एजेंसी, भोपाल। MP Simhastha 2028 : मध्य प्रदेश में आगामी सिंहस्थ 2028 की भव्य तैयारियों को लेकर राज्य सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित की गई सिंहस्थ संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति की उच्च स्तरीय बैठक में धार्मिक नगरी ओंकारेश्वर और उसके आसपास के क्षेत्रों के कायाकल्प के लिए एक नए विकास प्राधिकरण के गठन को हरी झंडी दे दी गई है। सरकार के इस बड़े फैसले के तहत अब बड़वाह, ओंकारेश्वर और खेड़ीघाट क्षेत्र को एक साथ मिलाकर इस विशेष विकास प्राधिकरण का निर्माण किया जाएगा। शासन का मानना है कि इस नए कदम से खंडवा और खरगोन जिलों के अंतर्गत आने वाले संपूर्ण धार्मिक और पर्यटन क्षेत्रों के विकास कार्यों को एक नई रफ्तार मिलेगी और वहां बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो सकेगा। इसके साथ ही, सिंहस्थ के दौरान जुटने वाली भारी भीड़ को देखते हुए ओंकारेश्वर में नए हेलीपैड और एक बड़े आधुनिक अस्पताल के निर्माण को भी प्रशासनिक स्वीकृति दे दी गई है।
आज सिंहस्थ-2028 की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में 17 नए विकास कार्यों को स्वीकृति दी। बैठक में 7 जिलों में चल रहे 148 विकास कार्यों की समीक्षा की। इंदौर, आगर-मालवा, मंदसौर और देवास में चल रहे कार्यों की भी जानकारी ली।
ओंकारेश्वर और आसपास के क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों के… pic.twitter.com/qW2u9MvoNA
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 9, 2026
आपदा प्रबंधन के लिए आपातकालीन हेलीपैड और आधुनिक चिकित्सालय
मंत्रिमंडलीय समिति की इस छठवीं समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ओंकारेश्वर क्षेत्र की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर कई कड़े और आवश्यक निर्देश जारी किए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि ओंकारेश्वर में एक विशाल और सर्वसुविधायुक्त अस्पताल का निर्माण कराया जाए, साथ ही वहां पर एक नया हेलीपैड भी तैयार किया जाए। मुख्यमंत्री ने इन निर्माण कार्यों के महत्व को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक मेले के दौरान यह दोनों बुनियादी निर्माण कार्य किसी भी प्रकार की प्राकृतिक या मानव जनित आपदा की स्थिति में आपातकालीन सुविधाएं और त्वरित राहत उपलब्ध कराने में सबसे महत्वपूर्ण और जीवन रक्षक भूमिका निभाएंगे।
खंडवा और खरगोन जिलों में विकास कार्यों का बेहतर समन्वय
मंत्रिमंडल की इस बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों के विकेंद्रीकरण और उनकी गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बड़वाह, ओंकारेश्वर और खेड़ीघाट क्षेत्र के चारों तरफ होने वाले तमाम छोटे-बड़े निर्माण कार्यों की देखरेख के लिए एक पूरी तरह से समर्पित और अलग प्राधिकरण का होना बेहद जरूरी है। इस नए विकास प्राधिकरण के अस्तित्व में आने से खंडवा और खरगोन दोनों ही पड़ोसी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल और समन्वय काफी बेहतर हो जाएगा। इससे न केवल सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतारने में आसानी होगी, बल्कि सिंहस्थ से जुड़े सभी महत्वपूर्ण विकास कार्यों और गतिविधियों को समय सीमा के भीतर पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराया जा सकेगा।
यातायात को सुगम बनाने के लिए नए वैकल्पिक मार्गों का निर्माण
मेले के दौरान श्रद्धालुओं के सुचारू आवागमन को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने ओंकारेश्वर तक पहुंचने के लिए नए वैकल्पिक और बाईपास मार्गों को तेजी से विकसित करने के भी कड़े आदेश दिए हैं। उनका कहना था कि मुख्य मार्गों पर यातायात के भारी दबाव को कम करने के लिए इन नए रास्तों का होना बेहद अनिवार्य है। इसके साथ ही, उज्जैन नगरी में पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर बन रहे नए घाटों के निर्माण कार्य को भी चरणबद्ध तरीके से पूरी गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जैसे-जैसे घाटों का निर्माण आगे बढ़े, वैसे-वैसे वहां तक पहुंचने वाले एप्रोच रोड और वाहनों की पार्किंग के लिए बड़े स्थलों का निर्माण कार्य भी समानांतर रूप से पूरा किया जाना चाहिए ताकि बाद में कोई अव्यवस्था न फैले।
धार्मिक आश्रमों और गुरुकुलों को मिलेगी घाटों के प्रबंधन की जिम्मेदारी
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बेहद अनूठा और व्यावहारिक सुझाव देते हुए कहा कि क्षिप्रा नदी के पावन तटों पर बन रहे इन नए घाटों के आसपास पहले से मौजूद विभिन्न धार्मिक आश्रमों, संतों की कुटियों और पारंपरिक गुरुकुलों को सीधे तौर पर घाटों की देखरेख और उनके दैनिक प्रबंधन की जिम्मेदारी से जोड़ा जाना चाहिए। इस अनूठी पहल से जहां एक तरफ इन स्थानीय आश्रमों और गुरुकुलों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सहायता और सहयोग प्राप्त होगा, वहीं दूसरी तरफ सिंहस्थ महापर्व के समाप्त हो जाने के बाद भी इन नवनिर्मित घाटों का रख-रखाव और जनहित में लंबे समय तक सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। कुल मिलाकर, इस बैठक में सिंहस्थ 2028 को ऐतिहासिक बनाने के लिए उज्जैन और ओंकारेश्वर क्षेत्र के 17 नए बड़े विकास कार्यों को अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी गई है।
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