एजेंसी, चंडीगढ़। Nihang Dispute Resolved : उत्तराखंड राज्य में चार निहंग सिखों की गिरफ्तारी के बाद पैदा हुआ गंभीर विवाद शनिवार को हरियाणा सरकार की सफल मध्यस्थता और सक्रिय हस्तक्षेप के बाद पूरी तरह सुलझ गया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की विशेष व्यक्तिगत पहल पर उत्तराखंड सरकार, वहां के स्थानीय प्रशासन और निहंग जत्थेबंदियों के शीर्ष प्रतिनिधियों के बीच एक सकारात्मक संवाद स्थापित किया गया। कई दौर तक चली मैराथन बैठकों और गहन विचार-विमर्श के बाद दोनों पक्षों के बीच आखिरकार एक ठोस सहमति बन गई। इस सहमति के बनते ही कानूनी प्रक्रिया के तहत चारों गिरफ्तार निहंगों को अदालत से नियमित जमानत मिल गई, जिससे पिछले कुछ दिनों से जारी भारी तनाव पूरी तरह शांत हो गया।
STORY | Uttarakhand: Four Nihang Sikhs granted bail in Karnprayag clash case
A district and sessions court in Chamoli on Saturday granted bail to four Nihang Sikhs arrested in connection with the violent clash in Karnaprayag on June 16, officials said.
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— Press Trust of India (@PTI_News) June 27, 2026
चमोली के कर्णप्रयाग में हुआ था स्थानीय विवाद, पांवटा साहिब में जुटने लगे थे निहंग
जमानत पर रिहा हुए चारों निहंगों के शनिवार की देर रात तक पंचकुला स्थित पवित्र श्री नाडा साहिब गुरुद्वारा पहुंचने की पूरी संभावना जताई जा रही है। इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई थी जब उत्तराखंड के चमोली जिले के अंतर्गत आने वाले कर्णप्रयाग क्षेत्र में स्थानीय निवासियों के साथ किसी बात को लेकर इन चार निहंगों का विवाद हो गया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इस गिरफ्तारी के विरोध में देश के अलग-अलग हिस्सों से भारी संख्या में निहंग जत्थेबंदियां हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में इकट्ठा होने लगी थीं। उग्र विरोध प्रदर्शन कर रहे निहंगों ने साफ चेतावनी दी थी कि जब तक उनके साथियों को बिना शर्त रिहा नहीं किया जाता, वे वहीं डटे रहेंगे और जरूरत पड़ने पर उत्तराखंड की सीमा में कूच करेंगे।
चंडीगढ़ में तैयार हुआ शांति का रोडमैप, सीएम सैनी ने पुष्कर सिंह धामी से की बात
निहंगों के इस बड़े आंदोलन और कूच की चेतावनी ने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश दोनों ही राज्यों के प्रशासनिक अमले की चिंताएं बेहद बढ़ा दी थीं। इस गंभीर स्थिति को भांपते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने तुरंत कमान संभाली और चंडीगढ़ में निहंग जत्थेबंदियों के मुख्य प्रतिनिधियों को एक आपात बैठक के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने बेहद शांतिपूर्वक उनकी सभी आपत्तियों और मांगों को सुना और उन्हें कानून के दायरे में रहते हुए एक न्यायपूर्ण समाधान का पूरा भरोसा दिलाया। इसके तत्काल बाद मुख्यमंत्री सैनी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर सीधे संपर्क साधा और पूरे घटनाक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए मामले को आपसी बातचीत से सुलझाने का विशेष आग्रह किया। इस महत्वपूर्ण वार्ता के दौरान सीएम के राजनीतिक सचिव तरुण भंडारी भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
राजनीतिक सचिव तरुण भंडारी ने पांवटा साहिब पहुंचकर संभाला मोर्चा
चंडीगढ़ में बातचीत का खाका तैयार करने के बाद मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक सचिव तरुण भंडारी को तुरंत जमीनी मोर्चे पर काम करने के लिए हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब रवाना कर दिया। तरुण भंडारी ने वहां पहुंचते ही दोनों राज्यों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और प्रदर्शनकारी निहंग जत्थेबंदियों के प्रतिनिधियों के साथ लगातार कई दौर की बंद कमरे में बैठकें कीं। इस दौरान उन्होंने दोनों पक्षों के बीच संवाद की कड़ी को टूटने नहीं दिया और एक ऐसा बीच का रास्ता निकाला, जिससे देश की कानून-व्यवस्था को भी कोई आंच न आए और निहंगों की प्रमुख चिंताओं का भी सम्मानपूर्वक समाधान किया जा सके।
समय रहते हस्तक्षेप न होने पर चार राज्यों में बिगड़ सकते थे सुरक्षा हालात
उच्च पदस्थ प्रशासनिक सूत्रों और खुफिया अधिकारियों का मानना है कि यदि इस संवेदनशील मामले में समय रहते उच्च स्तर पर राजनीतिक हस्तक्षेप और मध्यस्थता नहीं की जाती, तो यह विवाद उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा और पंजाब तक फैल सकता था और चारों राज्यों के लिए कानून-व्यवस्था की एक बेहद गंभीर चुनौती बन जाता। पांवटा साहिब में भारी तादाद में हथियारों के साथ निहंगों के जुटने और उत्तराखंड सीमा की ओर बढ़ने की धमकी को देखते हुए पूरी बेल्ट को हाई अलर्ट पर रखा गया था। लेकिन हरियाणा सरकार की इस समयोचित कूटनीतिक पहल के बाद एक बड़ा संभावित टकराव टल गया है और अब संबंधित सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति तेजी से सामान्य होने लगी है।
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