Chaitar Vasava AAP

गुजरात कोर्ट का बड़ा फैसला : आम आदमी पार्टी विधायक चैतर वसावा और उनकी पत्नी समेत नौ दोषियों को सात-सात साल की जेल, लगा भारी जुर्माना

गुजरात देश/प्रदेश

एजेंसी, नर्मदा। Chaitar Vasava AAP : गुजरात के राजनीतिक गलियारों से इस वक्त की एक बहुत ही सनसनीखेज और बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के नर्मदा जिले की एक स्थानीय अदालत ने आम आदमी पार्टी यानी आप के कद्दावर विधायक चैतर वसावा, उनकी धर्मपत्नी और सात अन्य सहयोगियों को एक आपराधिक मामले में दोषी करार देते हुए सात-सात साल के कड़े कारावास की ऐतिहासिक सजा सुनाई है। इन सभी पर सरकारी वन विभाग के अधिकारियों के साथ गंभीर मारपीट करने, उन्हें बंधक बनाने और डरा-धमकाकर अवैध रूप से फिरौती वसूलने के बेहद संगीन आरोप लगे थे। माननीय न्यायालय ने मामले की गंभीरता और गवाहों के बयानों को आधार मानते हुए सभी आरोपियों को सख्त सजा से दंडित किया है। इस अदालती फैसले के बाद से ही सूबे की सियासत में भारी उबाल आ गया है और विपक्षी दल की मुश्किलें काफी ज्यादा बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं।

सजा के साथ दोषियों पर लगा आर्थिक जुर्माना, कुल नौ अपराधियों में चार महिलाएं भी शामिल

अदालत ने इस मामले में केवल जेल की सजा ही नहीं सुनाई है, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ा आर्थिक दंड भी निर्धारित किया है। कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के विधायक, उनकी पत्नी और अन्य सह-आरोपियों पर कुल मिलाकर छियानवे हजार रुपए का भारी जुर्माना भी लगाया है। अभियोजन पक्ष से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस पूरे आपराधिक मामले में जिन कुल नौ लोगों को अदालत ने जेल भेजने का हुक्म दिया है, उनमें चार महिला आरोपी भी शामिल हैं। सजा का ऐलान होते ही पुलिस प्रशासन ने सभी दोषियों को अपनी कस्टडी में ले लिया है ताकि उन्हें जेल भेजने की आगे की आवश्यक कानूनी प्रक्रिया को पूरा किया जा सके।

क्या था पूरा मामला: अतिक्रमण हटाने से नाराज विधायक ने वनकर्मियों को घर बुलाकर पीटा था

यह पूरा हाई-प्रोफाइल विवाद करीब तीन साल पुराना है। घटना तीस अक्टूबर दो हजार तेईस की बताई जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नर्मदा जिले के वन विभाग के अधिकारियों ने सरकारी नियमों का पालन करते हुए जंगल की कीमती जमीन पर किए गए अवैध अतिक्रमण को पूरी तरह से हटा दिया था। इस प्रशासनिक कार्रवाई से स्थानीय विधायक चैतर वसावा बेहद नाराज हो गए थे। उन्होंने अपने राजनैतिक रसूख का इस्तेमाल करते हुए वन विभाग के पांच जिम्मेदार अधिकारियों को बातचीत के बहाने जबरन अपने निजी आवास पर बुलाया था। पुलिस की मुख्य प्राथमिकी के मुताबिक, विधायक के घर पहुंचते ही चैतर वसावा और उनके उग्र साथियों ने सरकारी अधिकारियों पर हमला बोल दिया, उनके साथ जमकर मारपीट की और प्रभावित ग्रामीणों को हर्जाना देने के नाम पर मोटी रकम की अवैध मांग की।

अवैध हथियार से हवाई फायरिंग करने के कारण आर्म्स एक्ट के तहत भी दर्ज हुआ था मुकदमा

अदालत में मामले की पैरवी कर रहे सरकारी वकील और अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान आप विधायक चैतर वसावा ने अधिकारियों को डराने और इलाके में अपना खौफ पैदा करने के उद्देश्य से अपने हथियार से हवाई फायरिंग भी की थी। पुलिस जांच में यह बात पूरी तरह से साफ हुई कि जिस बंदूक या हथियार का इस्तेमाल उस समय डराने के लिए किया गया था, उसका कोई भी वैध या सरकारी लाइसेंस विधायक के पास मौजूद नहीं था। इसी घोर अवैध कृत्य के कारण स्थानीय पुलिस ने मुख्य धाराओं के साथ-साथ उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट यानी शस्त्र अधिनियम की बेहद गंभीर और गैर-जमानती धाराओं के तहत भी केस दर्ज किया था, जो अदालत में साबित हो गया।

अधिकारियों से खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर करवाई थी साठ हजार रुपए की फिरौती

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और पुख्ता सबूत ऑनलाइन पैसों के लेन-देन का रहा। वारदात के ठीक अगले दिन, विधायक चैतर वसावा के निजी सहायक यानी पीए और कुछ अन्य खास लोगों ने पीड़ित अधिकारियों में से दो कर्मचारियों को फोन करके तीस-तीस हजार रुपए की फिरौती मांगी थी। चूंकि उस समय अचानक वन विभाग के उन कर्मचारियों के पास नकद पैसे मौजूद नहीं थे, इसलिए उन्होंने डर के मारे अपने सीनियर अधिकारी को पूरी बात बताई और तुरंत दो अधिकारियों के बैंक खातों से कुल साठ हजार रुपए ऑनलाइन माध्यम से विधायक के पीए और अन्य आरोपियों के खातों में ट्रांसफर कर दिए। पुलिस ने इस पूरे डिजिटल ट्रांजैक्शन और बैंक रिकॉर्ड को अदालत के समक्ष मुख्य साक्ष्य के रूप में पेश किया था, जिसे कोर्ट ने अकाट्य सबूत माना।

लंबे समय तक फरार रहने के बाद किया था सरेंडर, लोकसभा चुनाव के वक्त मिली थी जमानत

इस बेहद चर्चित मामले में मुख्य आरोपी चैतर वसावा के अलावा उनकी पत्नी शकुंतला वसावा, उनके पीए जितेंद्र वसावा और छह अन्य स्थानीय ग्रामीणों को मुख्य रूप से नामजद किया गया था। शकुंतला वसावा उस दौरान नर्मदा जिला पंचायत की एक सक्रिय सदस्य भी थीं। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कुछ छोटे आरोपियों को तो गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन मुख्य नेता चैतर वसावा कई हफ्तों तक पुलिस को चकमा देते रहे और फरार चल रहे थे। आखिरकार चौदह दिसंबर दो हजार तेईस को उन्होंने कानून के सामने आत्मसमर्पण यानी सरेंडर कर दिया था। बाद में साल दो हजार चौबीस के लोकसभा चुनाव के दौरान भरूच संसदीय सीट से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्हें अदालत से अस्थायी जमानत मिल सकी थी।

साल दो हजार बाईस के विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर चर्चा में आए थे वसावा

चैतर वसावा वर्तमान में आम आदमी पार्टी की गुजरात इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष पद की बड़ी जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। वे साल दो हजार बाईस के गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान डेडियापाड़ा निर्वाचन क्षेत्र से आम आदमी पार्टी के टिकट पर एकतरफा जीत हासिल करके अचानक देश भर की मीडिया की सुर्खियों में आए थे। दक्षिण गुजरात के बेहद घने और बड़े आदिवासी बाहुल्य इलाके में उनकी इस धमाकेदार जीत ने आप को एक बहुत ही मजबूत और नया जनाधार प्रदान किया था। उन्होंने खुद को आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा करने वाले एक बड़े और कद्दावर नेता के रूप में स्थापित किया था, लेकिन अब इस ताजा अदालती फैसले और सात साल की जेल की सजा ने उनके राजनैतिक भविष्य पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

ये भी पढ़े : उद्धव ठाकरे को लगा अब तक का सबसे बड़ा झटका : 6 सांसदों ने पाला बदलकर थामा एकनाथ शिंदे का दामन

ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें

Leave a Reply