एजेंसी, भोपाल। MP Employee Promotion Rules : मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार की तरफ से एक बहुत बड़ी और बेहद महत्वपूर्ण खुशखबरी सामने आई है। प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने सरकारी विभागों में लंबे समय से लंबित पड़ी पदोन्नति की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है। इसके तहत अब राज्य में शासकीय सेवकों को केवल उनकी वरिष्ठता (सीनियरिटी) के भरोसे प्रमोशन नहीं मिलेगा, बल्कि अब ‘सीनियरिटी-कम-मैरिट’ यानी वरिष्ठता के साथ-साथ कार्य कुशलता और योग्यता को मुख्य आधार बनाया जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाते हुए सभी विभागाध्यक्षों के साथ एक उच्च स्तरीय पहली बैठक की है, जिसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी विभाग अपने-अपने कैडर के अनुसार एकमुश्त वरिष्ठता सूची केवल 1 सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से तैयार कर लें। यह पूरी कमान और सूचियां मध्य प्रदेश लोकसेवा पदोन्नति नियम 2025 के कड़े प्रावधानों के तहत तैयार की जा रही हैं, जिससे प्रशासनिक तंत्र में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
अतिरिक्त सचिव अजय कटेसरिया की अध्यक्षता में बैठक, 4.50 लाख कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ
इस महत्वपूर्ण और निर्णायक बैठक का संचालन सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त सचिव अजय कटेसरिया ने किया। सरकार के इस बड़े कदम से मध्य प्रदेश के लगभग 4.50 लाख शासकीय सेवकों को सीधा और बड़ा फायदा होने की पूरी उम्मीद है। नए नियमों के लागू होने से जहां एक तरफ पात्र कर्मचारियों को समय पर उच्च पदों का प्रभार और वित्तीय लाभ मिल सकेगा, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और तेजी आएगी। यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें विभागों को समय सीमा के भीतर काम पूरा करने की सख्त हिदायत दी गई है।
नए नियमों से युवाओं के लिए खुलेंगे सरकारी नौकरी के 2 लाख नए अवसर
मध्य प्रदेश लोकसेवा पदोन्नति नियम 2025 के लागू होने से राज्य के रोजगार बाजार में भी एक बड़ी हलचल देखने को मिलेगी। इस नियम के तहत जैसे ही मौजूदा कर्मचारियों को उच्च पदों पर पदोन्नति दी जाएगी, वैसे ही राज्य के अलग-अलग विभागों में नीचे के लगभग 2 लाख पद पूरी तरह से खाली हो जाएंगे। इन खाली पदों को भरने के लिए सरकार नए सिरे से सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू करेगी, जिससे राज्य के लाखों शिक्षित युवाओं को सरकारी नौकरी पाने का एक सुनहरा और ऐतिहासिक अवसर हासिल होगा।
वर्ष 2016 से रुका था प्रमोशन का पहिया, मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद प्रक्रिया तेज
मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन का मामला पिछले कई वर्षों से एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बना हुआ था। असल में वर्ष 2016 से राज्य में कानूनी पेचीदगियों के कारण पदोन्नति की प्रक्रिया पर पूरी तरह से रोक लगी हुई थी। इस लंबे अंतराल के दौरान लाखों की संख्या में शासकीय सेवक बिना किसी पदोन्नति या उच्च पद का लाभ पाए ही सीधे सेवानिवृत्त (रिटायर) हो गए, जिससे कर्मचारियों में भारी निराशा व्याप्त थी। इस गतिरोध को तोड़ने के लिए जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद सार्वजनिक रूप से पदोन्नति प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की एक बड़ी घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद सरकार ने तत्परता दिखाते हुए नए नियम तैयार किए। हालांकि, शुरुआत में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के बीच आपसी सहमति नहीं बन पाने के कारण कुछ विवाद उत्पन्न हुआ और मामला फिर से न्यायालय की चौखट पर पहुंच गया था। लेकिन हाल ही में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी प्रशासनिक विभागों को बिना किसी देरी के जल्द से जल्द पदोन्नति की प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
आरक्षण वर्ग के अनुसार खाली पदों का होगा सटीक वर्गीकरण
नए नियमों के तहत पदोन्नति की प्रक्रिया को बहुत ही सुव्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके तहत विभागों में जितने भी खाली पद मौजूद हैं, उन्हें सबसे पहले आरक्षणवार अलग-अलग वर्गों में पूरी तरह विभाजित किया जाएगा। इस विभाजन के तहत कुल खाली पदों का 16 प्रतिशत पद अनुसूचित जाति (एससी) के कर्मचारियों के लिए आरक्षित रखा जाएगा, जबकि कुल पदों का 20 प्रतिशत हिस्सा अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के शासकीय सेवकों के लिए सुरक्षित किया जाएगा। इन दोनों आरक्षित वर्गों के कोटे को तय करने के बाद जो भी शेष पद बचेंगे, वे सभी अन्य दावेदारों के लिए सामान्य पूल में डाल दिए जाएंगे। इस सामान्य या अनारक्षित कोटे के पदों पर एससी और एसटी वर्ग के वे शासकीय सेवक भी अपनी मैरिट और योग्यता के आधार पर पूरी तरह हिस्सा ले सकेंगे जो सामान्य मानकों को पूरा करते हैं।
कर्मचारियों की गोपनीय रिपोर्ट तय करेगी पदोन्नति का भविष्य
मध्य प्रदेश लोकसेवा पदोन्नति नियम 2025 के तहत अब किसी भी कर्मचारी के प्रमोशन में उसकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) सबसे बड़ी और निर्णायक भूमिका निभाने वाली है। जिन शासकीय सेवकों की सर्विस बुक और गोपनीय रिपोर्ट लगातार अच्छी और बेदाग रही है, उन्हें पदोन्नति पाने में किसी भी तरह की प्रशासनिक अड़चन या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही सरकार ने उन मामलों के लिए भी स्थिति साफ की है जहां किसी कर्मचारी की गोपनीय रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है। नियमों के मुताबिक, यदि गोपनीय रिपोर्ट गायब या अपूर्ण होने में संबंधित शासकीय सेवक की खुद की कोई लापरवाही या गलती पाई जाती है, तो उसका प्रमोशन तुरंत प्रभाव से रोक दिया जाएगा। इसके विपरीत, यदि गोपनीय रिपोर्ट समय पर तैयार न होने या खो जाने की गलती प्रशासनिक विभाग की तरफ से होगी, तो उस स्थिति में कर्मचारी के हितों की रक्षा की जाएगी और उसे पदोन्नति के लिए पूरी तरह से पात्र माना जाएगा।
संभावित कानूनी अड़चनों पर मंथन, कर्मचारी संगठनों में विरोध के सुर भी तेज
पदोन्नति का यह संवेदनशील मामला पूर्व में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से लेकर देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक का चक्कर काट चुका है। एक महत्वपूर्ण याचिका पर देश की शीर्ष अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और केवल अंतिम फैसला आना बाकी है। सचिवालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार ने पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू करने से पहले भविष्य में आने वाली सभी संभावित कानूनी अड़चनों और तकनीकी पेंचों पर बहुत ही बारीकी से कानूनी विशेषज्ञों के साथ मंथन कर लिया है ताकि इस बार प्रक्रिया बीच में न रुके। दूसरी तरफ, नए नियमों को लेकर राज्य के कुछ कर्मचारी संगठनों ने अभी से विरोध का बिगुल फूंक दिया है। सामान्य वर्ग, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक अधिकारी कर्मचारी संस्था (सपाक्स) के साथ-साथ मंत्रालय के कई अन्य अधिकारी-कर्मचारी संगठनों का साफ तौर पर कहना है कि नए नियमों के वर्तमान स्वरूप से केवल एसटी और एससी वर्ग के शासकीय सेवकों को ही एकतरफा फायदा पहुंचेगा, जबकि अनारक्षित या सामान्य वर्ग के कर्मचारियों को इसमें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
नई पदोन्नति नीति की प्रमुख विशेषताएं और क्रांतिकारी बदलाव
यदि मध्य प्रदेश में यह नई पदोन्नति नीति पूरी तरह से धरातल पर उतरती है, तो राज्य के प्रशासनिक ढांचे में कई बड़े और अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिलेंगे, जिन्हें नीचे दिए गए बिंदुओं के तहत समझा जा सकता है:
अब राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को आईएएस और आईपीएस कैडर की तर्ज पर समय से पहले यानी एडवांस में पदोन्नति का लाभ मिल सकेगा, जिससे उन्हें लंबे समय तक इंतजार नहीं करना होगा।
ऊंचे पदों पर बैठे श्रेणी-1 और श्रेणी-2 के अफसरों के प्रमोशन के लिए ‘मैरिट-कम-सीनियरिटी’ (योग्यता को प्राथमिकता) को मुख्य पैमाना बनाया जाएगा, जबकि निचले स्तर के कर्मियों के लिए ‘सीनियरिटी-कम-मैरिट’ (वरिष्ठता के साथ योग्यता) का आधार लागू होगा।
चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के प्रमोशन के लिए किसी जटिल परीक्षा या कड़े मानक की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि उनका केवल सेवा के नियमों के तहत पात्र होना ही पदोन्नति के लिए पूरी तरह पर्याप्त माना जाएगा।
नई व्यवस्था में पुरानी परिभ्रमण व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है, जिसके कारण अब विभागों में एक साथ अधिक संख्या में खाली पदों पर बंपर पदोन्नतियां की जा सकेंगी। इसके साथ ही गठित विभागीय समिति को कर्मचारियों की उपयुक्तता का निर्धारण करने के व्यापक कानूनी अधिकार सौंपे गए हैं।
यदि किसी शासकीय सेवक ने किसी विशेष वर्ष के दौरान अपनी आधे वर्ष (6 महीने) की सेवा अवधि को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, तो नए नियमों के तहत ऐसे मामलों में उसे पूरे वर्ष की सेवा अवधि पूरी किया हुआ मान लिया जाएगा। गौरतलब है कि पुराने नियमों में ऐसे कर्मचारियों को अपात्र घोषित कर दिया जाता था, जिससे उनका प्रमोशन सालभर के लिए टल जाता था।
किसी कर्मचारी की केवल गोपनीय प्रतिवेदन (एसीआर) की कमी या उसके समय पर न मिलने के तकनीकी कारणों के चलते अब विभाग उसकी पदोन्नति को जबरन नहीं रोक सकेंगे।
यदि किसी कर्मचारी को विभाग की तरफ से केवल एक साधारण ‘कारण बताओ नोटिस’ (शो कॉज नोटिस) जारी किया गया है, तो महज इसी आधार पर उसे पदोन्नति के लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा, जब तक कि उस पर दोष सिद्ध न हो जाए।
जो कर्मचारी मूल विभाग को छोड़कर अन्य संस्थाओं में प्रतिनियुक्ति (डेप्युटेशन) पर गए हुए हैं, विभाग अब प्रमोशन के लिए उनका लंबा इंतजार नहीं करेंगे। बल्कि प्रतिनियुक्ति पर गए कर्मचारियों के मूल पदों के स्थान पर विभाग में मौजूद अन्य योग्य कर्मचारियों को तुरंत पदोन्नति देकर काम को आगे बढ़ाया जाएगा।
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