एजेंसी, भोपाल। MP Govt Decision 2026 : मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार प्रदेश के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई बड़े और नीतिगत बदलाव करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक में सांसदों की तर्ज पर विधायकों को भी स्वेच्छानुदान राशि खर्च करने के व्यापक अधिकार देने पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। नए प्रावधानों के तहत अब विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए धर्मशाला के निर्माण समेत 8 अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए भी स्वेच्छानुदान के तहत बेझिझक राशि स्वीकृत कर सकेंगे। इस नीतिगत फैसले को अब अधिकारी कानूनी और तकनीकी दृष्टि से परखेंगे, जिसके बाद आगामी कैबिनेट बैठक में इस पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
पट्टा वितरण के नियमों में बड़ा बदलाव, दूरियों की बंदिशें हटेंगी
बैठक में राज्य सरकार ने पट्टा वितरण के पुराने और ढर्रे पर चल रहे नियमों को भी पूरी तरह से बदलने का बड़ा निर्णय लिया है। वर्तमान नियमों के अनुसार, नगर निगम क्षेत्रों में 8 किलोमीटर, नगर पालिकाओं में 5 किलोमीटर और नगर परिषदों में 3 किलोमीटर के दायरे के भीतर पट्टा वितरण की प्रक्रिया कानूनी और प्रशासनिक रूप से बेहद जटिल है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सरकार अब इस पूरी व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव कर निकायों में तय दूरी के इन दायरों और बंदिशों को पूरी तरह से हटाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। सरकार का मुख्य उद्देश्य पूरी पट्टा वितरण प्रक्रिया को अत्यंत सरल, सुगम और पारदर्शी बनाना है।
अग्निवीरों को भर्तियों में 5% से 30% तक आरक्षण देने की तैयारी
युवाओं के हित में एक और बड़ा कदम उठाते हुए मोहन सरकार मध्य प्रदेश में अग्निवीरों को पुलिस, होमगार्ड, जेल प्रहरी और फायरमैन जैसे महत्वपूर्ण पदों पर होने वाली सरकारी भर्तियों में 5% से लेकर 30% तक विशेष आरक्षण देने की तैयारी में जुट गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गृह विभाग और संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में सभी कानूनी पहलुओं और नियमों की बारीकी से जांच करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।
मंदिरों से हटेंगी निजी सुरक्षा एजेंसियां, महाकाल मंदिर से होगी शुरुआत
प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों और बड़े मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार ने एक नीतिगत फैसला किया है। अब राज्य सरकार प्रदेश के सभी बड़े और प्रमुख मंदिरों की सुरक्षा कमान पूरी तरह से अपने हाथों में लेगी। इस नई व्यवस्था की शुरुआत उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल मंदिर से की जा रही है, जहाँ पूर्व सैनिकों और होमगार्ड के जवानों को सुरक्षा व्यवस्था सौंपने की प्रक्रिया पहले से ही गति पकड़ चुकी है। इसी सफल मॉडल को आधार बनाकर प्रदेश के अन्य बड़े मंदिरों से भी निजी सुरक्षा एजेंसियों (प्राइवेट सिक्योरिटी) को पूरी तरह से हटाया जाएगा।
कपास पर मंडी शुल्क हुआ 55 पैसे, पेयजल की होगी वार्ड स्तर पर समीक्षा
किसानों और व्यापारियों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने खंडवा और बुरहानपुर की कृषि उपज मंडियों में पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र की तर्ज पर कपास पर लगने वाले मंडी शुल्क को घटाकर मात्र 55 पैसे करने पर अपनी सहमति दे दी है। इसके अतिरिक्त, नर्मदा समग्र मिशन से जुड़े विकास कार्यों की गति बढ़ाने के लिए अब हर महीने के पहले सोमवार को एक विशेष समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए अब पंचायत और वार्ड स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी। वहीं, धार्मिक नगरी चित्रकूट धाम के समग्र और चौमुखी विकास के लिए मध्य प्रदेश सरकार जल्द ही उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एक संयुक्त और विस्तृत बैठक करने जा रही है।
शासकीय दफ्तरों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य, मंत्रियों की होगी ‘अग्नि परीक्षा’
प्रशासनिक कसावट को मजबूत करने के लिए प्रदेश के सभी शासकीय सेवकों के लिए मंत्रालय (वल्लभ भवन) के बाद अब सभी जिलों के सरकारी कार्यालयों में भी बायोमेट्रिक अटेंडेंस (हाजिरी) को पूरी तरह से अनिवार्य किया जा रही है। दूसरी तरफ, मध्य प्रदेश सरकार और भाजपा संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए मंत्रियों की परफॉर्मेंस समीक्षा का एक बड़ा और कड़ा कार्यक्रम तय किया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में ढाई साल का सफल कार्यकाल पूरा करने जा रही सरकार के सभी मंत्रियों को रविवार और सोमवार को सत्ता व संगठन के शीर्ष प्रमुखों के सामने अपना-अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करना होगा।
इस अहम समीक्षा की शुरुआत सबसे पहले प्रदेश के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा करेंगे, जो अपने वित्त व आबकारी विभाग सहित अपने प्रभार वाले जिलों का पूरा लेखा-जोखा सत्ता-संगठन के सामने रखेंगे, जबकि सबसे अंत में राज्यमंत्री राधा सिंह की बारी आएगी। कुल 18 मुख्य बिंदुओं पर तैयार की गई इस विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर संगठन के प्रमुख मंत्रियों को उनकी कमियों और परफॉर्मेंस से रूबरू कराएंगे। राजनीतिक गलियारों में इस बड़ी कवायद को मध्य प्रदेश के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके साथ ही बैठक में उन सभी विधानसभा सीटों की भी विशेष समीक्षा की जाएगी, जहां भाजपा को साल 2023 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था, ताकि आगामी चुनावों के लिए मजबूत रणनीति तैयार की जा सके।
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