एजेंसी, नई दिल्ली/तेहरान। Trump Iran News : मध्य-पूर्व (मिडिल-ईस्ट) में शांति की कोशिशों को उस समय बड़ा झटका लगा जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा भेजे गए युद्धविराम प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका को चेतावनी दी है कि उसके सशस्त्र बल किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस जुबानी जंग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न केवल भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भी खलबली मचा दी है।
Hopes for a peace deal on Iran faded after Trump said a ceasefire with Iran was ‘on life support’ as Tehran rejected a US proposal to end the conflict and stuck to a list of demands the US president described as ‘garbage’ https://t.co/VEnLyziSGh
— Reuters (@Reuters) May 12, 2026
ट्रंप की दोटूक: ‘प्रस्ताव पूरी तरह कचरा है’
वाशिंगटन में मीडिया से चर्चा के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी प्रस्ताव पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने इसे पूरी तरह ‘अस्वीकार्य’ बताते हुए कहा कि यह शांति प्रस्ताव किसी मरणासन्न मरीज की तरह है, जिसके बचने की उम्मीद महज एक प्रतिशत है। ट्रंप ने अमेरिका-समर्थित शर्तों पर ईरान के जवाब को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वे ईरान की मौजूदा नीतियों और मांगों के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे।
ईरान का पलटवार: ‘हमलावर को सिखाएंगे सबक’
ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ ने सोशल मीडिया पर कड़ी चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि ईरान के सशस्त्र बल किसी भी आक्रामक कार्रवाई का करारा जवाब देने के लिए मुस्तैद हैं। गालिबफ ने कहा कि गलत रणनीति और खराब फैसलों के परिणाम हमेशा विनाशकारी होते हैं और ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पीछे नहीं हटेगा।
क्या थी ईरान की मांगें?
ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उनके प्रस्ताव का उद्देश्य क्षेत्र में सैन्य अभियानों पर रोक लगाना था। ईरान की प्रमुख मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल थे:
ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत खत्म करना।
लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायली सैन्य कार्रवाइयों पर रोक।
विभिन्न देशों में प्रतिबंधों के कारण रोकी गई (फ्रीज) ईरानी संपत्तियों को वापस जारी करना। ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने कहा कि उन्होंने कोई विशेष रियायत नहीं मांगी है, बल्कि केवल ईरान के वैध अधिकारों की बहाली की बात कही है।
ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
इस बढ़ते तनाव का सबसे बुरा असर वैश्विक तेल और गैस की कीमतों पर पड़ने की आशंका है। होर्मुज स्ट्रेट (होर्मुज जलडमरूमध्य) में पहले से ही जारी रुकावटों के कारण बाजार दबाव में हैं। यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो ईंधन की आपूर्ति बाधित होने से दुनिया भर में कमर्शियल गतिविधियों और महंगाई पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस क्षेत्र में होने वाली अगली सैन्य या कूटनीतिक हलचल पर टिकी हैं।
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