार, साल 2012 के बाद पासपोर्ट की सर्विस फीस में किया गया यह अब तक का सबसे बड़ा और पहला बदलाव है। नई दरों के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों का खर्च कुछ इस प्रकार तय किया गया है:
36-पेज की साधारण पुस्तिका (नॉन-तत्काल): इसके लिए पहले जहां 1,500 रुपये देने होते थे, वहीं 1 जुलाई से अब 2,500 रुपये की फीस चुकानी होगी।
36-पेज की तत्काल पुस्तिका (तत्काल): इस श्रेणी के लिए पुरानी फीस 3,500 रुपये थी, जिसे बढ़ाकर अब सीधे 5,000 रुपये कर दिया गया है।
60-पेज की साधारण पुस्तिका (नॉन-तत्काल): जंबो पासपोर्ट के शौकीनों को पहले इसके लिए 2,000 रुपये देने पड़ते थे, लेकिन अब इसके लिए 3,500 रुपये जमा करने होंगे।
60-पेज की तत्काल पुस्तिका (तत्काल): इस श्रेणी में पुराना शुल्क 4,000 रुपये था, जो 1 जुलाई से बढ़कर अब पूरा 6,000 रुपये हो जाएगा।
नाबालिगों के लिए 36-पेज की साधारण पुस्तिका: बच्चों के पासपोर्ट के लिए पहले फीस 1,000 रुपये थी, जो अब बढ़कर 1,750 रुपये निर्धारित की गई है।
पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (पीसीसी): विदेश जाने के लिए जरूरी इस प्रमाण पत्र की फीस को भी 500 रुपये से बढ़ाकर अब 750 रुपये कर दिया गया है।
इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई निर्धारित
आयकर विभाग ने देश के व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स के लिए वित्तीय वर्ष का इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने की अंतिम समय-सीमा 31 जुलाई 2026 निर्धारित की है। टैक्स विशेषज्ञों द्वारा सभी करदाताओं को यह सलाह दी जा रही है कि वे अंतिम तारीख की भीड़ और सर्वर डाउन होने की समस्या से बचने के लिए समय रहते आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रिटर्न जरूर दाखिल कर दें, ताकि वे देर से रिटर्न भरने पर लगने वाले भारी जुर्माने (पेनल्टी) से पूरी तरह बच सकें। विभाग के नियमों के अनुसार, आईटीआर-1 फॉर्म उन व्यक्तिगत नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए होता है जो सैलरी पाते हैं और जिनकी आय का दूसरा एकमात्र जरिया केवल बैंक से मिलने वाला ब्याज होता है। इसके विपरीत, जिन करदाताओं के पास म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार (स्टॉक) से होने वाली कमाई, दूसरा मकान या जिनकी कुल सालाना कमाई 50 लाख रुपये से अधिक होती है, उन्हें अनिवार्य रूप से आईटीआर-2 फॉर्म भरना होता है।
दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति को हरी झंडी, 15,000 करोड़ रुपये का मेगा प्लान
देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरण को स्वच्छ बनाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। दिल्ली कैबिनेट ने सोमवार 29 जून को दिल्ली की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है, जिसे सरकार 1 जुलाई से पूरे राज्य में लागू करने जा रही है। दिल्ली सरकार के इस महाप्लान के तहत अगले चार वर्षों के भीतर दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों के बुनियादी ढांचे और फायदों पर करीब 15,000 करोड़ रुपये की भारी-कम राशि खर्च की जाएगी। इस नई नीति की सबसे बड़ी खूबी यह है कि दिल्ली में पूरी तरह से बिजली से चलने वाले शुद्ध इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर रजिस्ट्रेशन शुल्क को 100 प्रतिशत टैक्स फ्री कर दिया गया है, यानी खरीदारों को अब कोई पंजीकरण शुल्क नहीं देना होगा।
किआ और टाटा मोटर्स समेत कई बड़ी कंपनियों की कारें खरीदना होगा महंगा
यदि आप जुलाई के महीने में अपने लिए एक नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपको थोड़ा अधिक बजट तैयार रखना होगा। 1 जुलाई से देश के ऑटोमोबाइल बाजार में गाड़ियां खरीदना काफी महंगा होने जा रहा है। देश की प्रमुख कार निर्माता कंपनी किआ मोटर्स ने इनपुट कॉस्ट बढ़ने के कारण अपनी सभी गाड़ियों की कीमतों में दो प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने का आधिकारिक एलान कर दिया है। इसके साथ ही देश की दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स भी अपनी कारों के ट्रेडिशनल फ्यूल (आइसीई) और इलेक्ट्रिक व्हीकल (इवी) दोनों ही वेरिएंट्स की कीमतों में भारी इजाफा करने की तैयारी में है। टाटा मोटर्स के विभिन्न मॉडलों की कीमतों में लगभग 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिससे मध्यम वर्ग के लिए कार खरीदना थोड़ा और महंगा हो जाएगा।
पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात शुल्क पर मिलने वाली छूट अब 15 जुलाई तक बढ़ी
पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भारी तनाव और युद्ध के हालातों के बीच देश के भीतर कच्चे माल की आपूर्ति को निरंतर बनाए रखने और औद्योगिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा व्यापारिक फैसला लिया है। सरकार ने विभिन्न महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात पर मिलने वाली शून्य सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) की विशेष छूट अवधि को आगे बढ़ाते हुए अब 15 जुलाई तक के लिए लागू कर दिया है। इससे पहले सरकार ने 2 अप्रैल को देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करने के लिए करीब 40 महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात पर पूर्ण सीमा शुल्क छूट की घोषणा की थी, जिसकी समय-सीमा 30 जून को पूरी तरह समाप्त होने वाली थी। सरकार के इस फैसले से प्लास्टिक, पैकेजिंग, कपड़ा उद्योग, दवा निर्माण, ऑटोमोबाइल कलपुर्जे और केमिकल जैसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों को भारी आर्थिक लाभ मिलेगा जो इन कच्चे मालों पर निर्भर हैं। इस नीति के तहत मेथनॉल, एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यून, स्टाइरीन, डाइक्लोरोमीथेन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर और पॉलीब्यूटाडाइन जैसे दर्जनों रसायनों को सीमा शुल्क से पूरी तरह मुक्त रखा गया है।
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