हिमंता बिस्वा सरमा

हिमंता बिस्वा सरमा का दूसरा कार्यकाल : असम में ‘डबल इंजन’ सरकार की वापसी और विकास का नया संकल्प

असम देश/प्रदेश राष्ट्रीय

एजेंसी, गुवाहाटी। Assam CM Oath : असम के राजनीतिक इतिहास में एक बार फिर हिमंता बिस्वा सरमा ने अपनी धाक जमाते हुए मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। मंगलवार को आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह दूसरा अवसर है जब सरमा राज्य की कमान संभाल रहे हैं। सुबह करीब 11:45 बजे हुए इस शपथ ग्रहण समारोह में उनके साथ मंत्रिमंडल के चार अन्य महत्वपूर्ण सदस्यों ने भी शपथ ली। इस खास मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित केंद्र के कई दिग्गज नेता गवाह बने।

नए मंत्रिमंडल का गठन और रणनीतिक गठबंधन

शपथ लेने वाले मंत्रियों में अनुभव और क्षेत्रीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रामेश्वर तेली और भाजपा की वरिष्ठ विधायक अजंता नेओग के साथ-साथ सहयोगी दलों को भी मंत्रिमंडल में स्थान मिला है। असम गण परिषद (AGP) के अध्यक्ष अतुल बोरा और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) के चरण बोरो ने मंत्री पद की शपथ लेकर गठबंधन की मजबूती का संदेश दिया है। वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता रणजीत दास को विधानसभा का नया स्पीकर नियुक्त किया गया है। चुनावी नतीजों पर गौर करें तो एनडीए ने कुल 102 सीटों पर कब्जा किया है, जिसमें से भाजपा ने अकेले 82 सीटें जीतकर अपना दबदबा साबित किया है।

विकास का ‘ट्रेलर’ खत्म, अब शुरू होगी ‘फिल्म’

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भविष्य की कार्ययोजना को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनका पिछला कार्यकाल केवल एक ‘ट्रेलर’ की तरह था और इस दूसरे कार्यकाल में विकास की असली ‘फिल्म’ दिखाई देगी। 57 वर्षीय सरमा ने जालुकबारी विधानसभा सीट से 89 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज कर अपनी लोकप्रियता को प्रमाणित किया है। 2015 में कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले सरमा ने बहुत कम समय में पूर्वोत्तर में पार्टी के सबसे बड़े रणनीतिकार के रूप में अपनी पहचान बनाई है।

चुनौतियों और विवादों के बीच सुशासन की राह

सरमा का राजनीतिक सफर जितना प्रभावशाली रहा है, उतना ही विवादों से भी घिरा रहा है। उनके पिछले कार्यकाल में बाल विवाह के खिलाफ कड़े कानून, मवेशी संरक्षण, अतिक्रमण हटाओ अभियान और सरकारी मदरसों को सामान्य स्कूलों में बदलने जैसे फैसलों ने काफी सुर्खियां बटोरीं। विपक्ष ने इन कदमों को सामाजिक ध्रुवीकरण बढ़ाने वाला बताया, लेकिन सरमा अपने स्टैंड पर अडिग रहे। भ्रष्टाचार के आरोपों और व्यक्तिगत हमलों के बावजूद उन्होंने जनहित की योजनाओं और स्वदेशी समुदायों के अधिकारों को अपनी प्राथमिकता बनाए रखा है।

‘डबल इंजन’ की रफ्तार से बदलेगा असम का भविष्य

भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने इस जीत को सुशासन और स्थिरता की जीत बताया है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन ने मुख्यमंत्री को बधाई देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य में एक ही गठबंधन की सरकार होने से असम में निवेश, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और जन कल्याणकारी योजनाओं को नई गति मिलेगी। कनेक्टिविटी और शांति बहाली के क्षेत्र में हुए कार्यों ने असम को पूर्वोत्तर के विकास का मुख्य केंद्र बना दिया है। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद ही मुख्यमंत्री ने कैबिनेट की पहली बैठक बुलाकर यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार बिना समय गंवाए ‘विकसित असम’ के संकल्प को पूरा करने में जुट गई है।

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