कराची में अर्धसैनिक बल के ठिकाने पर भीषण आतंकी हमला, चार की मौत
एजेंसी, कराची। पाकिस्तान का सबसे बड़ा वित्तीय केंद्र और तटीय शहर कराची एक बार फिर भीषण आतंकी हिंसा की चपेट में आ गया है। महानगर के गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में स्थित पाकिस्तान रेंजर्स के प्रांतीय मुख्यालय को निशाना बनाकर किए गए एक सुनियोजित आत्मघाती हमले और उसके बाद हुई अंधाधुंध गोलीबारी से पूरा इलाका दहल उठा। इस दुस्साहसिक हमले में कम से कम चार लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता की बात यह है कि हमला बेहद सुरक्षित माने जाने वाले सैन्य क्षेत्र में किया गया, जिससे स्थानीय प्रशासन और खुफिया तंत्र की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, हताहतों की संख्या में बढ़ोतरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि कई घायलों की स्थिति नाजुक बनी हुई है।
*🚨کراچی میں گلشنِ اقبال کے قریب رینجرز کی تنصیب پر بارود سے بھری گاڑی کا حملہ ناکام، 5 دہشت گرد ہلاک*
*🔥گیٹ پر تعینات چوکس سکیورٹی اہلکاروں نے بروقت اور مؤثر کارروائی کرتے ہوئے حملہ آوروں کو روک لیا*
*💥5 دہشت گرد ہلاک، علاقے میں کلیئرنس آپریشن جاری ہے۔ رینجرز حکام* pic.twitter.com/suEKf0a7gh
— QOMINEWS (@QOMINEWS) June 27, 2026
सिलसिलेवार धमाके और आधे घंटे तक चली मुठभेड़
घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए चश्मदीदों और सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे। शुरुआती जांच के मुताबिक, एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को रेंजर्स कंपाउंड के मुख्य प्रवेश द्वार के पास उड़ा लिया। यह पहला विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि इसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई और आसपास की इमारतों की खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हो गए। इस शुरुआती धमाके के तुरंत बाद दो अन्य छोटे विस्फोट भी हुए, जिनका उद्देश्य सुरक्षा बलों में अफरा-तफरी पैदा करना था। मुख्य धमाके की आड़ लेकर हमलावर के अन्य सशस्त्र साथियों ने आधुनिक हथियारों से परिसर पर धावा बोल दिया और तैनात जवानों पर भारी गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद सुरक्षा बलों ने भी त्वरित जवाबी कार्रवाई की, जिससे पूरे इलाके में एक भीषण मुठभेड़ छिड़ गई। दोनों पक्षों के बीच करीब आधे घंटे तक लगातार गोलियां चलती रहीं, जिससे पूरा गुलिस्तान-ए-जौहर ब्लॉक-6 का क्षेत्र युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया।
संवेदनशील शैक्षणिक गलियारे में सुरक्षा व्यवस्था भंग
यह हमला कराची के एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मार्ग पर हुआ। गुलिस्तान-ए-जौहर की यह मुख्य सड़क कराची विश्वविद्यालय समेत शहर के कई बड़े उच्च शिक्षण संस्थानों को आपस में जोड़ती है। इसके अलावा, इसी मार्ग पर पाकिस्तान मौसम विज्ञान विभाग का प्रमुख कार्यालय भी स्थित है। छात्रों, प्रोफेसरों और सरकारी कर्मचारियों की भारी आवाजाही वाले इस क्षेत्र में अचानक हुए इस हमले से चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। हमले के तुरंत बाद सुरक्षा रणनीति के तहत इस पूरे शैक्षणिक और प्रशासनिक गलियारे को आम जनता के लिए बंद कर दिया गया। भारी हथियारों से लैस सेना और पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने क्षेत्र में छिपे संभावित आतंकियों की धरपकड़ के लिए एक व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया है, जिसके कारण स्थानीय निवासियों को घरों में ही रहने की हिदायत दी गई है।
अर्धसैनिक बल की भूमिका और सिंध रेंजर्स का महत्व
पाकिस्तान रेंजर्स देश की एक अत्यंत महत्वपूर्ण अर्धसैनिक शक्ति है, जो सीधे तौर पर संघीय गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करती है। हालांकि, आंतरिक सुरक्षा के गंभीर संकट या सीमा सुरक्षा की आवश्यकताओं को देखते हुए यह बल अक्सर पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर भी संयुक्त अभियानों को अंजाम देता है। प्रशासनिक और भौगोलिक दृष्टि से इस बल को दो मुख्य कमानों में विभाजित किया गया है। पहली पंजाब रेंजर्स है, जिसका मुख्य काम भारत से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा की निगरानी करना और पंजाब प्रांत में सुरक्षा व्यवस्था देखना है। दूसरी कमान सिंध रेंजर्स की है, जिसके पास कराची जैसे अशांत और घनी आबादी वाले महानगरीय क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियानों को संचालित करने, दंगों पर नियंत्रण पाने और संवेदनशील वीआईपी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। यही कारण है कि सिंध रेंजर्स का यह मुख्यालय आतंकवादियों के निशाने पर रहा है।
जांच के आदेश और राजनीतिक व प्रशासनिक प्रतिक्रिया
इस हाई-प्रोफाइल हमले के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहे हैं, जिनमें रेंजर्स मुख्यालय के आसपास भारी संख्या में बख्तरबंद गाड़ियां और एम्बुलेंस दौड़ती नजर आ रही हैं, जबकि पृष्ठभूमि में रुक-रुक कर गोलियां चलने की आवाजें भी सुनाई दे रही हैं। इस बीच, किसी भी प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन ने अभी तक इस आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे क्षेत्र में सक्रिय बड़े उग्रवादी गुटों का हाथ हो सकता है। घटना की गंभीरता को देखते हुए सिंध के मुख्यमंत्री सैयद मुराद अली शाह ने सुरक्षा अधिकारियों की एक आपात बैठक बुलाई है। मुख्यमंत्री ने प्रांतीय पुलिस प्रमुख और रेंजर्स के महानिदेशक से इस सुरक्षा चूक को लेकर एक विस्तृत और व्यापक रिपोर्ट तलब की है। सरकार ने अस्पतालों में आपातकाल घोषित कर दिया है और शहर भर में सुरक्षा व्यवस्था को रेड अलर्ट पर रख दिया गया है।
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