एजेंसी, तेहरान/वॉशिंगटन। Iran US Conflict : मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के संबंधों में एक बार फिर कड़वाहट चरम पर पहुंच गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर ‘लापरवाह सैन्य दुस्साहस’ का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वॉशिंगटन हमेशा राजनयिक समाधान के बजाय सैन्य टकराव का रास्ता चुनता है। अराघची ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर स्पष्ट किया कि ईरान के नागरिक और नेतृत्व किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे घुटने नहीं टेकेंगे। यह तीखी प्रतिक्रिया उन हालिया सैन्य झड़पों के बाद आई है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य में दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ गई थीं।
US and Iranian forces clashed in the Gulf and the United Arab Emirates came under renewed attack, but President Trump said a ceasefire was still holding despite the flare-up, which dented hopes for a swift diplomatic resolution to the crisis https://t.co/1slWXgEURT pic.twitter.com/QfjPljUKGi
— Reuters (@Reuters) May 8, 2026
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता सैन्य टकराव
विवाद की ताज़ा वजह अमेरिकी नौसेना द्वारा उन ईरानी जहाजों पर की गई कार्रवाई है, जो अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन करने का प्रयास कर रहे थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, ओमान की खाड़ी में ईरानी बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे दो तेल टैंकरों को अमेरिकी सेना ने सटीक गोलाबारी कर निष्क्रिय कर दिया। अमेरिका का दावा है कि वह वर्तमान में लगभग 70 से अधिक टैंकरों को ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने से रोक रहा है। दूसरी ओर, ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने न केवल उसके टैंकरों को निशाना बनाया, बल्कि तटीय क्षेत्रों में हवाई हमले भी किए हैं। इन झड़पों में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर उकसावे की कार्रवाई के आरोप लगाए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का बयान और युद्धविराम की स्थिति
लगातार हो रही सैन्य झड़पों और गोलाबारी के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान जारी कर उम्मीद जताई है कि युद्धविराम अब भी प्रभावी है। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि अमेरिका ने कई ईरानी ड्रोन, मिसाइलों और छोटी नौकाओं को नष्ट कर दिया है, जिससे हमलावरों को भारी क्षति हुई है। इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य उन 2,000 जहाजों को सुरक्षित निकालना है, जो फरवरी से इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इस दबाव के जरिए ईरान को शांति वार्ता की मेज पर लाया जा सकता है और फरवरी में शुरू हुए इस युद्ध को समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
वैश्विक तेल बाजार और आर्थिक प्रभाव
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही यह खींचतान केवल सैन्य स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व का वह महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जहाँ से दुनिया के कुल तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। ईरान द्वारा इस मार्ग पर नियंत्रण करने और अमेरिका द्वारा की गई नाकाबंदी के कारण वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है। यदि यह गतिरोध लंबे समय तक जारी रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट और अधिक गहरा सकता है, जिसका सीधा असर परिवहन और विनिर्माण क्षेत्रों पर पड़ेगा।
कूटनीतिक प्रयासों और वार्ता की उम्मीद
सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि वे ईरान से अमेरिकी प्रस्तावों पर सकारात्मक जवाब की उम्मीद कर रहे हैं। इटली की यात्रा के दौरान रुबियो ने कहा कि वे चाहते हैं कि यह एक गंभीर कूटनीतिक प्रस्ताव हो ताकि क्षेत्र में शांति बहाली हो सके। हालांकि, ज़मीनी हकीकत फिलहाल इसके विपरीत नज़र आ रही है। जहाँ अमेरिका अपनी शर्तों को मनवाने के लिए ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर रहा है, वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बता रहा है। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह ‘युद्धविराम’ किसी स्थायी शांति समझौते में बदल पाएगा या क्षेत्र एक बड़े पूर्णकालिक युद्ध की ओर बढ़ जाएगा।
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