मोहन सरकार

एमपी में बड़ा प्रशासनिक बदलाव तय! पीएचई विभाग के विलय को मुख्यमंत्री की मंजूरी, कम छात्र वाले स्कूल भी होंगे बंद

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एजेंसी, भोपाल। MP PHE Department : मध्यप्रदेश में मोहन सरकार बड़े प्रशासनिक बदलाव की तैयारी में जुट गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नीतिगत मामलों की समीक्षा बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मौखिक मंजूरी दे दी है। सबसे बड़ा फैसला लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी यानी पीएचई विभाग को लेकर सामने आया है। सरकार अब इस विभाग के अमले को दो अलग-अलग विभागों में मर्ज करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही कम छात्र संख्या वाले सरकारी स्कूलों को बंद कर उन्हें दूसरे स्कूलों में समाहित करने की योजना पर भी सहमति बनी है।

पीएचई विभाग का होगा पुनर्गठन

प्रदेश में गांव और शहरों में पेयजल व्यवस्था संभालने वाला पुराना पीएचई विभाग अब बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। प्रस्ताव के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत पीएचई कर्मचारियों और योजनाओं की जिम्मेदारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को सौंपी जाएगी। वहीं शहरी क्षेत्रों का अमला नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधीन जाएगा। हालांकि विभाग को पूरी तरह खत्म किया जाएगा या केवल पुनर्गठित किया जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। लेकिन सरकार की तैयारी से साफ है कि आने वाले समय में पीएचई की मौजूदा संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

केंद्र के फैसले के बाद तेज हुई प्रक्रिया

बताया जा रहा है कि यह फैसला केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की हालिया नीति से जुड़ा हुआ है। मंत्रालय ने मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों से कहा है कि ग्रामीण नल-जल योजनाओं की जिम्मेदारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को दी जाए। मध्यप्रदेश में इस दिशा में पहले से काम चल रहा था, लेकिन अब सरकार पीएचई विभाग के विलय की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही है। माना जा रहा है कि इससे जल योजनाओं के संचालन और निगरानी में एकरूपता लाने की कोशिश की जाएगी।

कम छात्र संख्या वाले स्कूल होंगे मर्ज

सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव करने की तैयारी की है। बैठक में सहमति बनी कि कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को एक-दूसरे में समाहित किया जाएगा। जिन स्कूलों में बहुत कम बच्चे पढ़ रहे हैं, उन्हें बंद कर छात्रों को पास के दूसरे स्कूलों में स्थानांतरित किया जा सकता है। इसके अलावा यह भी तय किया गया कि प्रदेश के सभी स्कूल अब स्कूल शिक्षा विभाग के तहत संचालित होंगे। सरकार का मानना है कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा और शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

सांदीपनि स्कूलों के भवनों का होगा दूसरा उपयोग

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कई सांदीपनि स्कूलों के बड़े भवनों का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। फिलहाल इनमें केवल एक शिफ्ट चलती है। ऐसे में सरकार इन भवनों का उपयोग दूसरी शैक्षणिक या सामाजिक गतिविधियों के लिए करने की योजना बना रही है। सरकार का उद्देश्य खाली पड़े संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना बताया जा रहा है।

स्वामित्व योजना और पट्टा वितरण पर जोर

बैठक में स्वामित्व योजना के विस्तार पर भी चर्चा हुई। सरकार अब प्रदेश में 50 लाख पट्टों के वितरण का बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रही है। जानकारी के अनुसार इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के शामिल होने की भी संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा पंचायतों में आबादी भूमि घोषित करने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी सहमति बनी है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को भूमि संबंधी अधिकार जल्दी मिल सकें।

पेयजल व्यवस्था में लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार अब पानी की सप्लाई व्यवस्था पर सख्त निगरानी रखेगी और गड़बड़ी मिलने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। गर्मी के मौसम में जल संकट को देखते हुए सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।

मेडिकल यूनिवर्सिटी और आरजीपीवी विस्तार पर भी चर्चा

बैठक में प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के विस्तार को लेकर भी चर्चा हुई। भोपाल, जबलपुर और उज्जैन में मेडिकल यूनिवर्सिटी के अलग-अलग विस्तार को लेकर सुझाव सामने आए। हालांकि कानूनी पहलुओं को देखते हुए मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव पर और अध्ययन करने को कहा है। इसके साथ ही युवाओं की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए आरजीपीवी के नए कैंपस खोलने पर भी चर्चा हुई। सरकार प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में तकनीकी शिक्षा सुविधाओं का विस्तार करने की दिशा में काम कर सकती है।

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