Meenakshi Natarajan

राज्यसभा चुनाव विवाद : मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने हस्तक्षेप से किया इनकार, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का दिया हवाला

नई दिल्ली मध्‍य प्रदेश राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली/ मध्य प्रदेश। Meenakshi Natarajan : देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था यानी उच्चतम न्यायालय से कांग्रेस पार्टी और उनकी राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को एक बहुत बड़ा कानूनी झटका लगा है। अदालत ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की उस मुख्य याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने साफ लफ्जों में कहा कि यह याचिका सीधे तौर पर सुनवाई के योग्य नहीं है। हालांकि, देश की शीर्ष अदालत ने कांग्रेस नेता को यह वैधानिक स्वतंत्रता अवश्य दी है कि वे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत एक नई चुनाव याचिका दायर करके इस प्रशासनिक फैसले के खिलाफ अपनी कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ा सकती हैं।

संवैधानिक प्रावधानों और अनुच्छेदों का दिया गया हवाला

इस अति-महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई कर रहे माननीय न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और माननीय न्यायमूर्ति ए.एस. चंदूरकर की संयुक्त पीठ ने अपने फैसले में देश के संविधान का दृढ़ता से उल्लेख किया। पीठ ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद तीन सौ उनतीस में दर्ज कानूनी प्रतिबंधों का हवाला देते हुए इस चुनावी प्रक्रिया के बीच में अपने विशेष रिट अधिकार क्षेत्र का उपयोग करने से पूरी तरह मना कर दिया। अदालत के सामने याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील दी गई थी कि नामांकन को खारिज करने की प्रक्रिया में रिटर्निंग अधिकारी द्वारा बहुत ही ‘स्पष्ट और गंभीर’ गलतियां की गई हैं, जिन्हें सुधारने के लिए संविधान के अनुच्छेद बत्तीस का सहारा लिया जाना बेहद जरूरी है। सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने कांग्रेस उम्मीदवार की इस दलील को भी सिरे से खारिज कर दिया।

चुनावी विवादों के समाधान के लिए सामान्य प्रक्रिया ही मान्य

माननीय न्यायाधीशों की पीठ ने देश के कानूनी ढांचे को स्पष्ट करते हुए अपने आदेश में कहा कि यदि अदालत खुद ही यह तय करने बैठ जाएगी कि किस मामले में कमियां ज्यादा स्पष्ट हैं और कहाँ अनुच्छेद बत्तीस या दो सौ छब्बीस के तहत तुरंत दखल दिया जाए, तो यह देश के संविधान के अनुच्छेद तीन सौ उनतीस के मूल स्वरूप के खिलाफ होगा। अदालत ने यह भी साफ किया कि ऐसा कोई भी कानूनी सिद्धांत स्वीकार नहीं किया जा सकता, जिसके तहत कुछ खास मामलों में तो अदालत सीधे हस्तक्षेप करने लगे और बाकी के मामलों में उम्मीदवारों को चुनाव न्यायाधिकरण के पास जाने को कहा जाए। इसलिए, न्यायालय ने यह नियम पूरी तरह स्पष्ट कर दिया कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान नामांकन पत्रों की जांच या उन्हें रद्द किए जाने से जुड़े जितने भी विवाद होते हैं, उनका समाधान केवल चुनाव याचिका के माध्यम से ही किया जाना कानूनी रूप से उचित है।

मध्य प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित

इस पूरे कानूनी और राजनीतिक विवाद के बीच मध्य प्रदेश राज्य से राज्यसभा की तीनों खाली सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट पूरी तरह से निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा चुके हैं। कांग्रेस पार्टी की मुख्य उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज हो जाने के तुरंत बाद ही भारतीय जनता पार्टी के तीसरे प्रत्याशी की जीत पूरी तरह से तय मान ली गई थी। इस प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने पहले केंद्रीय चुनाव आयोग में अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई थी और उसके तुरंत बाद देश की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाया था। कांग्रेस पार्टी ने दस जून की सुबह ही मुख्य चुनाव आयोग को अपनी आपत्ति भेज दी थी, परंतु मतदान और चयन की पूरी प्रक्रिया संपन्न हो जाने के बाद भी आयोग की तरफ से इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया।

विपक्षी नेताओं के तीखे तेवर और ‘सीट चोरी’ का गंभीर आरोप

भारतीय जनता पार्टी के सभी उम्मीदवारों को बिना किसी विरोध के विजेता घोषित किए जाने के बाद देश की राजधानी नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की मुख्य उपस्थिति में एक आपात बैठक बुलाई गई। इस बैठक में विपक्षी दल के तमाम बड़े नेताओं ने देश के मुख्य चुनाव आयोग और सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी दोनों की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए। बैठक के बाद देश के प्रमुख राजनेता राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और देश के चुनाव आयोग की आपसी साठगांठ की वजह से लोकतंत्र में इस सीट की खुलेआम चोरी की गई है। कांग्रेस पार्टी का यह स्पष्ट तौर पर कहना है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र बिना किसी ठोस और पर्याप्त कानूनी आधार के, केवल राजनैतिक विद्वेष की भावना से प्रेरित होकर रद्द किया गया है।

हलफनामे में जानकारी छिपाने का आरोप और विपक्षी विधायकों की गिरफ्तारी

इस पूरे विवाद के मूल कारणों पर यदि नजर डालें, तो सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी का यह तर्क है कि कांग्रेस उम्मीदवार ने अपने नामांकन पत्र के साथ जमा किए गए कानूनी हलफनामे में एक बेहद जरूरी आपराधिक मामले की जानकारी को पूरी तरह से छिपाया था, जिसके कारण रिटर्निंग अधिकारी को यह सख्त कदम उठाना पड़ा। इस राजनैतिक रस्साकशी के बीच शुक्रवार को देश की राजधानी में उस वक्त माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया, जब जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण सत्याग्रह करने के बाद देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने के लिए राष्ट्रपति भवन की ओर बढ़ रहे मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और उनके साथ मौजूद इकसठ विधायकों को दिल्ली पुलिस ने बीच रास्ते में ही रोककर गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान पुलिस और नेताओं के बीच तीखी झड़प भी देखने को मिली और पुलिस ने सभी जनप्रतिनिधियों को गाड़ियों में भरकर स्थानीय थाने भेज दिया।

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