MP Cabinet Meeting

मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला : तालाबों की मिट्टी के परिवहन पर उलझे तीन कद्दावर मंत्री, सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री ने बनाई संयुक्त समिति

प्रादेशिक भोपाल मध्‍य प्रदेश

एजेंसी, भोपाल। MP Cabinet Meeting : मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में संपन्न हुई कैबिनेट की अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक के भीतर सरकार के शीर्ष मंत्रियों के बीच प्रशासनिक मुद्दों को लेकर एक तीखी नोकझोंक और खींचतान देखने को मिली है। कैबिनेट की इस उच्चस्तरीय बैठक में ग्राम पंचायतों के तालाबों के गहरीकरण के दौरान निकलने वाली कीमती काली मिट्टी के अवैध उत्खनन और उसके परिवहन के नियमों को लेकर कई वरिष्ठ मंत्रियों के बीच तीखे दावे और प्रतिदावे किए गए, जिससे कुछ देर के लिए बैठक का माहौल पूरी तरह से गर्मा गया। इस बड़े विवाद को बढ़ता हुआ देख खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीच-बचाव करते हुए हस्तक्षेप किया और मामले के स्थाई और शांतिपूर्ण निराकरण के लिए तीनों संबंधित विभागों के आला अधिकारियों को मिलाकर एक विशेष संयुक्त समिति गठित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, यूसीसी के ड्राफ्ट और किसानों के हित में कई अन्य ऐतिहासिक फैसले भी लिए गए हैं।

मिट्टी की खुदाई और परिवहन के मुद्दे पर भिड़े प्रहलाद पटेल, तुलसी सिलावट और करण सिंह वर्मा

कैबिनेट की बैठक के भीतर जब राज्य में चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान की प्रगति की समीक्षा की जा रही थी, तभी सूबे के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने एक गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि पंचायतों के भीतर तालाबों के सुंदरीकरण और गहरीकरण से जो उपजाऊ मिट्टी निकलती है, उसके परिवहन पर जल संसाधन विभाग के स्थानीय कर्मचारी बेवजह की आपत्तियां दर्ज कराते हैं। राजस्व मंत्री ने तर्क दिया कि इस विभागीय अड़ंगेबाजी के कारण ग्रामीण इलाकों में जल संरक्षण और गहरीकरण के जरूरी कार्य बहुत बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। उनके इस तार्किक बयान का पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने भी पूरी तरह से समर्थन किया और वन व जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। इस पर तुरंत पलटवार करते हुए जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने अपने विभाग की कार्रवाई को पूरी तरह से जायज और वैधानिक ठहराया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में काली मिट्टी की खुदाई करने की आड़ में कई माफिया तत्वों द्वारा बहुमूल्य पीली मिट्टी का भी बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन और अवैध परिवहन किया जाता है, जिसके कारण राजस्व को नुकसान पहुंचता है और इसी चोरी को रोकने के लिए उनका विभाग सख्त कानूनी कार्रवाई करता है। मंत्रियों के बीच इस टकराव को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री ने एक संयुक्त कमेटी बनाने को कहा है जो परिवहन की पूरी पारदर्शी प्रक्रिया तय करेगी।

मध्यप्रदेश में आगामी पांच जुलाई तक पूरी तरह से तैयार हो जाएगा समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट

कैबिनेट की बैठक से ठीक पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देश के सबसे चर्चित और बड़े विषय यानी समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर एक बहुत ही बड़ा और ऐतिहासिक खुलासा किया। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को संबोधित करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश राज्य में समान नागरिक संहिता का मुख्य ड्राफ्ट आगामी पांच जुलाई तक पूरी तरह से तैयार कर लिया जाएगा, जिसके तुरंत बाद इसे प्रदेश के आगामी विधानसभा मानसून सत्र के भीतर एक मजबूत विधेयक के रूप में सदन के पटल पर पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि इस कानून को लेकर अब तक संगठन और सरकार को आम जनता से नौ लाख से भी ज्यादा महत्वपूर्ण लिखित सुझाव प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से लगभग नब्बे प्रतिशत लोग इसके पूर्ण समर्थन में खड़े हैं। सबसे खास बात यह रही कि समाज के अल्पसंख्यक वर्ग की अधिकांश महिलाओं ने भी इस कानून का खुलकर समर्थन किया है। सरकार आगामी तीस जून तक इस पर जनता के सुझावों को लेने की प्रक्रिया को पूरी तरह से समाप्त कर देगी।

शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा अपग्रेडेशन: अगले तीन सालों में छह सौ पैंतीस करोड़ की लागत से सुधरेंगे स्कूल

मोहन कैबिनेट ने राज्य की शासकीय शिक्षा व्यवस्था को और ज्यादा सुदृढ़ और आधुनिक बनाने के लिए एक बहुत बड़े बजट को अपनी मंजूरी दी है। सरकार ने तय किया है कि आगामी तीन वर्षों के भीतर प्रदेश के कुल तीन सौ पंद्रह माध्यमिक स्कूलों को सीधे हाई स्कूल के रूप में प्रमोट किया जाएगा, जबकि दो सौ चौदह हाई स्कूलों को हायर सेकेंडरी स्कूल के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। इस पूरी व्यापक योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सरकार ने छह सौ पैंतीस करोड़ चौबीस लाख रुपए की भारी-भरकम राशि को वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। शैक्षणिक सत्र दो हजार छब्बीस-सत्ताईस के दौरान पहले चरण में पचहत्तर माध्यमिक शालाओं और सौ हाई स्कूलों का उन्नयन किया जाएगा। सरकार का मुख्य लक्ष्य यह है कि विकसित मध्यप्रदेश@2047 के संकल्प के तहत साल दो हजार उनतीस तक राज्य के भीतर शत-प्रतिशत यानी सौ फीसदी बच्चों का स्कूलों में नामांकन सुनिश्चित किया जा सके, ताकि दूरी के कारण कोई भी होनहार बच्चा अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़े।

सांदीपनि विद्यालयों के कैचमेंट एरिया में आने वाले स्कूलों का नहीं किया जाएगा उन्नयन

सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के नियमों में एक और बड़ा नीतिगत बदलाव किया है, जिसके तहत राज्य के मुख्य सांदीपनि विद्यालयों के कैचमेंट एरिया यानी प्रभाव क्षेत्र के भीतर आने वाले किसी भी अन्य छोटे विद्यालय का उन्नयन नहीं किया जाएगा। अगर सांदीपनि विद्यालय के क्षेत्र में आने वाले सभी विद्यार्थियों का दाखिला मुख्य सांदीपनि स्कूल में हो जाता है, तो उस छोटे विद्यालय के स्टाफ और संसाधनों को किसी अन्य जरूरतमंद और पिछड़े इलाके में युक्तियुक्तकरण नीति के तहत ट्रांसफर कर दिया जाएगा। एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने कैबिनेट के निर्णयों की ब्रीफिंग देते हुए देश को बताया कि आगामी जुलाई के पूरे महीने में प्रदेश भर के भीतर बहुत ही धूमधाम के साथ ‘गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा’ मनाया जाएगा। इसके तहत पंद्रह जुलाई से लेकर तीस जुलाई तक चलने वाले विभिन्न सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों में सभी जिलों के प्रभारी मंत्री सांदीपनि स्कूलों में आयोजित होने वाले मुख्य उत्सवों में व्यक्तिगत रूप से शिरकत करेंगे।

किसानों के लिए बड़ी राहत: अब रबी और खरीफ की जगह पूरे एक साल की अवधि के लिए मिलेगा अल्पकालीन कर्ज

सूबे के अन्नदाताओं और किसानों को एक बहुत बड़ी राहत प्रदान करते हुए मोहन सरकार ने जीरो प्रतिशत ब्याज दर पर मिलने वाले अल्पकालीन फसल ऋण की पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया है। अब तक किसानों को खरीफ और रबी की फसलों के सीजन के हिसाब से अलग-अलग समय पर कर्ज लेने और उसे बैंक में चुकाने की एक बेहद ही जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, परंतु अब इसकी जगह किसानों को पूरे एक साल की लंबी अवधि के लिए एकमुश्त फसल ऋण मुहैया कराया जाएगा। इस योजना के तहत राज्य के लाखों किसानों को करीब पच्चीस हजार करोड़ रुपए का बड़ा लोन वितरित किया जाता है, जिसके ब्याज का भुगतान करने के लिए राज्य सरकार के खजाने पर आठ सौ अस्सी करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार आता है। अब से इस ऋण की पूरी वैधानिक अवधि एक अप्रैल से शुरू होकर अगले साल के इकतीस मार्च तक मान्य की जाएगी।

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के लिए सत्रह सौ करोड़ और गरीब बेटियों की शादी के लिए पचपन हजार की मदद

कैबिनेट की इस बैठक में महिलाओं और गरीब परिवारों के सामाजिक उत्थान के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं के बजट में भी भारी बढ़ोतरी की गई है। सरकार ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए कुल सत्रह सौ चालीस करोड़ रुपए की एक बहुत बड़ी राशि को अपनी प्रशासनिक मंजूरी दी है। इस अत्यंत लोकप्रिय योजना के तहत राज्य के गरीब, बेसहारा, निराश्रित और निर्धन परिवारों की विवाह योग्य बेटियों, विधवा महिलाओं और परित्यक्ताओं के सामूहिक विवाह के आयोजन के लिए प्रति कन्या के मान से पचपन हजार रुपए की बड़ी आर्थिक सहायता राशि सीधे प्रदान की जाती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष दो हजार इक्कीस-बाईस से लेकर दो हजार पच्चीस-छब्बीस तक इस योजना के माध्यम से राज्य के कुल एक लाख बहत्तर हजार नौ सौ पांच लाभार्थियों को नौ सौ नवासी करोड़ अस्सी लाख रुपए से अधिक की प्रत्यक्ष सहायता राशि बांटी जा चुकी है।

शाजापुर के शुजालपुर में खुलेगा नया सरकारी लॉ कॉलेज, कैबिनेट ने दी अन्य कई प्रस्तावों को मंजूरी

शिक्षा और न्याय के क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने शाजापुर जिले के शुजालपुर शहर में एक नया सर्वसुविधायुक्त शासकीय विधि महाविद्यालय यानी लॉ कॉलेज खोलने के प्रस्ताव को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है, साथ ही इस कॉलेज को संचालित करने के लिए जरूरी प्रोफेसरों और प्रशासनिक स्टाफ के नए पदों को भी स्वीकृत कर दिया है। इसके अलावा कैबिनेट में हुए कुछ अन्य अहम फैसलों की सूची इस प्रकार है:

  • जल गंगा अभियान में मध्यप्रदेश चमका: राज्य में चलाए गए जल गंगा अभियान के कार्यों का कैबिनेट के सामने एक मुख्य प्रजेंटेशन दिया गया, जिसमें बताया गया कि जल संरक्षण के उत्कृष्ट कार्यों के लिए मध्यप्रदेश को पूरे देश के भीतर तीसरा स्थान हासिल हुआ है।

  • टॉप-टेन जिलों की घोषणा: इस जल संवर्धन अभियान के भीतर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के मामले में सूबे के डिंडोरी, खंडवा और शहडोल जिले पूरे देश की टॉप-दस की मुख्य सूची में शामिल रहे हैं।

  • हजारों करोड़ की पुरानी योजनाएं रहेंगी जारी: सरकार ने जनहित को ध्यान में रखते हुए पूर्व से चल रही कुल पांच हजार तीन सौ पैंसठ करोड़ रुपए की विभिन्न विकास योजनाओं को आगे भी निरंतर जारी रखने का एक बड़ा निर्णय लिया है।

  • गरीबों के अनाज के लिए बजट स्वीकृत: राज्य के गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न और सस्ते राशन की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कैबिनेट ने एक सौ अस्सी करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि को अपनी प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है।

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