Amarnath Yatra

अमरनाथ यात्रा की अभेद्य सुरक्षा : सीसीटीवी कैमरों का बिछा जाल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से होगी संदिग्धों की पहचान

जम्मू-कश्मीर धर्म-आस्था राष्ट्रीय

एजेंसी, जम्मू-कश्मीर। Amarnath Yatra 2026 Security : पवित्र अमरनाथ गुफा की सालाना तीर्थयात्रा को पूरी तरह सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने इस बार अभेद्य और आधुनिक सुरक्षा चक्र तैयार किया है। इस 57 दिवसीय धार्मिक यात्रा की शुरुआत से पहले सुरक्षा बलों ने अपनी तैयारियों, तालमेल और क्षमता को परखने के लिए एक बेहद बड़े स्तर पर युद्धक अभ्यास यानी ‘मॉक ड्रिल’ का आयोजन किया। कश्मीर के हिमालयी क्षेत्र में 3,880 मीटर की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित इस पवित्र गुफा मंदिर की यात्रा आगामी 3 जुलाई से दो अलग-अलग पारंपरिक रास्तों से शुरू होने जा रही है। इस बार यात्रा मार्ग पर प्राकृतिक आपदाओं से लेकर किसी भी प्रकार के मानवीय खतरे से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और विभिन्न सुरक्षा बलों का एक अभूतपूर्व तालमेल देखने को मिल रहा है।

दो अलग-अलग पारंपरिक रास्तों से शुरू होगी 57 दिनों की पवित्र यात्रा

प्रशासन से प्राप्त आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, देश के कोने-कोने से आने वाले शिव भक्तों और तीर्थयात्रियों का सबसे पहला आधिकारिक जत्था 2 जुलाई 2026 को जम्मू के भगवती नगर स्थित यात्री निवास से कश्मीर के लिए रवाना होगा। इसके बाद 3 जुलाई से मुख्य यात्रा शुरू होगी, जो दो अलग-अलग मार्गों से संचालित की जाएगी। इसमें पहला मार्ग अनंतनाग जिले से शुरू होने वाला पारंपरिक और बेहद प्रसिद्ध 48 किलोमीटर लंबा नुनवान-पहलगाम मार्ग है, जबकि दूसरा मार्ग गांदरबल जिले से शुरू होने वाला अपेक्षाकृत छोटा लेकिन अत्यंत खड़ी चढ़ाई वाला 14 किलोमीटर लंबा बालटाल मार्ग है। इन दोनों ही दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए सुरक्षाकर्मियों की भारी तैनाती की गई है।

बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार, आपात स्थिति से निपटने का अभ्यास

कश्मीर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक वी.के. बिरदी ने सुरक्षा प्रबंधों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सभी केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ मिलकर यात्रा मार्ग पर कई परतों वाला एक मजबूत बहुस्तरीय सुरक्षा चक्र लागू किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बड़े सुरक्षा अभ्यास और मॉक ड्रिल को आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि मोर्चे पर तैनात हर एक सुरक्षाकर्मी को उसकी विशेष भूमिका और जिम्मेदारी के बारे में पूरी स्पष्टता रहे। इस कड़े जमीनी अभ्यास के जरिए यह सुनिश्चित किया गया है कि यदि यात्रा के दौरान मौसम की खराबी या किसी अन्य अप्रत्याशित आपात स्थिति का सामना करना पड़ता है, तो वहां मौजूद सुरक्षा बल बिना किसी देरी के हालात पर पूरी तरह नियंत्रण पा सकें। इस बार सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से अचूक और आधुनिक बनाने के लिए नवीनतम डिजिटल प्रौद्योगिकियों का बड़े पैमाने पर सहारा लिया जा रहा है।

चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों की नजर, संदिग्धों को पकड़ने के लिए काम करेगी एआई तकनीक

पुलिस महानिरीक्षक ने तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देते हुए बताया कि इस साल जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अमरनाथ यात्रा के दोनों मुख्य मार्गों, ठहरने के शिविरों और संवेदनशील मोड़ों पर अत्याधुनिक क्लोज्ड सर्किट टेलीविजन यानी सीसीटीवी कैमरों का एक बहुत बड़ा और फैला हुआ नेटवर्क स्थापित किया है। इस डिजिटल निगरानी प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तकनीक से पूरी तरह लैस है। इस प्रणाली के भीतर चेहरा पहचानने वाले आधुनिक सॉफ्टवेयर (फेस रिकग्निशन) का उपयोग किया गया है, जो यात्रा क्षेत्र में प्रवेश करने वाले किसी भी वांछित, संदिग्ध या असामाजिक तत्व की पहचान पलक झपकते ही कर लेगा। जैसे ही कंप्यूटर स्क्रीन पर किसी संदिग्ध की पहचान उजागर होगी, वैसे ही वहां तैनात त्वरित कार्य बल के जवान तुरंत हरकत में आकर उस व्यक्ति को चिन्हित इलाके से दूर हटा देंगे ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।

प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए एनडीएमए ने तैयार किया डिजिटल नक्शा

सुरक्षा के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को कम करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) भी पूरी मुस्तैदी के साथ काम कर रहा है। आपदा प्रबंधन की टीम ने जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और स्थानीय जिला आपदा प्रबंधन इकाइयों के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण बैठकें की हैं और एक संयुक्त कार्य योजना तैयार की है। इसके तहत भूस्खलन, चट्टानें खिसकने, हिमस्खलन की अत्यधिक आशंका वाले संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों और ग्लेशियरों की भौगोलिक स्थिति का आधुनिक सैटेलाइट के जरिए एक सटीक डिजिटल नक्शा (मैपिंग) तैयार किया गया है। इस वैज्ञानिक डेटा और नक्शों के आधार पर ही संवेदनशील पहाड़ी चौकियों पर विशेष पर्वतीय बचाव दलों (माउंटेन रेस्क्यू टीम) की एडवांस तैनाती की गई है, ताकि बर्फीले तूफानों या पहाड़ी रास्तों पर मौसम से जुड़ी किसी भी आकस्मिक विपदा से श्रद्धालुओं की जान बचाई जा सके।

श्रीनगर पुलिस के नेतृत्व में सभी नागरिक और सुरक्षा विभागों की संयुक्त मॉक ड्रिल

पवित्र यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप देते हुए श्रीनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जी.वी. संदीप चक्रवर्ती ने बताया कि श्रीनगर पुलिस के दिशा-निर्देशन में शहर और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में एक बेहद व्यापक और संयुक्त मॉक ड्रिल का सफल संचालन किया गया। इस संयुक्त अभ्यास में स्थानीय नागरिक प्रशासन के विभिन्न विभागों, वीआईपी सुरक्षा शाखा, शहर की यातायात पुलिस शाखा, अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियों, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा दल, राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य सभी प्रमुख हितधारकों ने एक साथ हिस्सा लिया। इस सामूहिक ड्रिल के दौरान आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत प्रतिक्रिया देने, घायलों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और भीड़ को नियंत्रित करने जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं का पूरी सटीकता के साथ सजीव अभ्यास किया गया ताकि पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कोई भी कसर बाकी न रहे।

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