एक्शन और डिलीवरी’ के मोड में एमपी की मोहन सरकार
मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक नई ऊर्जा और स्पष्टता दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सुशासन की दिशा में एक ऐसा कदम उठाया है, जिसे आने वाले समय में ‘नजीर’ माना जा सकता है। 15 मई के बाद प्रस्तावित 45 बड़े मुद्दों पर विभागवार समीक्षा बैठक केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रदेश की प्रगति का एक विस्तृत और ठोस खाका तैयार करने का महाअभियान है। यह बैठक इस बात का प्रमाण है कि वर्तमान सरकार केवल तात्कालिक समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अगले एक वर्ष का सुस्पष्ट एजेंडा तय कर राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए संकल्पित है।
इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ‘विशिष्टता’ है। अक्सर सरकारी बैठकें सामान्य प्रगति रिपोर्ट और फाइलों के आदान-प्रदान तक सिमट कर रह जाती हैं, लेकिन मुख्यमंत्री सचिवालय के निर्देशों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह बैठक ‘परंपरागत’ नहीं होगी। इसमें उन 45 चिन्हित विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिनका सीधा सरोकार जनता की खुशहाली, नई नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और लंबित निर्णयों को गति देने से है। सरकार का यह ‘स्पेशल फोकस’ दर्शाता है कि मुख्यमंत्री स्वयं जमीनी हकीकत और प्रशासनिक दक्षता के बीच के अंतर को कम करना चाहते हैं।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखें तो ‘समय सीमा’ और ‘कार्ययोजना’ इस पूरी कवायद के दो सबसे मजबूत स्तंभ हैं। जब किसी विभाग को केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि उसे पूरा करने की निश्चित तारीख दी जाती है, तो जवाबदेही स्वतः निर्धारित हो जाती है। विभागीय सचिवों द्वारा केवल चिन्हित विषयों पर प्रस्तुतीकरण देना इस बात का संकेत है कि सरकार अनावश्यक औपचारिकता के बजाय ‘परिणामोन्मुखी’ कार्यशैली पर जोर दे रही है। यह न केवल नौकरशाही में सक्रियता लाएगा, बल्कि संसाधनों के सही नियोजन में भी मददगार साबित होगा।
इस समीक्षा बैठक का एक महत्वपूर्ण पहलू ‘भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण’ है। अगले एक साल के लिए लक्ष्य निर्धारित करना और रोडमैप तैयार करना यह बताता है कि सरकार के पास प्रदेश के विकास के लिए एक स्पष्ट ‘विजन’ है। चाहे वह शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, बुनियादी ढांचा हो या महिला सशक्तिकरण; जब शासन की शीर्ष स्तर से निगरानी होती है, तो योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचना सुनिश्चित हो जाता है। मुख्यमंत्री का स्वयं समय-सीमा के साथ क्रियान्वयन की समीक्षा करना यह विश्वास दिलाता है कि अब नीतियां केवल कागजों पर नहीं बनेंगी, बल्कि वे तय वक्त में धरातल पर उतरेंगी।
मध्य प्रदेश जैसे विशाल राज्य में, जहां भौगोलिक और सामाजिक विविधताएं हैं, वहां इस तरह का केंद्रित दृष्टिकोण (Focused Approach) विकास की गति को कई गुना बढ़ा सकता है। यह बैठक केवल प्रशासनिक एजेंडा नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का घोषणापत्र है। सरकार ने जिन महत्वपूर्ण विषयों को चुना है, वे निश्चित रूप से प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव लाएंगे।
अंततः, यह पहल ‘रफ्तार और पारदर्शिता’ का संगम है। मुख्यमंत्री मोहन यादव का यह कदम प्रशासनिक कार्यप्रणाली में एक बड़ा बदलाव लेकर आएगा, जहां ‘फाइल कल्चर’ के बजाय ‘फील्ड डिलीवरी’ को प्राथमिकता दी जा रही है। 15 मई के बाद होने वाली इस बैठक से जो रोडमैप निकलेगा, वह न केवल सरकार की कार्यक्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि मध्य प्रदेश को एक आत्मनिर्भर और समृद्ध प्रदेश बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। यह स्पष्ट है कि सरकार अब ‘वेट एंड वॉच’ की नीति के बजाय ‘एक्शन और डिलीवरी’ के मोड में है, जो एक जीवंत लोकतंत्र के लिए अत्यंत सुखद संदेश है।
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