एजेंसी, नई दिल्ली। CNG Price Hike : देश की राजधानी में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगी आग के बाद अब कंप्रेस्ड नेचुरल गैस की कीमतों ने भी आम जनता को बड़ा झटका दिया है। दिल्ली में सीएनजी के दाम में ₹2 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है, जिससे नई कीमत ₹77.09 से बढ़कर ₹79.09 प्रति किलो हो गई है। यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब देश पहले ही रिकॉर्ड महंगाई और ईंधन की बढ़ती दरों से जूझ रहा है।
#BREAKING: Petrol and diesel prices have increased by ₹3, while CNG prices have risen by ₹2 pic.twitter.com/Sfhylu5cw5
— IANS (@ians_india) May 15, 2026
मुंबई के बाद दिल्ली में भी बढ़ी कीमतें
गौरतलब है कि दिल्ली से महज एक दिन पहले महानगर गैस लिमिटेड ने मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में भी सीएनजी की कीमतों में ₹2 प्रति किलो का इजाफा किया था। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी तनाव और होर्मुज़ क्षेत्र में गैस सप्लाई प्रभावित होने की आशंकाओं ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों को हवा दी है, जिसका सीधा असर अब भारत के घरेलू बाजार पर पड़ रहा है।
पेट्रोल और डीजल की दरों में भी भारी वृद्धि
सीएनजी से ठीक पहले शुक्रवार को देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इस वृद्धि के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹97.77 प्रति लीटर तक पहुंच गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियां वैश्विक स्तर पर महंगा कच्चा तेल खरीदने के कारण हर महीने लगभग ₹30,000 करोड़ का अंडर-रिकवरी (नुकसान) झेल रही हैं। केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर राहत देने की कोशिश की है, लेकिन बढ़ते घाटे के कारण कीमतें बढ़ाना मजबूरी बन गया है।
आम जनता और परिवहन पर पड़ेगा सीधा असर
सीएनजी की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी का सबसे गहरा असर सार्वजनिक परिवहन पर पड़ने की संभावना है। दिल्ली जैसे महानगरों में ऑटो, टैक्सी और बसों का एक बड़ा बेड़ा सीएनजी पर ही निर्भर है। किराए बढ़ने की आशंका ने रोजाना सफर करने वाले यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। परिवहन संघों का कहना है कि लागत बढ़ने के कारण अब किराया बढ़ाना अनिवार्य हो सकता है, जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ और बढ़ जाएगा।
तेल कंपनियों के मुनाफे पर संकट
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सीआईआई बिजनेस समिट 2026 में चेतावनी दी है कि यदि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं, तो वित्त वर्ष 2026 में सरकारी तेल कंपनियों का पूरा मुनाफा खत्म हो सकता है। मौजूदा ऊर्जा संकट के कारण तेल कंपनियों को रोजाना करीब ₹1,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में ऊर्जा बाजार में और अधिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
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