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इंडिया गठबंधन का बड़ा फैसला : हर दो महीने में मिलेंगे शीर्ष नेता, नीट और चुनाव प्रणाली पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। INDIA Alliance Meeting : देश के प्रमुख विपक्षी दलों के संगठन इंडिया गठबंधन की एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी बैठक सोमवार को देश की राजधानी नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित की गई। लगभग ढाई घंटे तक चली इस लंबी और गहन चर्चा के बाद कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने देश के सामने इस बैठक के नतीजों को रखते हुए बताया कि गठबंधन के सभी सहयोगी दलों के बीच पांच सबसे अहम और बड़े मुद्दों पर पूरी तरह से सहमति बन गई है। इन फैसले में सबसे बड़ा निर्णय यह लिया गया है कि गठबंधन के सभी शीर्ष नेताओं के बीच आपसी तालमेल और समन्वय को और मजबूत बनाए रखने के लिए अब से हर दो महीने में एक अनिवार्य बैठक का आयोजन किया जाएगा। इसी फैसले के तहत गठबंधन की जो अगली बड़ी बैठक होगी, वह आने वाली आठ अगस्त को हैदराबाद शहर में रखी जाएगी।

मुख्य न्यायाधीश को पत्र और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

इस महाबैठक के दौरान देश की वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर बहुत ही गंभीर चर्चा हुई। बैठक में सर्वसमावेशी रूप से यह बड़ा निर्णय लिया गया है कि देश के भीतर चुनाव प्रक्रिया में कथित हेराफेरी, मतदाता सूचियों में गड़बड़ी और वोट चोरी की शिकायतों को लेकर सीधे भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को एक विस्तृत पत्र भेजा जाएगा। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह शिकायत पत्र बहुत जल्द तैयार करके उन तक पहुंचा दिया जाएगा। इसके साथ ही, देश के लाखों छात्र-छात्राओं के भविष्य से जुड़े मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट) के पेपर लीक मामले और सीबीएसई परीक्षाओं में सामने आई बड़ी लापरवाहियों पर विपक्षी दलों ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। गठबंधन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करते हुए देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि उनके कार्यकाल में देश के लाखों होनहार युवाओं के भरोसे और मेहनत के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ हुआ है, जिसके कारण आज देश के छात्र सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर हैं।

आर्थिक हालातों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की जिद

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार के सामने देश की मौजूदा आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों को लेकर भी एक बड़ी मांग रखी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को देश के मौजूदा बिगड़ते आर्थिक हालात, लगातार बढ़ती हुई भयंकर बेरोजगारी, आसमान छूती महंगाई, देश के अन्नदाता किसानों की विकट समस्याएं और समाज के कमजोर वर्गों पर हो रहे अत्याचारों जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर तुरंत एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। विपक्ष का कहना है कि इन जनसरोकार से जुड़े जरूरी मुद्दों पर संसद के भीतर और बाहर सरकार को खुलकर चर्चा करनी चाहिए और देश के सामने पूरी सच्चाई रखनी चाहिए। इन सभी जनहित के मुद्दों को विपक्ष लगातार पुरजोर तरीके से उठाता रहेगा।

संसद के मानसून सत्र के लिए विशेष चक्रव्यूह तैयार

गठबंधन के नेताओं ने आने वाले संसद के मानसून सत्र को लेकर भी अपनी रणनीतियों को पूरी तरह से साफ कर दिया है। बैठक में यह तय हुआ है कि संसद के पूरे सत्र के दौरान सभी विपक्षी दलों के बीच आपसी तालमेल बहुत ही मजबूत रखा जाएगा। इसके लिए एक नया नियम बनाया गया है, जिसके तहत संसद की कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले हर दिन सुबह के समय लोकसभा में विपक्ष के नेता के कार्यालय में सभी घटक दलों की एक समन्वय बैठक होगी। इस रोज होने वाली बैठक में उस दिन सदन के भीतर सरकार को घेरने और जनता के मुद्दों को उठाने की पूरी कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

देश भर के बड़े दिग्गजों ने लिया बैठक में हिस्सा

इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक में देश के कई राज्यों के बड़े नेताओं और मुख्यमंत्रियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के साथ कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री व राजद नेता तेजस्वी यादव शामिल हुए। इन सबके अलावा जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीडीपी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले, सांसद एम के प्रेमचंद्रन, प्रख्यात कानूनविद कपिल सिब्बल सहित वामपंथी दलों के तमाम बड़े नेता और अन्य सहयोगी दलों के प्रतिनिधि भी इस चर्चा में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे। इसके साथ ही झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग यानी वर्चुअल माध्यम से इस पूरी बैठक में शामिल हुए और अपने विचार साझा किए।

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