ग्रामीण विकास की नई धुरी
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-IV
और विकसित मप्र
किसी भी राष्ट्र या राज्य की प्रगति की धमनियां उसकी सड़कें होती हैं। विशेषकर भारत जैसे देश में, जहां की आत्मा गांवों में बसती है, ग्रामीण कनेक्टिविटी केवल डामर और गिट्टी का मेल नहीं, बल्कि विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य का प्रवेश द्वार होती है। 10 मई 2026 को सीहोर जिले के भैरूंदा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-IV’ और ‘पीएम जनमन योजना’ का शुभारंभ मध्यप्रदेश के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह है। यह आयोजन न केवल बुनियादी ढांचे के विस्तार का प्रतीक है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में राज्य सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का परिचायक भी है।
विकास का महायज्ञ और डबल इंजन सरकार का समन्वय
मध्यप्रदेश में वर्तमान समय में विकास का एक ‘महायज्ञ’ चल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र की लोक-कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में मध्यप्रदेश न केवल अग्रणी रहेगा, बल्कि निर्धारित लक्ष्यों को समय से पूर्व प्राप्त करने का आदर्श भी प्रस्तुत करेगा। भैरूंदा का कार्यक्रम इस बात का गवाह बना कि जब केंद्र और राज्य सरकारें ‘कदम से कदम’ मिलाकर चलती हैं, तो उसका सीधा लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँचता है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-IV के तहत 1763 करोड़ रुपये की लागत से 2117 किलोमीटर लंबी 963 सड़कों का निर्माण कोई सामान्य उपलब्धि नहीं है। यह परियोजना प्रदेश की 987 बसाहटों को मुख्यधारा से जोड़ने का संकल्प है। विशेष रूप से सीहोर जिले के लिए 165 करोड़ रुपये की लागत से 209 किलोमीटर लंबी 81 सड़कों की सौगात स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय राज्य मंत्रियों ने सही रेखांकित किया कि सड़कों के माध्यम से किसान अब अपनी उपज को सीधे मंडियों तक आसानी से पहुंचा पा रहे हैं। परिवहन की लागत कम होने से किसानों की आय में वृद्धि निश्चित है।
शिक्षा और स्वास्थ्य: अच्छी सड़कें होने का अर्थ है कि गांव का बच्चा बिना किसी बाधा के स्कूल पहुंच सकेगा और आपातकालीन स्थिति में गर्भवती महिलाओं या मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा। यह ‘जीवन सुगमता’ की दिशा में सबसे बड़ा कदम है। कनेक्टिविटी बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों और छोटे उद्योगों को नया बाजार मिलता है, जिससे ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं।
केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी का यह कथन कि “मध्यप्रदेश योजनाओं को केवल लागू नहीं करता, बल्कि लक्ष्य भी हासिल करता है”, प्रदेश की कार्यक्षमता पर मुहर लगाता है। सड़कों के निर्माण के मामले में मध्यप्रदेश का देश में ‘नंबर 1’ स्थान पर आना डॉ. मोहन यादव की प्रशासनिक कुशलता और विभागीय तत्परता का परिणाम है।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 2055 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिलना इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार को मध्यप्रदेश की क्रियान्वयन शक्ति पर पूर्ण विश्वास है। यह राशि उन हजारों परिवारों के सिर पर पक्की छत सुनिश्चित करेगी, जो अब तक कच्चे मकानों में रहने को मजबूर थे।
सड़क योजना के साथ-साथ ‘पीएम जनमन’ योजना का शुभारंभ यह दर्शाता है कि सरकार का ध्यान केवल सामान्य विकास पर ही नहीं, बल्कि उन विशेष पिछड़ी जनजातियों पर भी है, जो दशकों से विकास की मुख्यधारा से कटे हुए थे। प्रधानमंत्री मोदी के इस विजन को मुख्यमंत्री डॉ. यादव जिस संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ा रहे हैं, वह समावेशी विकास का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है। भैरूंदा के मंच से मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच जो तालमेल दिखा, वह राज्य के विकास के लिए एक शुभ संकेत है। मुख्यमंत्री का यह कहना कि वह केंद्रीय मंत्री की अपनी लोकसभा क्षेत्र के लिए सभी मांगें मानने को तैयार हैं, एक स्वस्थ और सहयोगात्मक राजनीति की मिसाल है, जहां व्यक्तिगत या क्षेत्रीय हितों से ऊपर उठकर ‘जनता का कल्याण’ सर्वोपरि होता है।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने ग्रामीण सड़कों का जो स्वप्न देखा था, उसे प्रधानमंत्री मोदी ने विस्तार दिया और अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उसे पूर्णता प्रदान कर रहे हैं। ‘विकसित भारत 2047’ की यात्रा में गांव और किसान का विकास सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है, और मध्यप्रदेश इस कड़ी को मजबूती से जोड़ने का काम कर रहा है।
निष्कर्ष यह निकलता है कि 2117 किलोमीटर लंबी सड़कों का यह नेटवर्क केवल परिवहन का मार्ग नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों सपनों के लिए ‘उड़ान भरने का रनवे’ है जो ग्रामीण मध्यप्रदेश की आंखों में पल रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश जिस गति से बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है, वह दिन दूर नहीं जब प्रदेश की हर बसाहट ‘स्मार्ट विलेज’ की परिकल्पना को साकार करेगी। यह विकास का वह महायज्ञ है, जिसमें केंद्र की नीति और राज्य की नियत मिलकर स्वर्णिम मध्यप्रदेश का निर्माण कर रही हैं।
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