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ट्रंप के ‘नरक’ वाले बयान से मचा बवाल : पहले भारत को कोसा, फिर पीएम मोदी को बताया अपना सबसे अच्छा दोस्त

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एजेंसी, वाशिंगटन/नई दिल्ली। Donald Trump India News : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पत्र साझा किया, जिसमें भारत और चीन समेत दुनिया के अन्य देशों के लिए बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है। इस पत्र में इन देशों को ‘नरक’ बताया गया है, जिसे लेकर अब विवाद गहराता जा रहा है।

जन्मसिद्ध नागरिकता कानून पर तीखा हमला

साझा किए गए पत्र में अमेरिका की उस नीति पर निशाना साधा गया है, जिसके तहत वहां पैदा होने वाले बच्चों को अपने आप नागरिकता मिल जाती है। ट्रंप द्वारा समर्थित इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि विदेशी लोग इस कानून का फायदा उठाकर अपने पूरे परिवार को अमेरिका ले आते हैं। पत्र में लिखा गया कि “बच्चा यहाँ पैदा होकर नागरिक बनता है और फिर वे भारत, चीन या दुनिया के किसी भी ‘नरक’ से अपने कुनबे को यहाँ बुला लेते हैं।” इसके साथ ही कैलिफोर्निया के तकनीकी क्षेत्र में भारतीयों और चीनियों के बढ़ते प्रभाव पर भी बिना किसी ठोस प्रमाण के सवाल उठाए गए हैं।

भारत सरकार की संतुलित प्रतिक्रिया और सुरक्षा मुद्दे

इस पूरे विवाद पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने बेहद नपा-तुला रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि उन्होंने इस तरह की खबरों को देखा है, हालांकि उन्होंने इस पर विस्तार से टिप्पणी करने से परहेज किया। इसी बीच, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हुए हमलों को लेकर भी भारत ने स्थिति साफ की। सरकार ने स्पष्ट किया कि जिन जहाजों पर हमला हुआ वे भारतीय नहीं थे और उनमें मौजूद सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। इसके अलावा, क्रिप्टोकरेंसी के जरिए सुरक्षित रास्ता खरीदने की खबरों को भी सरकार ने पूरी तरह निराधार और झूठ बताया है।

विवाद के बीच ट्रंप के बदले सुर: भारत को बताया महान

‘हेल-होल’ यानी नरक वाले बयान पर मचे हंगामे के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के सुर बदले हुए नजर आए। ताजा घटनाक्रम में ट्रंप ने भारत की जमकर तारीफ की और इसे एक ‘महान देश’ बताया। नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के अनुसार, ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना सबसे करीबी मित्र बताते हुए कहा कि भारत का नेतृत्व एक बहुत अच्छे दोस्त के हाथों में है। विशेषज्ञों का मानना है कि विवाद को बढ़ता देख ट्रंप ने रिश्तों में कड़वाहट कम करने के लिए यह बयान दिया है।

नागरिकता और कल्याणकारी योजनाओं पर छिड़ी बहस

ट्रंप द्वारा साझा किए गए पत्र में अमेरिकी नागरिक स्वतंत्रता संघ (एसीएलयू) की भी कड़ी निंदा की गई है। आरोप लगाया गया है कि ऐसी संस्थाएं उन नीतियों को बढ़ावा दे रही हैं जिनसे अवैध प्रवासियों को फायदा होता है। पत्र में दावा किया गया है कि प्रवासियों की वजह से अमेरिका की स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ रहा है। ट्रंप का मानना है कि नागरिकता जैसे गंभीर मुद्दों पर फैसला अदालतों के बजाय जनता की राय के आधार पर होना चाहिए।

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