एजेंसी, दिल्ली। Inflation in India : भारत में महंगाई की मार अब बेकाबू होती दिख रही है, जहां थोक बाजार में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतों में आए जबरदस्त उछाल ने पिछले साढ़े तीन साल के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अप्रैल महीने में थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति की दर उछलकर 8.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो अक्टूबर 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक तनाव के कारण ऊर्जा क्षेत्र में आई इस तेजी ने घरेलू बजट को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। गौरतलब है कि पिछले महीने मार्च 2026 में यह दर मात्र 3.88 प्रतिशत थी, जो अब दोगुने से भी अधिक हो गई है।
Index Numbers of Wholesale Price in India for the Month of April 2026 (Base Year: 2011-12)
🌀The annual rate of inflation based on All India Wholesale Price Index (WPI) stood at 8.3% (provisional) in April 2026 (over April 2025)
🌀Positive rate of inflation in April, 2026 is… pic.twitter.com/CFCgsrPlCv
— PIB India (@PIB_India) May 14, 2026
पेट्रोल-डीजल और कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी ताजा आंकड़ों ने अर्थव्यवस्था की चिंताएं बढ़ा दी हैं। पिछले साल अप्रैल के मुकाबले इस साल पेट्रोल की थोक कीमतों में 32.40 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, डीजल की महंगाई दर 25.19 प्रतिशत और कमर्शियल व घरेलू इस्तेमाल होने वाली एलपीजी की दर 10.92 प्रतिशत तक पहुंच गई है। सबसे भयावह आंकड़े कच्चे तेल के क्षेत्र से आए हैं, जहां थोक महंगाई दर में 67.18 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस श्रेणी में कच्चा तेल अकेले 88 प्रतिशत तक महंगा हो गया है, जिसका सीधा असर परिवहन और माल ढुलाई की लागत पर पड़ रहा है।
रसोई के सामान में मामूली राहत, लेकिन डेयरी उत्पादों में उछाल
भीषण महंगाई के बीच आम आदमी के लिए राहत की एकमात्र खबर सब्जी मंडी से आई है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में आलू की कीमतों में 30 प्रतिशत और टमाटर के दामों में 26 प्रतिशत की महत्वपूर्ण गिरावट आई है। इसके साथ ही दालों और अनाजों के भाव भी कम हुए हैं, जिससे थाली की लागत में कुछ कमी आई है। हालांकि, यह राहत भी सीमित है क्योंकि अंडा, मांस और मछली जैसी प्रोटीन वाली चीजों के दाम 6.68 प्रतिशत बढ़ गए हैं। साथ ही, दूध की कीमतों में भी 2.56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों के पोषण का खर्च बढ़ गया है।
औद्योगिक उत्पादन और विनिर्मित वस्तुओं पर बढ़ता दबाव
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब धीरे-धीरे औद्योगिक उत्पादों पर भी दिखने लगा है। मंत्रालय के अनुसार, विनिर्मित वस्तुओं में कपड़ों की थोक महंगाई दर 7.30 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इसके अलावा, तंबाकू उत्पादों में 5.67 प्रतिशत और रसायनों व रासायनिक उत्पादों की कीमतों में 5.09 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक थोक बाजार में इन वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण बना रहेगा। आने वाले समय में यह थोक महंगाई खुदरा कीमतों को भी प्रभावित कर सकती है, जिससे आम जनता की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।
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