Bullet Train India

सरकार ने दी 7 नए हाई स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को हरी झंडी, अब दिल्ली से लखनऊ का सफर महज 2 घंटे में होगा पूरा

नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। Bullet Train India : देश के बुनियादी ढांचे और परिवहन के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी क्रांति आने वाली है। केंद्र सरकार ने देश के विभिन्न हिस्सों को आपस में तेजी से जोड़ने के लिए सात नए हाई स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के निर्माण को अपनी मंजूरी दे दी है। इस महापरियोजना के धरातल पर उतरने के बाद भारतीय रेल की रफ्तार में एक नया अध्याय जुड़ेगा। सबसे खास बात यह है कि इस नए फैसले के तहत देश की राजधानी दिल्ली से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बीच की दूरी को तय करने में अब केवल दो घंटे का समय लगेगा, जिससे लोगों के समय की भारी बचत होगी। सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम से देश के आर्थिक और सामाजिक विकास को एक नई गति मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

इन प्रमुख सात रूटों पर हवा से बातें करेगी देश की बुलेट ट्रेन

सरकार द्वारा स्वीकृत किए गए सात नए हाई स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के जरिए देश के बड़े महानगरों और प्रमुख शहरों के बीच यात्रा के समय में भारी कटौती देखने को मिलेगी। इन रूटों पर ट्रेनों के परिचालन की रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई है कि मुंबई से अहमदाबाद का सफर केवल एक घंटे सत्तावन मिनट में पूरा हो सकेगा, जबकि मुंबई से पुणे के बीच की दूरी तय करने में महज अड़तालीस मिनट का समय लगेगा। इसी तरह दक्षिण भारत में बेंगलुरु से चेन्नई के बीच यात्रा का समय घटकर तिहत्तर मिनट और बेंगलुरु से हैदराबाद के बीच दो घंटे दस मिनट रह जाएगा। इसके अलावा पुणे से हैदराबाद के बीच का सफर दो घंटे आठ मिनट में तय किया जा सकेगा। उत्तर भारत की बात करें तो दिल्ली से लखनऊ दो घंटे, दिल्ली से वाराणसी तीन घंटे पंद्रह मिनट और दिल्ली से पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी तक का लंबा सफर महज छह घंटे में पूरा किया जा सकेगा।

दिल्ली से वाराणसी कॉरिडोर की रूपरेखा और प्रस्तावित मुख्य स्टेशन

इस पूरी योजना में दिल्ली से वाराणसी के बीच बनने वाला हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस पूरे रेल मार्ग की कुल लंबाई लगभग आठ सौ बारह किलोमीटर होगी। इस ट्रैक पर बुलेट ट्रेन की अधिकतम गति सीमा तीन सौ पचास किलोमीटर प्रति घंटे तय की गई है, जबकि सामान्य संचालन के समय इसकी रफ्तार तीन सौ वीड किलोमीटर प्रति घंटे रखी जाएगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इन नए कॉरिडोर का फैसला लिया गया है जिससे राज्यों में बड़े पैमाने पर आर्थिक निवेश का रास्ता साफ होगा। उदाहरण के तौर पर अकेले महाराष्ट्र राज्य में ही इस परियोजना के तहत लगभग दो लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया जा रहा है। इसी कॉरिडोर के हिस्से के रूप में लखनऊ से अयोध्या के बीच भी एक सौ चौबीस किलोमीटर लंबा हाईस्पीड रेल मार्ग तैयार किया जाएगा। आम जनता की सुविधा के लिए इस लंबे रूट पर दिल्ली, नोएडा, मथुरा, आगरा, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों में स्टेशनों का निर्माण प्रस्तावित किया गया है, जिस पर अंतिम निर्णय जल्द ही लिया जाएगा।

जापानी तकनीक की मदद से तैयार हो रहा है देश का पहला बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट

भारत में बुलेट ट्रेन लाने का सपना जापान के आर्थिक और तकनीकी सहयोग से पूरा किया जा रहा है। देश की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना मुंबई से अहमदाबाद के बीच पांच सौ आठ किलोमीटर लंबे मार्ग पर बनाई जा रही है। इस ऐतिहासिक परियोजना की आधारशिला सितंबर दो हजार सत्रह में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे द्वारा संयुक्त रूप से रखी गई थी। इस परियोजना को बनाने में जापान की विश्व प्रसिद्ध शिंकान्सेन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। शुरुआती दौर में इस पूरे काम को साल दो हजार तेईस तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन महाराष्ट्र में जमीन के अधिग्रहण की समस्याओं और कुछ अन्य प्रशासनिक मंजूरियों में हुई देरी के कारण इस परियोजना में उम्मीद से थोड़ा अधिक समय लग गया। हालांकि वर्तमान समय में इस मार्ग पर निर्माण कार्य बहुत ही तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है और सभी वैधानिक बाधाओं को दूर कर लिया गया है।

अगले साल अगस्त के महीने में देश को मिल सकती है पहली बुलेट ट्रेन

रेल मंत्रालय से प्राप्त ताजा जानकारी के अनुसार गुजरात राज्य के भीतर इस परियोजना से जुड़े ट्रैक बिछाने, स्टेशनों के निर्माण और वायाडक्ट तैयार करने का काम रात-दिन तेजी से चल रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देशवासियों को एक बड़ी खुशखबरी देते हुए संकेत दिया है कि भारत को पंद्रह अगस्त दो हजार सत्ताइस को अपनी पहली बुलेट ट्रेन की सौगात मिलने की पूरी संभावना है। इस परियोजना का पहला चरण गुजरात के सूरत से बिलिमोरा के बीच शुरू किया जाएगा, जिसके तुरंत बाद वापी से सूरत तक के दूसरे हिस्से को भी खोल दिया जाएगा। रेल मंत्रालय का लक्ष्य है कि मुंबई तक की इस पूरी मुख्य लाइन को साल दो हजार अट्ठाईस-उनतीस तक पूरी तरह से जनता के लिए चालू कर दिया जाए। इस परियोजना के पूरी तरह से क्रियान्वित हो जाने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय घटकर मात्र दो से तीन घंटे रह जाएगा, जिसमें वर्तमान समय में आम लोगों को छह से सात घंटे से भी अधिक का समय गुजारना पड़ता है।

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