Emergency PM Modi news

आपातकाल के क्रूर दमन के खिलाफ लड़ने वाले नायकों को नमन : प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतांत्रिक सिद्धांतों को सर्वोपरि रखने का दोहराया प्रण

नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। Emergency PM Modi news : देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे काला और कष्टदायक दौर करार दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह हमारे देश के मूल संविधान पर किया गया एक बहुत बड़ा और सीधा हमला था। इस ऐतिहासिक और काले दिन के अवसर पर प्रधानमंत्री ने उन सभी वीर और साहसी नागरिकों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने उस भयंकर और डरावने समय में भी अपनी जान और स्वतंत्रता की परवाह न करते हुए लोकतांत्रिक परंपराओं तथा मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए बहुत बड़ा संघर्ष किया था। गुरुवार के दिन देश में मनाए जाने वाले संविधान हत्या दिवस के पावन और ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि आज के इस विशेष दिन पर हम उन सभी महान और पराक्रमी देशभक्तों को सादर नमन करते हैं, जो आपातकाल के उस बेहद कठिन और अंधकार से भरे दिनों में देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए पूरी मजबूती के साथ डटे रहे। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि आपातकाल जैसी घटनाएं हमारे पवित्र संविधान की आत्मा को चोट पहुँचाने वाली थीं।

तानाशाही के दौर में नागरिक अधिकारों और स्वतंत्रता का क्रूर दमन

प्रधानमंत्री मोदी ने आपातकाल के उस भयावह कालखंड के दौरान घटित हुई दर्दनाक और दमनकारी घटनाओं का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उस काले दौर में देश के आम नागरिकों की मूलभूत स्वतंत्रताओं को पूरी तरह से छीन लिया गया था। लोगों के बोलने, लिखने और अपनी बात रखने की आजादी यानी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके साथ ही देश के हजारों प्रमुख राजनीतिक नेताओं, निष्पक्ष पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को बिना किसी ठोस कारण या कानूनी प्रक्रिया के जबरन जेल की सलाखों के पीछे बंद कर दिया गया था। सत्ता के अहंकार में लोकतंत्र की उस बेहद मजबूत और ऐतिहासिक नींव को पूरी तरह से हिलाने और कमजोर करने का हर संभव प्रयास किया गया था। लेकिन प्रधानमंत्री ने इसके साथ ही यह भी रेखांकित किया कि उस बेहद चुनौतीपूर्ण और विकट परिस्थिति ने देश के अनगिनत नागरिकों के भीतर छिपे अदम्य साहस, वीरता और कभी न टूटने वाले संकल्प को पूरी दुनिया के सामने लाकर खड़ा कर दिया। देश के सजग नागरिकों ने उस तानाशाही शासन के सामने झुकने या चुप रहने से साफ मना कर दिया और संघर्ष का रास्ता चुनकर संविधान के महान आदर्शों को जीवित रखा।

एक अरब से अधिक भारतीयों की आशाओं और आकांक्षाओं का आधार हमारा संविधान

अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया कि हमारा पावन संविधान देश के 140 करोड़ से भी अधिक नागरिकों की बड़ी आकांक्षाओं, उनके बुनियादी अधिकारों और उनके कर्तव्यों का सबसे बड़ा और पवित्र प्रतीक माना जाता है। उन्होंने देश की जनता को भरोसा दिलाया कि वर्तमान सरकार और पूरा देश संवैधानिक मर्यादाओं और मूल्यों की हर कीमत पर रक्षा करने के लिए पूरी तरह से संकल्पित है। हमें अपने संविधान की मूल भावना और आदर्शों से लगातार प्रेरणा लेकर एक ऐसे नए और सशक्त भारत का निर्माण करना है, जो सामाजिक न्याय, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, पूर्ण समानता और आपसी भाईचारे तथा बंधुत्व के मजबूत सिद्धांतों पर हमेशा अडिग और अडोल खड़ा रहे।

हर साल 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में याद रखने का महत्व

प्रधानमंत्री ने देशवासियों को याद दिलाते हुए कहा कि यह संविधान हत्या दिवस हमें हर साल इस बात की गहराई से याद दिलाता रहेगा कि जब देश के लोकतंत्र को पूरी तरह से कुचलने की कोशिश की गई थी, तब भी इस देश के सच्चे लोकतंत्र प्रेमियों ने कभी हार नहीं मानी और न ही वे पीछे हटे। उन्होंने आपातकाल का पुरजोर विरोध करने वाली और देश को उस अंधकार से बाहर निकालने वाली सभी महान विभूतियों को एक बार फिर से सादर नमन किया। आपको बता दें कि देश में हर वर्ष 25 जून की तारीख को अधिकारिक तौर पर संविधान हत्या दिवस के रूप में पूरी गंभीरता के साथ मनाया जाता है। यह दिन साल 1975 में देश के भीतर थोपे गए आपातकाल की कड़वी और दर्दनाक यादों को ताजा करता है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा पूरे देश में अचानक से आपातकाल की घोषणा कर दी गई थी और देश को तानाशाही के दलदल में धकेल दिया गया था।

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