डोनाल्ड ट्रंप

ट्रंप का ईरान को 15 सूत्रीय युद्धविराम योजना का प्रस्ताव : पाकिस्तान बना मध्यस्थ, तेहरान ने वार्ता के लिए जेडी वेंस को सामने लाने की रखी शर्त

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एजेंसी, वाशिंगटन/तेहरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए 15 सूत्रीय युद्धविराम योजना पेश की है। इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह शांति प्रस्ताव पाकिस्तान के मध्यस्थों के माध्यम से ईरान को भेजा गया है। पाकिस्तान वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के रास्ते खोलने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

यह कूटनीतिक प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी सेना अपनी 82वीं एयरबोर्न डिवीजन से कम से कम 1,000 अतिरिक्त सैनिकों को क्षेत्र में तैनात करने की तैयारी कर रही है। यह नई तैनाती वहां पहले से मौजूद लगभग 50,000 अमेरिकी सैनिकों की शक्ति को और बढ़ाएगी। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह 15 सूत्रीय विस्तृत योजना ईरानी शासन को सौंपी जा चुकी है। इसके साथ ही, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन दो मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट भेजने की प्रक्रिया में है, जिसके तहत करीब 5,000 मरीन और नौसेना के हजारों अन्य कर्मियों को तैनात किया जाएगा। अधिकारी ने यह भी संकेत दिया कि इजराइली अधिकारी, जो ईरान के खिलाफ कड़ा सैन्य रुख अपनाने के समर्थक हैं, ट्रंप प्रशासन के इस युद्धविराम प्रस्ताव से काफी हैरान हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त सैन्य बल भेजना और साथ ही शांति का प्रस्ताव देना ट्रंप की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह भविष्य की कार्रवाई के लिए अपने सभी विकल्पों को खुला रखना चाहते हैं। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस पूरे मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

दूसरी ओर, ट्रंप के इस प्रस्ताव के बाद ईरान ने अपनी एक महत्वपूर्ण शर्त सामने रखी है। ईरान ने अमेरिकी प्रशासन को संदेश भेजा है कि वह भविष्य की किसी भी बातचीत में राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुश्नर या विशेष दूत स्टीव विटकॉफ को शामिल नहीं देखना चाहता। तेहरान ने इच्छा जताई है कि अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को मुख्य वार्ताकार बनाया जाए। ईरान का मानना है कि जेडी वेंस का दृष्टिकोण अन्य नेताओं के मुकाबले अधिक संतुलित है और वे बिना वजह युद्ध को खींचने के पक्ष में नहीं हैं।

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ईरानी सूत्रों का दावा है कि कुश्नर और विटकॉफ के साथ पिछली वार्ताओं के विफल होने के बाद उनके बीच विश्वास का भारी अभाव हो गया है। हाल ही में हुए इजराइली और अमेरिकी हमलों ने इस दूरी को और बढ़ा दिया है। सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी प्रतिनिधियों ने बैक चैनल के जरिए यह स्पष्ट कर दिया है कि इन पुराने चेहरों के साथ कोई भी नई बातचीत बेनतीजा रहेगी। तेहरान जेडी वेंस को विदेश मंत्री मार्को रुबियो की तुलना में एक ऐसे नेता के रूप में देखता है जो युद्ध को समाप्त करने के प्रति अधिक गंभीर और संवेदनशील हो सकते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर मंगलवार को स्वयं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान के साथ संवाद की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टीम में जेडी वेंस, मार्को रुबियो, जेरेड कुश्नर और स्टीव विटकॉफ सभी शामिल हैं और वे मिलकर इस पर काम कर रहे हैं। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका इस सैन्य मुकाबले में जीत हासिल कर चुका है और ईरानी वायुसेना व नौसेना को भारी क्षति पहुंची है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लीविट ने भी जोर देकर कहा कि अमेरिका की तरफ से वार्ता की मेज पर कौन बैठेगा, इसका फैसला केवल राष्ट्रपति ट्रंप ही करेंगे। फिलहाल, यह पूरा मामला 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव, पाकिस्तान की मध्यस्थता और ईरान द्वारा जेडी वेंस को वार्ताकार बनाने की मांग के इर्द-गिर्द घूम रहा है, जबकि सैन्य मोर्चे पर अमेरिका अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए है।

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