Modi Trump

जी7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात संभव, कूटनीतिक रिश्तों में जमी बर्फ पिघलने की उम्मीद

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एजेंसी, नई दिल्ली। G7 Summit Modi Trump Meet : वैश्विक राजनीति और रणनीतिक संबंधों के लिहाज से एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। आगामी सप्ताह में आयोजित होने वाले दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के ‘जी7 शिखर सम्मेलन’ के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण मुलाकात होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। यूरोप के खूबसूरत देश फ्रांस की मेजबानी में आगामी 15 से 17 जून तक आयोजित होने वाले इस बेहद हाई-प्रोफाइल सम्मेलन में दोनों ही वैश्विक महानेताओं की उपस्थिति पूरी तरह से तय मानी जा रही है। कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस संभावित उच्च स्तरीय मुलाकात से पिछले कुछ समय से भारत और अमेरिका के आपसी कूटनीतिक रिश्तों पर छाई धुंध और दूरियां पूरी तरह से समाप्त हो सकती हैं। हालांकि, दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों की तरफ से अभी तक इस विशेष द्विपक्षीय बैठक को लेकर कोई आधिकारिक और औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।

दोनों देशों के शीर्ष अधिकारी मुलाकात की संभावनाओं और रणनीतिक एजेंडे पर कर रहे हैं विचार

अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, नई दिल्ली और वाशिंगटन के वरिष्ठ राजनयिक इस महासम्मेलन के इतर दोनों वैश्विक नेताओं की आमने-सामने की बैठक को अंतिम रूप देने की संभावनाओं पर बेहद गंभीरता से विचार-विमर्श कर रहे हैं। यदि यह बहुप्रतीक्षित बैठक सफलतापूर्वक संपन्न होती है, तो इसे पिछले कुछ महीनों से दोनों लोकतांत्रिक देशों के आपसी संबंधों में दिखाई दे रहे कूटनीतिक ठंडेपन और रणनीतिक दूरी को कम करने की दिशा में एक बेहद ठोस और मील का पत्थर कदम माना जाएगा। इसके साथ ही, फ्रांस की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मेजबान देश के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सहित जी7 समूह के कई अन्य प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों के साथ भी अलग से बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें होने की पूरी उम्मीद है।

व्यापारिक नीतियों और रूस से तेल खरीद जैसे मुद्दों पर उभरे थे आपसी मतभेद

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आखिरी आधिकारिक मुलाकात फरवरी 2025 में हुई थी, जब भारतीय प्रधानमंत्री एक महत्वपूर्ण यात्रा पर अमेरिका गए थे। उस सफल दौरे के बाद, पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर कुछ चुनिंदा मुद्दों को लेकर वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आए थे। इन मतभेदों में मुख्य रूप से डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की सख्त व्यापारिक नीतियां, यूक्रेन युद्ध के बावजूद भारत द्वारा रूस से लगातार की जा रही भारी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद और भारत-पाकिस्तान के आंतरिक संबंधों पर अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा दिए गए कुछ विवादित बयान शामिल थे। इन संवेदनशील विषयों के कारण पिछले कुछ समय से दोनों महाशक्तियों के बीच का आपसी कूटनीतिक संवाद और विश्वास काफी हद तक प्रभावित हुआ था।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा से रिश्तों में सुधार के मिले थे संकेत

इन तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद, हाल के दिनों में दोनों देशों के रिश्तों में एक बार फिर से पुरानी गर्मजोशी और सुधार के बेहद सकारात्मक संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। पिछले महीने ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत का एक बेहद महत्वपूर्ण आधिकारिक दौरा किया था। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से एक विशेष संदेश लाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जल्द से जल्द अमेरिका आने का औपचारिक और सम्मानजनक निमंत्रण सौंपा था। इस कदम से दोनों मित्र देशों के बीच रुकी हुई बातचीत को दोबारा शुरू करने और आपसी सहयोग को एक नई रणनीतिक गति मिलने की संभावनाएं बेहद मजबूत हो गई हैं। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने अभी तक सार्वजनिक रूप से यह साफ नहीं किया है कि प्रधानमंत्री मोदी इस अमेरिकी निमंत्रण को कब स्वीकार करेंगे।

बड़े व्यापारिक और रक्षा समझौतों को अंतिम रूप देने में जुटीं दोनों देशों की टीमें

वर्तमान समय में भारत और अमेरिका के वाणिज्य मंत्रालयों की विशेष टीमें एक बेहद व्यापक और ऐतिहासिक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बायलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट) को अंतिम रूप देने के लिए लगातार मैराथन बातचीत कर रही हैं। पिछले एक वर्ष से इस आर्थिक समझौते को लेकर दोनों पक्षों के बीच लगातार गंभीर चर्चाएं चल रही हैं। इसके अलावा रक्षा उत्पादन, अत्याधुनिक स्वदेशी प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी), पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा और भारी विदेशी निवेश जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच सहयोग के नए रास्ते तलाशने की कोशिशें युद्ध स्तर पर जारी हैं।

आगामी जी20 शिखर सम्मेलन से पहले भविष्य की नई कूटनीतिक दिशा तय करेगी यह बैठक

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों और वरिष्ठ राजनयिकों का दृढ़ विश्वास है कि यदि फ्रांस में जी7 सम्मेलन के दौरान मोदी और ट्रंप के बीच यह मुलाकात धरातल पर उतरती है, तो यह केवल इन दो देशों के आपसी संबंधों के लिए ही संजीवनी साबित नहीं होगी, बल्कि वर्तमान वैश्विक आर्थिक मंदी, युद्ध के हालातों और रणनीतिक मुद्दों पर वैश्विक सहयोग के लिहाज से भी एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। इसके अलावा, आगामी दिसंबर के महीने में अमेरिका के फ्लोरिडा में प्रस्तावित विशाल ‘जी20 शिखर सम्मेलन’ से ठीक पहले होने वाली यह मुलाकात दोनों महान राष्ट्रों की भविष्य की पूरी कूटनीतिक और भू-राजनीतिक दिशा को तय करने में सबसे बड़ी और मार्गदर्शक भूमिका निभा सकती है।

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