एजेंसी, मुंबई। Shiv Sena News : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़ी हलचल शुरू हो गई है। देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित हुई शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के संसदीय दल की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के कुल नौ लोकसभा सदस्यों में से केवल तीन सदस्य ही शामिल होने पहुंचे। बैठक में हिस्सा लेने वाले सांसदों में अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे के नाम शामिल हैं। पार्टी आलाकमान ने पहले ही अपने सभी लोकसभा सदस्यों के लिए एक कड़ा आदेश यानी व्हिप जारी किया था, जिसके तहत दिल्ली की इस बैठक में सभी का उपस्थित रहना अनिवार्य था। इस बैठक में शामिल हुए सांसद अरविंद सावंत ने साफ लफ्जों में कहा कि जो भी सदस्य इस बैठक में नहीं आए हैं, पार्टी उनके खिलाफ सख्त कानूनी नोटिस जारी करने जा रही है। वहीं दूसरी ओर, राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने बहुत बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि हमारे सांसदों का जबरन अपहरण कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि जो इस संकट की घड़ी में बैठक में शामिल होने आया है, वही हमारा असली साथी है और जो नहीं आया, वह पूरी तरह से धोखेबाज है।
#WATCH | Mumbai: On rebel MPs, Shiv Sena (UBT) MP Sanjay Raut says, “If their direction is different, then the Speaker of the Lok Sabha will decide. These people haven’t come forward yet. I don’t know where they’ve hidden. These people who used to consider themselves Shiv Sainiks… pic.twitter.com/mCFtNPsrMO
— ANI (@ANI) June 18, 2026
बागी नेताओं को मिली विशेष सुरक्षा और शिंदे गुट में जाने की तैयारी
इस पूरे राजनीतिक घमासान के बीच देश के गृह मंत्रालय ने महाराष्ट्र पुलिस को एक विशेष निर्देश जारी किया है। इसके तहत बैठक से दूरी बनाने वाले सभी छह बागी सांसदों को तुरंत प्रभाव से वाई प्लस श्रेणी की मजबूत सुरक्षा व्यवस्था देने के लिए कहा गया है। अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इन छह असंतुष्ट सांसदों ने बुधवार की सुबह करीब साढ़े नौ बजे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक गुप्त पत्र भी भेजा है। इस पत्र में उन्होंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में अपने समूह का पूरी तरह से विलय करने की इच्छा जताई है। इस बड़ी बगावत से नाराज होकर उद्धव गुट के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने लगातार दूसरे दिन भी बागी रुख अपनाने वाले इन नेताओं के खिलाफ बेहद कड़े और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है।
पिछले तीन दिनों के भीतर महाराष्ट्र की राजनीति में हुए बड़े घटनाक्रम
महाराष्ट्र के इस राजनीतिक ड्रामे में पिछले बहत्तर घंटों के भीतर कई बड़ी और चौंकाने वाली घटनाएं क्रमवार तरीके से सामने आई हैं:
सत्रह जून का घटनाक्रम: बुधवार की सुबह मुख्यमंत्री शिंदे के गुट के मुख्य सचिव किरण पावस्कर और सरकार के एक बड़े मंत्री ने सार्वजनिक रूप से यह बड़ा दावा किया कि उद्धव गुट के छह लोकसभा सदस्यों ने एक अलग समूह बनाने वाले कानूनी दस्तावेज पर अपने हस्ताक्षर पूरे कर दिए हैं। इस खबर के फैलते ही दिल्ली में मौजूद संजय राउत, अनिल देसाई और अरविंद सावंत ने तुरंत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद संजय राउत ने मीडिया के सामने बेहद तीखे और अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ये सभी बेईमान लोग हैं और धोखा देना इनके खून में शामिल है। हालांकि, बाद में मचे बवाल पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि मराठी भाषा में इस तरह के शब्दों का प्रयोग आम बोलचाल के दौरान सामान्य रूप से किया जाता है। आपको बता दें कि शिवसेना के भीतर पिछले चार साल के दौरान यह दूसरा सबसे बड़ा विभाजन है। इससे पहले जून २०२२ में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में उनतालीस विधायकों ने बगावत करके असली शिवसेना पर अपना दावा ठोक दिया था।
सोलह जून का घटनाक्रम: संजय राउत ने सामाजिक माध्यम एक्स पर एक बेहद सनसनीखेज पोस्ट साझा करते हुए दावा किया था कि उनकी पार्टी के सांसदों को तोड़ने के लिए सरकारी तंत्र की तरफ से भारी मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के इन जनप्रतिनिधियों को पाला बदलने के लिए पचास-पचास करोड़ रुपए का भारी प्रलोभन दिया जा रहा है, जिसमें से पंद्रह करोड़ रुपए की अग्रिम राशि यानी एडवांस रकम उसी रात को बांटी जा रही है। इसी दिन उद्धव गुट के सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक आधिकारिक ईमेल भेजकर यह मांग की थी कि यदि कोई भी बागी समूह अलग ब्लॉक बनाने या किसी दूसरी पार्टी में विलय का दावा पेश करता है, तो उद्धव गुट का पक्ष सुने बिना कोई भी एकतरफा फैसला न लिया जाए।
पंद्रह जून का घटनाक्रम: समाचार माध्यमों और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा बहुत ज्यादा तेज हो गई थी कि उद्धव गुट के छह लोकसभा सदस्य बहुत जल्द पाला बदलकर एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना का दामन थाम सकते हैं। राजनीतिक पंडितों ने इस पूरी गुप्त योजना को ‘ऑपरेशन टाइगर’ का नाम दिया था। हालांकि, उस समय उद्धव गुट के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने एक बड़ी पत्रकार वार्ता बुलाई थी और इन सभी खबरों को पूरी तरह से मनगढ़ंत और अफवाह बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया था।
बागी सांसदों को दल-बदल कानून से मिल सकती है बड़ी राहत
भारतीय संसद के नियमों के अनुसार, वर्तमान में लोकसभा के भीतर शिवसेना (उद्धव गुट) के कुल नौ निर्वाचित सांसद मौजूद हैं। देश के कड़े दल-बदल विरोधी कानून के तहत, किसी भी राजनीतिक दल में बड़ी टूट होने की स्थिति में संसद की सदस्यता रद्द होने से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का एक साथ अलग होना बेहद जरूरी होता है। गणितीय हिसाब से देखा जाए तो यदि नौ में से छह सांसद एक साथ मिलकर पार्टी से अलग होने का सामूहिक फैसला करते हैं, तो वे कानून की नजर में खुद को एक वैध और असली गुट बताने का मजबूत दावा पेश कर सकते हैं। यही सबसे बड़ी वजह है कि इन छह सांसदों की बगावत की खबर इस समय राजनीतिक और कानूनी दोनों ही दृष्टिकोण से भारतीय राजनीति में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, देश के बड़े कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन बागी सांसदों के लिए सिर्फ एक अलग समूह बना लेना ही काफी नहीं होगा। अपनी संसद सदस्यता को पूरी तरह सुरक्षित रखने और भविष्य में अपनी स्थिति को कानूनी रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए इन्हें आगे चलकर किसी दूसरे मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल या गुट में अपने समूह के विलय की पूरी कागजी प्रक्रिया को भी अनिवार्य रूप से संपन्न करना पड़ेगा।
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