योग दिवस

योग दिवस पर मध्य प्रदेश का उत्साह दर्शनीय, प्रदेश नेतृत्व से बड़ी आशाएं

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योग दिवस पर मध्य प्रदेश का उत्साह दर्शनीय, प्रदेश नेतृत्व से बड़ी आशाएं

​अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर संपूर्ण भारतवर्ष सहित मध्य प्रदेश की पावन धरा पर जो अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, वह न केवल हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के पुनरुत्थान का प्रतीक है, बल्कि एक स्वस्थ और सजग समाज के निर्माण की दिशा में एक युगांतकारी कदम भी है। देश और प्रदेश के कोने-कोने से आई योग की त्रिवेणी ने यह सिद्ध कर दिया है कि योग अब मात्र एक शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जन-जन की जीवन शैली का अभिन्न अंग बन चुका है। करोड़ों साधकों ने एक साथ, एक सुर में योगासन कर वसुधैव कुटुंबकम और आरोग्य की जिस भावना को साकार किया, उसने मध्य प्रदेश को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दी है। यह आयोजन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब शासन, प्रशासन और जनभागीदारी का त्रिवेणी संगम होता है, तो किस प्रकार के ऐतिहासिक और गौरवमयी क्षणों का सृजन होता है।
​इस वर्ष मध्य प्रदेश में योग का उल्लास और व्यापकता अपनी चरम सीमा पर थी। राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम के लिए संस्कारधानी जबलपुर का चयन अपने आप में बेहद गरिमापूर्ण रहा। भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू की गरिमामयी उपस्थिति ने इस आयोजन के महत्व को कई गुना बढ़ा दिया। उनके साथ प्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मध्य प्रदेश योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. राघवेंद्र शर्मा जैसी शीर्ष विभूतियों ने एक साथ योग साधना कर संपूर्ण प्रदेश को एकजुटता और स्वास्थ्य का संदेश दिया। शीर्ष नेतृत्व की यह सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि सरकारें अब नागरिकों के केवल आर्थिक और सामाजिक विकास तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उनके शारीरिक और मानसिक उत्थान के प्रति भी उतनी ही गंभीर हैं। संस्कारधानी की धरती से उठा योग का यह स्वर निश्चित रूप से पूरे देश में ऊर्जा का संचार करने वाला रहा।

​इस बार के योग दिवस की सबसे बड़ी विशेषता इसका लीक से हटकर होना और समाज के हर वर्ग तक पहुँचना रही। भारतीय रेलवे के इतिहास में और मध्य प्रदेश के गौरव, भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर जो नज़ारा दिखा, उसने आधुनिकता और परंपरा के अनूठे मिलन को परिभाषित किया। देश में ऐसा पहली बार हुआ जब किसी जीवंत और व्यस्त रेलवे स्टेशन पर बाकायदा योग की क्लास लगाई गई। यात्रा की आपाधापी के बीच सुकून और एकाग्रता के इस केंद्र पर एडीजी रेल राजा बाबू सिंह और भोपाल रेल एसपी अंकित जायसवाल जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी ने सुरक्षा बलों और आम जनता के बीच योग के प्रति एक सकारात्मक संदेश प्रसारित किया। यह नवाचार यह सीख देता है कि व्यस्ततम जीवन में भी योग के लिए स्थान बनाया जा सकता है।
​योग के प्रति अगाध श्रद्धा और समर्पण का एक और प्रेरक उदाहरण खंडवा में देखने को मिला, जहाँ कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह ने शारीरिक अस्वस्थता और बैठने में तकलीफ होने के बावजूद योग से दूरी नहीं बनाई। उन्होंने सोफे पर बैठकर ही प्राणायाम और योग की अन्य सुलभ क्रियाओं को पूरे मनोयोग से किया। यह घटना इस बात की गवाह है कि योग किसी आयु, शारीरिक बंधन या परिस्थिति का मोहताज नहीं है; इसके लिए केवल इच्छाशक्ति और संकल्प की आवश्यकता होती है। यह देश के हर उस नागरिक के लिए प्रेरणा है जो छोटी-मोटी शारीरिक दिक्कतों का बहाना बनाकर स्वास्थ्य साधना से विमुख हो जाते हैं।
​वहीं दूसरी ओर, मध्य प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक राजधानी इंदौर ने एक बार फिर अपनी अद्भुत आयोजन क्षमता और अद्वितीय ऊर्जा का लोहा मनवाया। स्वच्छता में सिरमौर रहने वाले इस शहर ने इस बार योग के क्षेत्र में भी इतिहास रच दिया। इंदौर में एक साथ दस हजार लोगों ने ३ मिनट १९ सेकंड तक सामूहिक रूप से भ्रामरी प्राणायाम किया, जो अपने आप में एक विस्मयकारी अनुभूति थी। भ्रामरी प्राणायाम की इस गूंज ने न केवल वातावरण को पवित्र किया, बल्कि इस सामूहिक अनुष्ठान को ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज कराकर मध्य प्रदेश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्णिम अक्षरों में अंकित कर दिया। इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव को जब एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स का प्रमाण पत्र सौंपा गया, तो वह केवल एक शहर का नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के सामूहिक पुरुषार्थ का सम्मान था। इस भव्य आयोजन में शहर की ७० से अधिक योग संस्थाओं, खेल संगठनों, डेढ़ सौ से अधिक सामाजिक संस्थाओं और हजारों नागरिकों की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि इंदौर जब भी कुछ ठानता है, तो वह विश्व रिकॉर्ड ही बनता है। इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके की उपस्थिति ने जन-जन के इस उत्साह को और अधिक संबल प्रदान किया।
​पवित्र नदी नर्मदा के आंचल में बसे नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर योग का दृश्य किसी अलौकिक अनुभूति से कम नहीं था। नदी के शांत और सुरम्य किनारों पर, सुबह की पहली किरण के साथ जब प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों, सांसदों, विधायकों और भारी संख्या में आम नागरिकों ने एक साथ योग की मुद्राएं धारण कीं, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो प्रकृति और मनुष्य एक दूसरे में समाहित हो गए हों। यह इस बात का परिचायक है कि योग हमें प्रकृति के करीब लाता है और हमारी जीवन ऊर्जा को सुव्यवस्थित करता है। इसी तरह पर्यटन और ऐतिहासिक नगरी धार में भी योग की बयार बही, जहाँ जनप्रतिनिधियों, प्रबुद्ध नागरिकों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अनुलोम-विलोम, कपालभाति और शीर्षासन जैसी जटिल मुद्राओं से शुरू हुआ यह सफर जब सूर्य नमस्कार के साथ समाप्त हुआ, तो हर साधक के चेहरे पर एक असीम शांति और ओज की चमक साफ देखी जा सकती थी।
​इन सभी आयोजनों की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि इन्होंने दलगत राजनीति, जाति, वर्ग और संप्रदाय की दीवारों को ढहाकर सबको एक सूत्र में पिरो दिया। इन समस्त कार्यक्रमों की भव्यता और सुव्यवस्थित संचालन के पीछे मध्य प्रदेश योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. राघवेंद्र शर्मा का कुशल नेतृत्व, दूरदृष्टि और सराहनीय मार्गदर्शन रहा। उनके भगीरथ प्रयासों और अनथक परिश्रम का ही परिणाम है कि आज प्रदेश का हर जिला, हर ब्लॉक और हर गांव योगमय हो चुका है। डॉ. शर्मा के नेतृत्व में मध्य प्रदेश योग आयोग ने न केवल कागजी योजनाओं से इतर धरातल पर काम किया है, बल्कि योग को एक जन-आंदोलन का रूप दे दिया है। दावा किया जा रहा है कि उनके ऊर्जावान नेतृत्व में मध्य प्रदेश योग आयोग सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करने की ओर तेजी से अग्रसर है।
​आज जब पूरी दुनिया मानसिक तनाव, अवसाद और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से जूझ रही है, तब मध्य प्रदेश से उठी योग की यह लहर पूरे विश्व को निरोगी काया और मानसिक शांति का मार्ग दिखा रही है। इस वर्ष के योग दिवस ने यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि मध्य प्रदेश में योग अब अपने चरमोत्कर्ष को प्राप्त होने जा रहा है। यह केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि एक स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त मध्य प्रदेश के निर्माण का संकल्प बन चुका है। हमें इस गति को बनाए रखना होगा और योग के इस संदेश को अपने दैनिक जीवन में उतारना होगा, ताकि हमारा प्रदेश देश का सबसे स्वस्थ और ऊर्जावान राज्य बनकर उभरे। निश्चित ही, योग की यह पावन विधा डॉ. राघवेंद्र शर्मा और वर्तमान सरकार के संरक्षण में प्रदेश को एक नव-आरोग्य युग की ओर ले जा रही है।

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