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उद्योग व्यवसाय को मजबूती देने कटिबद्ध एमपी की मोहन सरकार

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उद्योग व्यवसाय को मजबूती देने कटिबद्ध एमपी की मोहन सरकार

मध्यप्रदेश में ‘सशक्त उद्यमी, समृद्ध मध्यप्रदेश’ के ध्येय वाक्य के साथ शुरू हुई नई औद्योगिक क्रांति राज्य को देश के आर्थिक मानचित्र पर एक अग्रणी और प्रगतिशील प्रदेश के रूप में स्थापित कर रही है। हाल ही में भोपाल के रवींद्र भवन में अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर आयोजित समिट इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि राज्य का नेतृत्व केवल खोखली घोषणाओं में विश्वास नहीं रखता, बल्कि उसकी नीतियों में दूरदर्शिता, पारदर्शिता और त्वरित क्रियान्वयन की एक अद्भुत झलक दिखाई देती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई में मध्यप्रदेश सरकार ने जिस प्रकार प्रत्येक वर्ष को एक विशिष्ट कल्याणकारी संकल्प के साथ जोड़ने की अनूठी परंपरा शुरू की है, वह राज्य के चौमुखी विकास के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को उजागर करती है। सरकार द्वारा वर्ष 2024 को गरीब कल्याण और वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में मनाकर धरातल पर जो बुनियादी बदलाव किए गए, उसी का अगला और अधिक परिपक्व चरण अब हमारे सामने है। सरकार का यह रणनीतिक निर्णय अत्यंत सराहनीय है कि वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ और आगामी वर्ष 2027 को ‘युवा वर्ष’ या ‘युवा कल्याण वर्ष’ के रूप में समर्पित किया जा रहा है। कृषि और युवा शक्ति, किसी भी राज्य की प्रगति के दो सबसे मजबूत स्तंभ होते हैं। कृषि को आधुनिक तकनीक से जोड़कर नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प और इसके लिए शून्य ब्याज दर पर ऋण की व्यवस्था किसानों को एक बड़ा संबल प्रदान कर रही है। विशेषकर ऋण चुकाने की अवधि को पारंपरिक ’31 मार्च की बाध्यता’ से मुक्त कर, ऋण लेने की तिथि से पूरे 12 महीने की मोहलत देना एक ऐसा युगांतकारी और व्यावहारिक निर्णय है जो हमारे अन्नदाताओं को मानसिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगा।

​इस दूरदर्शी नीति का ही विस्तार आगामी वर्ष 2027 में ‘युवा वर्ष’ के रूप में देखने को मिलेगा, जो प्रदेश की ऊर्जावान युवा पीढ़ी को स्वर्णिम भविष्य की ओर ले जाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। इसके साथ ही, आगामी जनवरी माह में राजधानी भोपाल में आयोजित होने वाली ‘ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट’ (GIS) निवेशकों के लिए एक ऐसे महाकुंभ के रूप में सजने जा रही है, जो न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर राज्य के औद्योगिक कौशल का लोहा मनवाएगी। मध्यप्रदेश की यह विशेषता रही है कि यहाँ होने वाले नीतिगत प्रयास केवल कागजों तक सीमित नहीं रहते। इस बात की पुष्टि मुख्य सचिव के इस बयान से होती है कि वैश्विक निवेश सम्मेलनों के दौरान मिले प्रस्तावों में से 9 लाख करोड़ रुपये का निवेश आज धरातल पर साकार रूप लेने लगा है। इसके अतिरिक्त, हाल के दिनों में हुए विभिन्न एमओयू में से 9 हजार 300 करोड़ रुपये का निवेश वास्तविक रूप से जमीन पर उतर चुका है, जिसमें कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, जापान, चीन, आयरलैंड और दक्षिण कोरिया जैसी वैश्विक महाशक्तियों की प्रतिष्ठित कंपनियों द्वारा किया जा रहा निवेश शामिल है। यह विदेशी निवेश इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि वैश्विक पटल पर मध्यप्रदेश की छवि एक अत्यंत सुरक्षित, विश्वसनीय और उद्योग-अनुकूल राज्य के रूप में सुदृढ़ हुई है।
​राज्य के इस औद्योगिक कायाकल्प में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर रीढ़ की हड्डी की तरह काम कर रहा है। प्रदेश के कुल निर्यात में लगभग 49 प्रतिशत की भारी-भरकम हिस्सेदारी अकेले इसी क्षेत्र से आती है, जो यह दर्शाती है कि यहाँ के छोटे और मध्यम स्तर के उद्यमी कितने सामर्थ्यवान हैं। एमएसएमई उत्पादों के निर्यात के मामले में महज एक वर्ष के भीतर देश के भीतर चार स्थानों की लंबी छलांग लगाकर 11वें स्थान पर पहुँच जाना राज्य के असाधारण आर्थिक विकास की गति को रेखांकित करता है। इस गति को बनाए रखने के लिए सरकार ने एमएसएमई विभाग का बजट 1100 करोड़ रुपये से सीधे बढ़ाकर 2100 करोड़ रुपये कर दिया है, जिससे उद्यमियों को वित्तीय प्रोत्साहन के रूप में सीधी और त्वरित सहायता मिलना सुनिश्चित हुआ है। अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा एक सिंगल क्लिक के माध्यम से 750 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को 235 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि और 137 स्टार्टअप्स को डेढ़ करोड़ रुपये की सहायता राशि का सीधा हस्तांतरण करना प्रशासनिक चुस्ती और पारदर्शिता की एक मिसाल है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विभाग ने मई 2026 तक की अपनी सभी पिछली देनदारियों का पूर्ण भुगतान कर दिया है, जिससे सरकार और उद्यमियों के बीच आपसी विश्वास का एक अटूट पुल निर्मित हुआ है। उद्योग स्थापना के लिए भूमि की उपलब्धता को सुगम बनाते हुए पिछले एक वर्ष में 1200 भूखंडों का आवंटन किया गया है और आगामी डेढ़ वर्ष में 3000 और भूखंड आवंटित करने का लक्ष्य रखा गया है, जो इस बात का संकेत है कि राज्य में औद्योगिक बुनियादी ढांचा कितनी तीव्र गति से फैल रहा है।
​इस पूरी औद्योगिक विकास गाथा का सबसे गौरवशाली और प्रेरणादायी पहलू यह है कि इसमें ‘नारी शक्ति’ की भागीदारी अभूतपूर्व ढंग से बढ़ी है। प्रदेश में संचालित 4 लाख 41 हजार से अधिक एमएसएमई इकाइयों की बागडोर आज हमारी माताओं और बहनों के हाथों में सुरक्षित है। विगत दो वर्षों के भीतर एमएसएमई क्षेत्र में महिलाओं के प्रतिनिधित्व में 59 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, और वर्तमान में राज्य के कुल स्टार्टअप्स में से 50 प्रतिशत से अधिक का नेतृत्व देश की बेटियां कर रही हैं। यह प्रगति केवल आर्थिक सशक्तिकरण की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक गहरे सामाजिक बदलाव और लैंगिक समानता की नई इबारत लिख रही है। महिलाओं की सहूलियत के लिए वर्किंग वुमन हॉस्टल का निर्माण और विभिन्न जिलों में नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास इस सशक्तिकरण को और अधिक स्थायित्व प्रदान करेगा। इसके अलावा, राज्य सरकार का ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ यानी व्यापार करने में सरलता पर जो विशेष ध्यान है, उसने प्रशासनिक लालफीताशाही की कमर तोड़ दी है। भारत सरकार द्वारा निर्धारित 23 प्रमुख सुधारों को शत-प्रतिशत लागू कर देश में ‘टॉप अचीवर’ का दर्जा हासिल करना और ‘जनविश्वास बिल’ पारित कर 900 से अधिक गैर-जरूरी एवं जटिल कानूनों को शिथिल करना एक क्रांतिकारी कदम है। 100 से अधिक ऐसे कानूनों को, जिनमें पूर्व में जेल या सजा का प्रावधान था, केवल जुर्माने या पेनाल्टी में बदलकर सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वह उद्यमियों को अपराधी नहीं, बल्कि राज्य के विकास में अपना महत्वपूर्ण साझेदार मानती है।
​मध्यप्रदेश सरकार की नीतियां केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सुदूर ग्रामीण अंचलों और पारंपरिक कृषि उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भी उतनी ही तत्पर हैं। राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक जिले का एक अनूठा ‘रेवेन्यू मॉडल’ तैयार करने की योजना और स्थानीय अनुकूलता के आधार पर व्यापार को बढ़ावा देना, क्षेत्रीय असंतुलन को समाप्त करने की दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है। ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के तहत राज्य को मिली उल्लेखनीय सफलता और पिछले एक वर्ष में ही प्रदेश के 20 विशिष्ट उत्पादों को ‘जीआई टैग’ (Geographical Indication Tag) मिलना यह साबित करता है कि हमारी पारंपरिक कला और कृषि उपजों में वैश्विक बाजार को आकर्षित करने का अपार सामर्थ्य है। इसके साथ ही, किसानों के हित में 25 वर्षों से लंबित कपास पर मंडी शुल्क को आधा करने की मांग को पूरा करना और अरहर दाल के प्रसंस्करण की कठिनाइयों को दूर करना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। अब प्रदेश का कृषि उत्पाद कच्चे माल के रूप में बाहर नहीं जाएगा, बल्कि यहीं प्रसंस्कृत होकर मूल्य संवर्धन के साथ वैश्विक बाजारों में अपनी धाक जमाएगा। शिक्षा के क्षेत्र में भी ‘सांदीपनि विद्यालयों’ के माध्यम से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और मूल्य आधारित शिक्षा देने की पहल यह सुनिश्चित करेगी कि आने वाली पीढ़ी केवल आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि बौद्धिक और चारित्रिक रूप से भी समृद्ध बने। अंततः, यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल, पारदर्शी और नीतिगत नेतृत्व में मध्यप्रदेश वर्तमान में देश के सबसे युवा और जीवंत प्रदेश के रूप में उभर रहा है, जहाँ सरकार, समाज, किसान, युवा और उद्यमी मिलकर एक आत्मनिर्भर और स्वर्णिम मध्यप्रदेश के भव्य प्रासाद का निर्माण कर रहे हैं।

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