
मध्य प्रदेश की डॉक्टर मोहन यादव सरकार ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को काफी गंभीरता से लिया है। यह संकेत उस तैयारी से मिल रहे हैं जो इन दिनों शासकीय और प्रशासकीय स्तर पर देखने को मिल रही है। आने वाले निवेशकों को निवेश के लिए कैसे तैयार किया जाए, उन्हें मानसिक रूप से कैसे संतुष्ट किया जाए कि छोटे बड़े और मझोले उद्योग लगाने के लिए मध्य प्रदेश की जमीन उनके लिए मुफीद साबित होगी। इसके लिए युद्ध स्तर पर तैयारी की जा रही है। शासकीय अधिकारी कोई भी कसर इस प्रकार की शेष छोड़ना नहीं चाहते, जिसके चलते दशमलव एक प्रतिशत भी असफलता की आशंकाएं भी सिर उठा सकें। संभवतः यह उल्लेखनीय स्तर पर हो रहा है कि शासन यह पता भी लग रहा है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में कितने तरह के उद्योगपति अर्थात निवेशक आ सकते हैं और उन्हें कौन-कौन से विषयों पर आधारित प्रस्तुतीकरण दिया जा सकता है। जिसके आधार पर उन्हें अधिकतम निवेश के लिए प्रेरित ही ना किया जाए, बल्कि इसके लिए पूरी तरह तैयार किया जा सके। इस तैयारी की एक मिसाल यह भी है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में अलग-अलग क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं बताने के लिए विभागीय और थीमेटिक समिट भी आयोजित की जाने वाली हैं।
इनके माध्यम से देश और विदेश से आ रहे निवेशकों को विषय वस्तु समझाने के लिए अनेक कैसे विशेषज्ञ एकत्रित किए जा रहे हैं, जो उद्योग, वित्त, मानव संसाधन, ऊर्जा, हेल्थ, मैन्युफैक्चरिंग आदि क्षेत्र में विशेषज्ञता रखते हैं। यह विशेषज्ञ लोग निवेशकों के सामने अपने अनुभव रखेंगे और उनके आधार पर निवेशकों को संतुष्ट करने का प्रयास करेंगे कि यदि वे लोग मध्य प्रदेश की जमीन पर उद्योग लगाना चाहते हैं या फिर स्थापित उद्योगों में निवेश करना चाहते हैं, व्यावसायिक तौर पर भी यदि किसी की निवेश में रुचि है तो उनकी सफलता के लिए मध्य प्रदेश शासन, स्थानीय प्रशासन सदैव तत्पर बने रहेंगे।
उद्योग हो, व्यवसाय हो, आयात निर्यात का व्यापार हो, सभी क्षेत्र को लेकर अनुकूल माहौल में भूमि कहां उपलब्ध होगी, विद्युत कनेक्शन किस प्रकार सहजता से उपलब्ध होगा, पानी की आपूर्ति किस प्रकार बहाल करना है, आवश्यकता अनुसार मानव संसाधन कैसे मुहैया कराया जाए, यदि कच्चे या तैयार माल के परिवहन का विषय है तो उसके लिए सुविधा संपन्न राजमार्गों के कॉरिडोर किस प्रकार तैयार किए गए हैं और किए जाने हैं, इन सबके लिए सरकार ने एक प्रकार से जमीनी तैयारी कर रखी है।
यहां एक सावधानी काबिले तारीफ है। वह यह कि जब कोई उद्योगपति अथवा निवेदक किसी प्रोजेक्ट में पैसा लगता है तब कई बार प्रदेश के साथ-साथ केंद्रीय विभागों के साथ भी कागजी औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। कई बार इन कार्यों में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ जाता है। इससे निवेशक हतोत्साहित न हो, हो इसके लिए मध्य प्रदेश शासन ने और खास तौर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट को सफल बनाने के लिए यह सुनिश्चित किया जा चुका है कि इसमें राज्य के साथ-साथ केंद्र स्तर के उच्च अधिकारी भी उपस्थित रहने वाले हैं, जो निवेशकों को इस बात के लिए संतुष्ट करेंगे की वह आगे आएं तो केवल प्रदेश ही नहीं केंद्र की सरकार भी उनके साथ कदमताल करने को तैयार है। इस बाबत अभी तक केंद्र से वस्त्र मंत्रालय, केंद्रीय फार्मास्यूटिकल विभाग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग, खनिज विभाग आदि के प्रमुख अधिकारियों ने जीआईएस में शामिल होने और अपनी सेवाएं देने को लेकर जमीनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
मध्य प्रदेश में निवेश करने के लिए धनाढ्य वर्ग के पास अनेक विकल्प मौजूद हैं। यह बात साबित करने के लिए यहां की सरकार ने समिट के ठीक पहले सोना और हीरा खनन को लेकर 24 नए ब्लॉक खोल दिए हैं। फल स्वरुप स्थिति यह बन गई है कि निवेशक यहां पहुंचें, इसके पहले उनके पास यह सभी विकल्प पहुंचना शुरू हो गए हैं। इससे निवेशकों को यहां आने से पहले अपना मन सकारात्मक बनाने और निवेश को लेकर निर्णायक स्थिति में भोपाल पहुंचने की सूरत बन सकेगी। सरकार की इस पहल से निवेशक इस क्षेत्र में भी पैसा लगाने हेतु माहौल बना सकेंगे।
इसके अलावा भी लाइमस्टोन, मैंगनीज, बॉक्साइट, डायमंड बेस मेटल, सिल्वर, कॉपर आदि क्षेत्रों में भी निवेशक पैसा लगा पाएं, इस बाबत मध्य प्रदेश शासन ने माहौल बनाना शुरू कर दिया है। कुल मिलाकर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को लेकर जो तैयारी मध्य प्रदेश शासन की ओर से दिखाई दे रही है, उनसे यह सुनिश्चित प्रतीत होता है कि मध्य प्रदेश को भारी पैमाने पर निवेश प्राप्त होने जा रहा है। इससे स्थानीय जनता को आर्थिक लाभ और नौकरी, व्यवसाय आदि के अवसर प्राप्त होने जा रहे हैं।


