वरुण धवन

भारी-भरकम बजट में बनी फिल्म , जिसकी असफलता पर 7 साल बाद वरुण धवन ने साझा किया दर्द

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भारी-भरकम बजट में बनी फिल्म , जिसकी असफलता पर 7 साल बाद वरुण धवन ने साझा किया दर्द

एजेंसी, मुंबई। हिंदी सिनेमा जगत के जाने-माने अभिनेता वरुण धवन इन दिनों अपनी आगामी प्रेम और हास्य से भरपूर फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के प्रचार-प्रसार में काफी व्यस्त हैं। यह चलचित्र बेहद जल्द सिनेमाघरों में दर्शकों के बीच पहुंचने वाला है। इस फिल्म में मुख्य कलाकारों के तौर पर वरुण धवन के साथ मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे। इनके साथ ही मौनी रॉय, जिमी शेरगिल, राकेश बेदी और कुब्रा सैत जैसे मंझे हुए कलाकार भी महत्वपूर्ण किरदारों में मनोरंजन करते नजर आएंगे। अपनी इस नई कलाकृति के प्रचार के दौरान अभिनेता ने अतीत में मिली अपनी एक बड़ी असफलता पर बहुत ही बेबाकी से अपने विचार साझा किए। वर्ष 2019 में बड़े पैमाने पर निर्मित और कई नामचीन सितारों से सजी उनकी एक फिल्म ‘कलंक’ सिनेमाघरों में दर्शकों को रिझाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई थी। अब पूरे सात साल का लंबा समय बीत जाने के पश्चात अभिनेता ने उस असफलता से खुद पर पड़े गहरे मानसिक प्रभाव के बारे में खुल कर बात की है।

एक मनोरंजन केंद्रित बातचीत के दौरान अभिनेता ने अपने शुरुआती सफर और करियर की पहली सबसे बड़ी नाकामी का स्मरण किया। उन्होंने इस विषय पर भावुक होते हुए कहा कि जब उनकी वह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल हुई, तो वह भीतर तक पूरी तरह से हिल गए थे। इस गहरे झटके की मुख्य वजह यह थी कि उस समय तक उन्होंने अपने करियर में केवल सफलताओं का स्वाद चखा था और लगातार हिट फिल्में दी थीं। अभिनेता ने बताया कि वह लंबे समय तक इस बात का आकलन नहीं कर पाए कि दर्शकों ने उनकी उस कलाकृति को इस तरह क्यों नकार दिया, जबकि उन्होंने उस किरदार को जीवंत करने के लिए अपने जीवन की सर्वश्रेष्ठ मेहनत की थी। उस कठिन दौर में उनके मार्गदर्शक और पिता डेविड धवन ने उन्हें जीवन में उतार-चढ़ाव के नियमों को समझाकर ढांढस बंधाने का प्रयास किया था, परंतु फिल्म से अत्यधिक लगाव होने के कारण उस समय उनके लिए इस कड़वे सच को स्वीकार करना बेहद मुश्किल था।

वरुण धवन के करियर के उतार-चढ़ाव पर चर्चा करते हुए उनके पिता और वरिष्ठ फिल्म निर्देशक डेविड धवन ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि जब वह अपने पुत्र की पहली फिल्म देखने सिनेमाघर पहुंचे थे, तब वरुण भविष्य को लेकर अत्यंत आशंकित और डरे हुए थे। फिल्म के अंतिम दृश्यों को देखने के बाद उन्होंने वरुण की पीठ थपथपाई थी और उनके अभिनय की सराहना की थी। उस शुरुआती दौर में महानायक अमिताभ बच्चन ने भी वरुण के अभिनय कौशल को देखकर उन्हें भविष्य का एक बेहद लंबा और कामयाब खिलाड़ी बताया था, जिससे एक पिता के रूप में वह पूरी तरह आश्वस्त हो गए थे। निर्देशक पिता ने स्वीकार किया कि ‘कलंक’ एक ऐसा ड्रीम प्रोजेक्ट था जिसके असफल होने से उन्हें स्वयं बहुत गहरा दुख पहुंचा था। इस सिनेमा का निर्माण अत्यंत भव्य स्तर पर किया गया था और निर्माता करण जौहर ने इसे बेहतरीन बनाने के लिए दिन-रात एक कर दिया था।

अभिनेता ने बातचीत को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भले ही वह फिल्म व्यावसायिक रूप से बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिर गई, परंतु पूरी टीम ने मिलकर उस पर जो पसीना बहाया था, उसे भुलाया नहीं जा सकता। एक सामूहिक इकाई के रूप में पूरी स्टारकास्ट और तकनीकी टीम ने इससे पहले कभी किसी अन्य प्रोजेक्ट के लिए इतनी रात-दिन मेहनत नहीं की थी। यही कारण था कि फिल्म की असफलता ने पूरी टीम को हैरत में डाल दिया था कि इतनी बारीकी से काम करने के बाद भी चूक कहाँ रह गई। अंत में अभिनेता ने अपने पिता की सीख को याद करते हुए कहा कि व्यावसायिक जीवन में सफलता और असफलता का एक चक्र होता है, इसलिए अतीत की निराशा को पीछे छोड़कर हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए और नए कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

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