अब अडानी ग्रुप के हाथों में

जयप्रकाश गौड़ की जेपी एसोसिएट्स की चाबी अब अडानी ग्रुप के हाथों में

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जयप्रकाश गौड़ की जेपी एसोसिएट्स की चाबी अब अडानी ग्रुप के हाथों में

एजेंसी, नई दिल्ली। देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट सेक्टर में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। लंबे समय से वित्तीय संकट से जूझ रही जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेपी एसोसिएट्स) की कमान अब अडानी ग्रुप के हाथों में जाने वाली है। खास बात यह है कि कंपनी के फाउंडर जयप्रकाश गौड़ ने भी इस फैसले पर अपनी सहमति जताई है और भरोसा जताया है कि अडानी समूह कंपनी की विरासत को आगे बढ़ाएगा। जयप्रकाश गौड़ ने बयान में कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि गौतम अडानी के नेतृत्व में कंपनी की विरासत नई ऊर्जा, जिम्मेदारी और उद्देश्य के साथ आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इससे सभी स्टेकहोल्डर्स जैसे होमबायर्स, कर्मचारी और निवेशक की उम्मीदें पूरी होंगी।

कर्जदाताओं ने अडानी को चुना
कंपनी के कर्जदाताओं की समिति ने अडानी ग्रुप को सफल रेजोल्यूशन एप्लिकेंट घोषित किया है। इस फैसले को लेकर गौड़ ने कहा कि वे इस निर्णय का पूरा सम्मान करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पूरा रेजोल्यूशन प्रोसेस निष्पक्ष और पारदर्शी रहा।

कानूनी विवाद के बीच बड़ा फैसला
हालांकि यह फैसला लेना आसान नहीं था और इस दौरान कानूनी विवाद भी सामने आया। वेदांता ग्रुप ने कहा कि उसकी बोली ज्यादा थी और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी। लेकिन कर्ज देने वालों ने अडानी ग्रुप के प्लान को बेहतर माना, क्योंकि उसमें ज्यादा नकद पैसा, जल्दी भुगतान और काम को तेजी से पूरा करने की क्षमता थी। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने भी अडानी ग्रुप के टेकओवर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिससे इस डील को और मजबूती मिली।

जेपी एसोसिएट्स की विरासत क्यों खास है?
1979 में स्थापित जेपी एसोसिएट्स ने देश में कई बड़े प्रोजेक्ट खड़े किए हैं। इनमें बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स, सीमेंट प्लांट्स और बड़े टाउनशिप शामिल हैं। कंपनी के प्रमुख प्रोजेक्ट्स में जयपी विश टाउन, जयपी ग्रीन्स और जयपी स्पोर्ट्स सिटी जैसे नाम शामिल हैं, जो रियल एस्टेट सेक्टर में पहचान बना चुके हैं।

फाइनेंशियल संकट से नए सफर तक
पिछले कुछ सालों में भारी कर्ज और वित्तीय दबाव के कारण कंपनी को दिवालिया प्रक्रिया में जाना पड़ा। इस रेजोल्यूशन का मकसद कर्ज का समाधान करना और कंपनी के ऑपरेशंस को नए मालिक के तहत जारी रखना है।

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