एजेंसी, नई दिल्ली। K Annamalai Resigns : देश की राजनीति और विशेषकर दक्षिण भारत के सियासी गलियारों से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने भाजपा को हमेशा- हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अन्नामलाई ने देश की राजधानी नई दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष से एक विशेष मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष को अपना पांच पन्नों का विस्तृत इस्तीफा सौंप दिया। उनके इस अचानक उठाए गए कदम और इस्तीफे की खबर ने पूरे राजनीतिक जगत में भारी हलचल मचा दी है, जिसके बाद दक्षिण भारत में भाजपा के भविष्य को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने शुरू हो गए हैं।
BJP leader K. Annamalai met BJP National President Nitin Nabin, National General Secretary (Organisation) B.L. Santosh, and Union Home Minister Amit Shah in Delhi. He briefed the leadership on developments in Tamil Nadu and the reasons for considering stepping away from the… pic.twitter.com/1gT6o4Nrnu
— IANS (@ians_india) June 2, 2026
छह से आठ महीने के भीतर नई क्षेत्रीय पार्टी का करेंगे एलान
भारतीय जनता पार्टी से नाता तोड़ने के बाद अब के. अन्नामलाई अपने राजनीतिक सफर को एक बिल्कुल नई दिशा देने की तैयारी में जुट गए हैं। सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, पूर्व आईपीएस अधिकारी अब तमिलनाडु की स्थानीय राजनीति पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक नई क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी की शुरुआत करने की बड़ी योजना बना रहे हैं। उनके करीबी सहयोगियों और रणनीतिकारों का कहना है कि उनकी यह प्रस्तावित नई पार्टी पूरी तरह से ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘तमिल-प्रथम’ की मजबूत विचारधारा पर आधारित होगी। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा बेहद तेज है कि इस नए संगठन को आगामी छह से आठ महीनों के भीतर आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया जाएगा। यह नई पार्टी तमिलनाडु के सियासी समर में सत्तारूढ़ और विपक्षी द्रविड़ दलों के साथ-साथ भाजपा के सामने भी एक कड़े और मजबूत विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करने का पुरजोर प्रयास करेगी।
तमिल पहचान को राष्ट्रीय सोच से जोड़ने का है मुख्य लक्ष्य
के. अन्नामलाई के बेहद करीबी और भरोसेमंद सूत्रों ने उनके भविष्य के राजनीतिक रोडमैप की जानकारी देते हुए बताया है कि वह राज्य में एक ऐसा नया और पारदर्शी राजनीतिक मंच तैयार करना चाहते हैं, जो तमिल संस्कृति और तमिल अस्मिता की पहचान को देश की राष्ट्रीय सोच के साथ मजबूती से जोड़ने का काम करे। इसके साथ ही, उनकी पार्टी की यह नीति भी होगी कि वह केवल विरोध की राजनीति करने के बजाय पूरी तरह से मुद्दों पर आधारित राजनीति करेगी। वे अन्य राजनीतिक विरोधी दलों का विरोध करते समय भी केवल व्यक्तिगत आरोपों के बजाय जनता से जुड़े असल मुद्दों को ही प्रमुखता से उठाएंगे, ताकि राज्य के युवाओं और आम जनता को अपनी तरफ आकर्षित किया जा सके।
गठबंधन और टिकट बंटवारे को लेकर चल रहा था गहरा मतभेद
इस बड़े राजनीतिक इस्तीफे के पीछे पिछले कई महीनों से भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और अन्नामलाई के बीच चल रही अंदरूनी तनातनी को मुख्य वजह बताया जा रहा है। दरअसल, तमिलनाडु में पार्टी की राजनीतिक रणनीति और फैसलों को लेकर दोनों पक्षों के बीच गहरे मतभेद खुलकर सामने आ रहे थे। सूत्रों का दावा है कि अन्नामलाई राज्य में एआईएडीएमके के साथ दोबारा से राजनीतिक गठबंधन शुरू करने के केंद्रीय नेतृत्व के फैसले से अंदरखाने बेहद नाखुश और असहमत थे। इसके अलावा, हाल ही में संपन्न हुए राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सीटों पर उम्मीदवारों के चयन और टिकट बंटवारे की प्रक्रिया को लेकर भी उनके मन में भारी असंतोष था। इसी कड़वाहट और नाराजगी की वजह से चुनाव के नतीजे सामने आते ही अन्नामलाई ने आखिरकार भाजपा का साथ पूरी तरह से छोड़ने का यह कड़ा फैसला ले लिया।
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