एजेंसी, तमिलनाडु। तिरुप्पारनकुंड्रम सुब्रमण्यस्वामी मंदिर मामले का फैसला सुनाने वाले न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन को विपक्ष महाभियोग के जरिए पदच्युत करने की कोशिश कर रहा है। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में सेवा दे चुके 56 पूर्व न्यायाधीशों ने मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश के समर्थन में एक पत्र जारी किया।
पूर्व न्यायाधीशों का पत्र और चेतावनी
पत्र में इन 56 न्यायाधीशों ने कहा कि यदि महाभियोग प्रस्ताव जारी रहा, तो यह लोकतंत्र और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए खतरा होगा। उन्होंने इसे न्यायाधीशों को धमकाने का प्रयास बताया जो समाज के विशेष वर्ग की वैचारिक और राजनीतिक अपेक्षाओं के अनुरूप फैसले नहीं देते। पूर्व न्यायाधीशों ने 1975 के आपातकाल का भी जिक्र किया और बताया कि उस समय सरकार ने सत्ता के खिलाफ निर्णय लेने वाले न्यायाधीशों को विभिन्न तरीकों से दबाया था, जिसमें पदोन्नति रद्द करना भी शामिल था। उन्होंने पत्र में 1973 के केशवानंद भारती मामले समेत अन्य तीन महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला दिया।
विपक्ष ने महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया
इस सप्ताह कांग्रेस की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव समेत 100 से अधिक सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को महाभियोग प्रस्ताव प्रस्तुत किया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस कदम की आलोचना करते हुए विपक्ष पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद किसी न्यायाधीश को किसी फैसले के लिए महाभियोग का सामना नहीं करना पड़ा।
मद्रास हाईकोर्ट का फैसला
तिरुप्पारनकुंड्रम सुब्रमण्यस्वामी मंदिर का विवाद तमिलनाडु के मदुरै में स्थित है। मामले में न्यायमूर्ति स्वामीनाथन ने राज्य सरकार और मंदिर अधिकारियों के विरोध को खारिज करते हुए दीपक को पहाड़ी के मध्य स्तंभ पर जलाने का आदेश दिया। यह आदेश 100 वर्षों से चली आ रही परंपरा से संबंधित है। न्यायालय ने कहा कि ऊपरी स्तंभ भी मंदिर की संपत्ति है और इसे अनुष्ठान में शामिल करना चाहिए। हालांकि, डीएमके ने तर्क दिया कि आदेश से सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर गंभीर प्रश्न
पूर्व जजों का मानना है कि यदि न्यायाधीशों पर इस तरह का दबाव बना रहा, तो यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए खतरा होगा और लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करेगा। उनका कहना है कि न्यायपालिका पर धमकाना किसी भी लोकतांत्रिक देश में अस्वीकार्य है।
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