एजेंसी, नई दिल्ली। LPG Price Hike : देश के आम नागरिकों की जेब पर महंगाई का एक और बहुत बड़ा बोझ आ पड़ा है। घर के बजट को संभालने वाली आम जनता के सामने अब रोजमर्रा की चीजों को खरीदने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हाल ही में बिना सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर के दामों में उनतीस रुपये की वृद्धि की गई है, जिसके तुरंत बाद अब दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले जरूरी सामानों जैसे ईंधन, अनाज, और दूध के दामों में भी लगातार तेजी देखी जा रही है। इस चौतरफा वृद्धि के कारण हर घर का मासिक खर्च पहले के मुकाबले बहुत ज्यादा बढ़ चुका है, जिससे मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों के सामने अपनी जरूरतों को पूरा करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
The price of a 14.2-kg domestic LPG cylinder has been increased by Rs 29. In Delhi, 14.2-Kg Domestic LPG Cylinder prices increased from Rs 913 to Rs 942. New rate will be effective from June 7.
— ANI (@ANI) June 6, 2026
ईंधन की ऊंची कीमतों से माल ढुलाई हुई महंगी
बाजार के जानकारों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की दरों में लगातार हो रही बढ़ोतरी इस संकट का मुख्य कारण है। वाहन ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन यानी माल ढुलाई की लागत में भारी इजाफा हुआ है। जब सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का भाड़ा बढ़ता है, तो उसका सीधा असर बाजार में मिलने वाली वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। इसी वजह से आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है और खाने-पीने की चीजों से लेकर कारखानों में बनने वाले सामान तक सब कुछ आम आदमी की पहुंच से दूर होता जा रहा है।
दूध और डेयरी उत्पादों के दाम दो रुपये तक बढ़े
इस संकट का सबसे बड़ा असर पशुपालन और डेयरी क्षेत्र पर पड़ा है। गाय-भैंस के चारे की बढ़ती कीमतों, दवाओं के खर्च, पैकिंग सामग्री और ट्रांसपोर्टेशन की बढ़ी हुई लागत के कारण दूध उत्पादन से जुड़ी कंपनियों पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया था। अपनी लागत को पूरा करने के लिए कई बड़ी डेयरी कंपनियों ने दूध की कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है। सुबह की चाय से लेकर बच्चों के पोषण तक इस्तेमाल होने वाले दूध का महंगा होना हर परिवार के बजट को सीधे प्रभावित कर रहा है।
खाने की थाली तीस प्रतिशत तक हुई महंगी
केवल दूध ही नहीं, बल्कि रसोई का पूरा राशन ही अब महंगा हो चुका है। बाजार में दालों, खाने के तेल, मसालों और हरी सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही हैं। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों के भीतर एक आम परिवार की रोजाना की थाली तैयार करने का खर्च लगभग तीस प्रतिशत तक बढ़ गया है। इसके साथ ही रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें जैसे नहाने और कपड़े धोने का साबुन, सर्फ और अन्य उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनियों ने भी उत्पादन लागत बढ़ने का बहाना बनाकर अपने सामानों की कीमतों में दो से चौदह प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी है।
आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है संकट
आर्थिक रेटिंग देने वाली संस्था क्रिसिल ने अपनी नई समीक्षा रिपोर्ट में आम जनता को सचेत किया है। रिपोर्ट के मुताबिक यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले समय में देश के भीतर पेट्रोल और डीजल के दाम और ज्यादा बढ़ाए जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो महंगाई का दबाव और ज्यादा गहरा जाएगा। ऐसी स्थिति में केवल खाने-पीने की चीजें ही नहीं, बल्कि कपड़े, बिजली के उपकरण, सीमेंट, ईंट और मकान बनाने की अन्य सामग्रियां भी बहुत ज्यादा महंगी हो जाएंगी, जिससे रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र पर भी बुरा असर पड़ेगा।
सरकारी खजाने पर बढ़ा भारी दबाव
पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से मिली जानकारी के अनुसार, घरेलू रसोई गैस की असल लागत और उसे बाजार में बेचने वाले मूल्य के बीच का अंतर यानी घाटा वित्तीय वर्ष 2025-26 के खत्म होने तक साठ हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। यह घाटा बीते साल के इकतालीस हजार तीन सौ अड़तीस करोड़ रुपये के मुकाबले बहुत ज्यादा है। इस बड़े घाटे को देखते हुए केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को राहत देने के लिए तीस हजार करोड़ रुपये के सहायता पैकेज को मंजूरी दी है। हालांकि, सरकार ने यह साफ किया है कि उज्ज्वला योजना के तहत आने वाले लाभार्थियों को मिलने वाली तीन सौ रुपये की सब्सिडी पहले की तरह मिलती रहेगी, जिससे देश के साढ़े दस करोड़ से ज्यादा गरीब परिवारों को थोड़ी राहत मिल सकेगी।
दिल्ली में रसोई गैस सिलेंडर हुआ 942 रुपये का
वैश्विक बाजार में चल रही उथल-पुथल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट का सीधा असर अब भारत के रसोईघरों में दिखने लगा है। सरकारी तेल कंपनियों द्वारा आज से की गई नई बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में चौदह दशमलव दो किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत नौ सौ तेरह रुपये से बढ़कर अब नौ सौ बयालीस रुपये हो गई है। पिछले तीन महीनों के भीतर आम उपभोक्ताओं को लगा यह दूसरा बड़ा झटका है। इससे पहले मार्च के महीने में भी पश्चिमी एशिया के देशों में चल रहे तनाव के कारण सिलेंडर के दामों में साठ रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इस तरह इस संकट के शुरू होने से लेकर अब तक घरेलू सिलेंडर कुल नवासी रुपये महंगा हो चुका है।
कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भारी उछाल
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज जलडमरू मध्य में आए गतिरोध और आपूर्ति बाधित होने का सबसे भयंकर असर व्यावसायिक यानी कमर्शियल सिलेंडरों पर देखने को मिला है। जनवरी के महीने तक जो कमर्शियल सिलेंडर सोलह सौ नब्बे रुपये के आसपास मिल रहा था, उसकी कीमतों में फरवरी के बाद से अब तक लगभग चौदह सौ बाईस रुपये की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मई के महीने में इसमें एक साथ993 रुपये की ऐतिहासिक वृद्धि हुई थी और आज फिर से इसके दाम बयालीस रुपये बढ़ा दिए गए हैं। अब दिल्ली में इसकी नई कीमत बढ़कर तीन हजार एक सौ साढ़े तेरह रुपये हो गई है। इस भारी बढ़ोतरी ने होटलों, ढाबों और छोटे दुकानदारों का बजट पूरी तरह से तबाह कर दिया है, जिससे कई छोटे रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर आ गए हैं।
छोटू सिलेंडर खरीदने वालों को भी नहीं मिली राहत
महंगाई की यह मार केवल बड़े सिलेंडरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मजदूरों, छात्रों और अकेले रहने वाले प्रवासियों के बीच लोकप्रिय पांच किलोग्राम वाले छोटे गैस सिलेंडर पर भी पड़ी है। जून की शुरुआत में ही इसकी कीमतों में ग्यारह रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद दिल्ली में इस छोटे सिलेंडर की नई कीमत अब आठ सौ साढ़े इक्कीस रुपये हो गई है। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान संकट और सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों के चलते वैश्विक स्तर पर ईंधन लगातार महंगा हो रहा है, जिसके कारण घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गया है। जानकारों का मानना है कि इस दोहरी मार का असर आने वाले महीनों में और ज्यादा देखने को मिल सकता है।
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