सीएम मोहन यादव ने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में रखी 
एजेंसी, सागर, भोपाल। देश में चीता प्रोजेक्ट के तहत अब बुंदेलखंड मे अफ्रीकन चीतों का काउंटडाउन शुरू हो गया है। सीएम मोहन यादव ने अपने 61 वें जन्मदिन पर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) के मोहली में चीतों को रखने के लिए ‘सॉफ्ट रिलीज बोमा’ निर्माण की शुरूआत कर दी। इसके अलावा उन्होंने बमनेर नदी में 14 दुर्लभ प्रजाति के कछुओं को भी छोड़ा है। सबकुछ ठीक ठाक रहा तो मई-जून तक यहां चार चीते रफ्तार भरते नजर आएंगे।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने अपने 61वें जन्मदिवस के अवसर पर प्रदेश के वन्यजीव प्रेमियों और बुंदेलखंड के लिए सौगात दी है। कूनो नेशनल पार्क और गांधी सागर अभयारण्य की सफलता के बाद, अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) को चीतों के तीसरे घर के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यहां चीतों के पुनर्वास के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ‘सॉफ्ट रिलीज बोमा’ के लिए भूमि पूजन कर यहां चीता प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया है। सीएम ने स्पष्ट किया कि यह केवल वन्यजीव संरक्षण की परियोजना नहीं है, बल्कि बुंदेलखंड की आर्थिक तस्वीर बदलने वाला कदम है।
नदी में दुर्लभ प्रजाति के 14 कछुए छोड़े
चीता प्रोजेक्ट के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए बामनेर नदी में 14 दुर्लभ कछुओं (टेरा प्रिंस और सुंदरी प्रजाति) को भी उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा। उन्होंने 10 किलोमीटर लंबी जंगल सफारी का आनंद लेते हुए वन विभाग के अधिकारियों को वन्यजीवों के संरक्षण को ‘मिशन मोड’ पर चलाने के निर्देश दिए।
नौरादेही में चीतों के लिए दक्षिण अफ्रीका जैसा माहौल मिलेगा
वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ और चीता प्रोजेक्ट से जुड़े जानकारों के अनुसार चीतों को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दक्षिण अफ्रीका जैसा प्राकृतिक माहौल, खास के लंबे—चौड़े मैदान और पहाड़ जंगल, नदियां, भरपूर भोजन सबकुछ है। यहां का भू-दृश्य और यहां के विस्तृत घास के मैदान दक्षिण अफ्रीका के उन क्षेत्रों के समान हैं जहां चीते प्राकृतिक रूप से फलते-फूलते हैं।
क्या है सॉफ्ट रिलीज बोमा?
सॉफ्ट रिलीज बोमा दक्षिण अफ्रीका में बनाए जाते रहे हैं। एमपी सहित बुंदेलखंड में इन्हें सामान्य भाषा में बाड़ा बोलते हैं। जहां बाहर से लाए जाने वाले चीता, टाइगर को सीधे जंगल में न छोड़कर विशेष रूप से तैयार किए गए बोमा या बाड़े में रखा जाता है। यहां इनके स्वास्थ्य से लेकर इनके व्यवहार और खान—पान पर विशेष नजर रखी जाती है। सबकुछ ठीकठाक रहने और स्थानीय जलवायु और पर्यावरण में ढलने के बाद उन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाता है।
टाइगर रिजर्व की झलक: एक नजर में
कुल क्षेत्रफल 2,339 वर्ग किमी
(एमपी का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व)
विस्तार सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिले
वर्तमान बाघों की संख्या लगभग 32 बाघ
अन्य प्रमुख जीव भेड़िया (लैंड ऑफ वुल्व्स), तेंदुआ, भालू, चिंकारा, और 240 प्रजातियों के पक्षी
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