सुगम परिवहन सेवा योजना : मध्य प्रदेश के हर कोने में दौड़ेंगी सरकारी बसें- मुख्यमंत्री डॉ. यादव
एजेंसी, भोपाल। मध्य प्रदेश के नागरिकों को सफर के लिए अब और बेहतर सरकारी बसें मिलने वाली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक में निर्देश दिए हैं कि राज्य के लोगों को संस्थागत सरकारी बस सेवा का फायदा देने के लिए ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना’ को जल्द से जल्द जमीन पर उतारा जाए। इस बैठक में परिवहन और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छा लोक परिवहन सिर्फ सफर का साधन नहीं है, बल्कि यह राज्य की तरक्की की जीवन रेखा है। उन्होंने बाहरी राज्यों से आने वाले मालवाहक वाहनों की जांच के लिए नाकों को और आधुनिक बनाने तथा परिवहन चौकियों को आपस में जोड़ने की बात कही। साथ ही, विभाग में खाली पड़े पदों को अभियान चलाकर भरने के निर्देश दिए।
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आधे घंटे में मौके पर पहुंचेगी एम्बुलेंस, हादसों वाले इलाकों की होगी मैपिंग
सड़क हादसों में लोगों की जान बचाने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश के सबसे ज्यादा दुर्घटना वाले इलाकों की पहचान कर ली जाए ताकि वहां तुरंत इलाज की सुविधा दी जा सके। अलग-अलग विभागों की एम्बुलेंस सेवाओं को एक ही जगह जोड़ा जाएगा। इससे किसी भी हादसे के बाद सबसे पास वाली एम्बुलेंस खुद-ब-खुद सक्रिय होकर 30 मिनट से भी कम समय में मौके पर पहुंच जाएगी। इसके अलावा, सड़क सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए राज्य में एक अलग ‘मध्य प्रदेश राज्य सड़क सुरक्षा सचिवालय’ बनाया जा रहा है।
पीएम-राहत और राहवीर योजना में मध्य प्रदेश देश में अव्वल
बैठक में बताया गया कि पीएम-राहत और राहवीर योजना को लागू करने में मध्य प्रदेश पूरे देश में पहले पायदान पर है। राज्य के सभी 55 जिलों में इसके लिए अधिकारी तैनात हो चुके हैं। पीएम-राहत योजना में अब तक 1692 मामलों को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि राहवीर योजना में 49 मामले मंजूर किए गए हैं, जिसमें बालाघाट जिले ने सबसे बेहतरीन काम किया है। सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा कमेटी ने भी मध्य प्रदेश सरकार के इन प्रयासों की जमकर तारीफ की है।
परिवहन विभाग की कमाई में भारी उछाल और बिचौलियों से मुक्ति
परिवहन विभाग ने बीते साल कमाई के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। विभाग को 4,400 करोड़ रुपये का लक्ष्य मिला था, जिसके मुकाबले 4911.78 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया गया, जो लक्ष्य से 111.6 प्रतिशत ज्यादा है। इस साल के लिए करीब 5,721 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, विभाग की तरफ से 51 तरह की सुविधाएं ऑनलाइन (फेसलेस) दी जा रही हैं, जिससे आम जनता को दलालों से पूरी तरह मुक्ति मिल गई है और कामकाज पारदर्शी हुआ है।
दो चरणों में चलेंगी 5,206 बसें, सभी का रंग होगा एक जैसा
‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना’ के जरिए ग्रामीण इलाकों को जोड़ने और महिलाओं की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जा रहा है। यह योजना दो चरणों में लागू होगी, जिसके लिए प्रदेश को इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, ग्वालियर और रीवा जैसे 7 हिस्सों में बांटा गया है। पहले चरण में अगले दो सालों के भीतर 1,164 रास्तों पर कुल 5,206 बसें चलाई जाएंगी। खास बात यह है कि एकरूपता बनाए रखने के लिए इन सभी बसों का रंग एक जैसा होगा। इन बसों की निगरानी के लिए एक आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम भी बनाया जा रहा है।
किस क्षेत्र में कितनी बसें चलेंगी, उसका ब्यौरा इस प्रकार है:
इंदौर क्षेत्र: 121 रास्तों पर 608 बसें
भोपाल क्षेत्र: 104 रास्तों पर 398 बसें
उज्जैन क्षेत्र: 120 रास्तों पर 371 बसें
सागर क्षेत्र: 92 रास्तों पर 344 बसें
जबलपुर क्षेत्र: 83 रास्तों पर 309 बसें
ग्वालियर क्षेत्र: 65 रास्तों पर 298 बसें
रीवा क्षेत्र: 35 रास्तों पर 184 बसें
कैमरों से अपने आप जांचे जाएंगे गाड़ियों के कागज
लाइसेंस और गाड़ी के रजिस्ट्रेशन को आसान बनाने के लिए पहले से ही डिजिटल प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं। अब सरकार प्रदेश में एक नई ऑटोमैटिक चेकिंग प्रणाली (ई-डिटेक्शन) लागू करने जा रही है। इसके तहत सड़कों पर लगे कैमरे गाड़ियों की नंबर प्लेट को अपने आप स्कैन कर लेंगे और गाड़ी के सारे कागजात सरकारी पोर्टल से सीधे ऑनलाइन जांच लिए जाएंगे।
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