एजेंसी, श्रीनगर। Jammu Kashmir Earthquake : जम्मू-कश्मीर के कई मैदानी और पर्वतीय इलाकों में शनिवार की ढलती शाम को भूकंप के तेज और बेहद डरावने झटके महसूस किए गए। जैसे ही जमीन में तेज कंपन का अहसास हुआ, वैसे ही घरों, दुकानों और बहुमंजिला दफ्तरों के भीतर मौजूद लोगों में भारी अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए बिना कोई वक्त गंवाए तुरंत खुले मैदानों और सड़कों की तरफ भागने लगे। हालांकि, सबसे बड़ी राहत और संतोष की बात यह रही कि इस अचानक आई प्राकृतिक आपदा के कारण राज्य के किसी भी हिस्से से अभी तक किसी भी प्रकार के बड़े माल-जाल के नुकसान अथवा किसी भी व्यक्ति की जान जाने की कोई दुखद सूचना सामने नहीं आई है, लेकिन लोगों के बीच डर का माहौल अब भी बना हुआ है।
EQ of M: 6.2, On: 27/06/2026 19:04:51 IST, Lat: 36.442 N, Long: 70.672 E, Depth: 215 Km, Location: Afghanistan.
For more information Download the BhooKamp App https://t.co/5gCOtjdtw0 @DrJitendraSingh @OfficeOfDrJS @DrNKalaiselvi @GSuresh_NCS @ndmaindia pic.twitter.com/lD494VYeiW— National Center for Seismology (@NCS_Earthquake) June 27, 2026
अफगानिस्तान का हिंदूकुश क्षेत्र बना इस शक्तिशाली भूगर्भीय हलचल का मुख्य केंद्र
मौसम और भूगर्भ विज्ञान के विशेषज्ञों से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस बेहद शक्तिशाली भूकंप का मुख्य केंद्र पड़ोसी देश अफगानिस्तान के पहाड़ी इलाके हिंदूकुश रीजन में स्थित था। यह केंद्र अफगानिस्तान के कलाफगान नामक स्थान से लगभग 81 किलोमीटर की दूरी पर जमीन के भीतर गहराई में मौजूद था। भारतीय समयानुसार, शनिवार की शाम को ठीक 7.05 मिनट पर इस भूगर्भीय हलचल की शुरुआत हुई थी। जब वैज्ञानिकों ने रिक्टर स्केल पर इस भूकंपीय तरंग की तीव्रता का सटीक मापन किया, तो इसकी भयावहता 6.2 दर्ज की गई, जो कि एक बेहद संवेदनशील और भारी तबाही मचाने की क्षमता रखने वाली तीव्र श्रेणी का भूकंप माना जाता है।
एशिया महाद्वीप के आठ बड़े देशों की सीमाओं तक देखा गया इस व्यापक आपदा का सीधा असर
इस भूकंप का दायरा इतना विशाल और व्यापक था कि इसके झटके केवल अफगानिस्तान या भारत के जम्मू-कश्मीर तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि इसने एशिया महाद्वीप के कुल 8 देशों की धरती को एक साथ हिलाकर रख दिया। भूकंप के इन जोरदार और डरावने झटकों का सीधा असर अफगानिस्तान, भारत और पाकिस्तान के साथ-साथ सुदूर चीन, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के बहुत बड़े भूभाग पर साफ तौर पर देखने को मिला। इन सभी देशों के सीमावर्ती इलाकों और बड़े शहरों में रहने वाले नागरिकों ने जमीन में तेज कंपन महसूस होने की पुष्टि की है, जिसके चलते कई जगहों पर लोग एहतियात के तौर पर रात में घरों से बाहर ही रुके रहे।
भौगोलिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील और डेंजर ज़ोन में आता है जम्मू-कश्मीर
भारत के प्रमुख भूवैज्ञानिक और भूकंपीय सर्वेक्षण संस्थानों की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर और उससे सटा हुआ पूरा हिमालयी क्षेत्र भौगोलिक बनावट के लिहाज से हमेशा से बहुत संवेदनशील माना जाता है। यह पूरा इलाका भूकंप के सबसे खतरनाक डेंजर ज़ोन के अंतर्गत आता है, जिसके कारण धरती के नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों में लगातार आंतरिक दबाव और घर्षण बनता रहता है। यही मुख्य वजह है कि इस पूरे रीजन में समय-समय पर हल्के से लेकर मध्यम और कई बार इस तरह के अत्यंत तीव्र श्रेणी के भूकंपीय झटके आते रहते हैं। वैज्ञानिक और भूगर्भ शास्त्री लगातार इन गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं ताकि भविष्य में आने वाले किसी बड़े खतरे का समय रहते अनुमान लगाया जा सके।
ये भी पढ़े : कर्बला की अमर शहादत पर पीएम मोदी समेत देश के बड़े नेताओं ने दी श्रद्धांजलि, सत्य और इंसानियत के मार्ग पर चलने की अपील
ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें


