एजेंसी, गुवाहाटी। असम में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए उग्रवादियों ने एक पुलिस कैंप को निशाना बनाया है। राज्य के तिनसुकिया जिले के जगुन इलाके में स्थित इस कैंप पर हुए हमले में पुलिस के 4 जवान घायल हो गए हैं। हमलावरों ने कैंप पर लगातार पांच ग्रेनेड फेंके, जिससे इलाके में भारी अफरा-तफरी मच गई। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, धमाके इतने जोरदार थे कि संदेह जताया जा रहा है कि हमलावरों ने मोर्टार का इस्तेमाल किया था।
#WATCH | Dima Hasao: Assam CM Himanta Biswa Sarma says, “This is highly condemnable. Army and the Police have launched a counter-insurgency operation. I think those who have done this will certainly be nabbed.” https://t.co/V6iIstCFh8 pic.twitter.com/eknb6wHvyd
— ANI (@ANI) March 22, 2026
प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन उल्फा (आई) ने इस कायराना हमले की जिम्मेदारी ली है। संगठन ने मीडिया को पत्र भेजकर इस हमले को ‘ऑपरेशन बुजोनी’ का नाम दिया है। यह हमला असम-अरुणाचल प्रदेश की सीमा के पास स्थित लेखापानी थाना क्षेत्र के एक संवेदनशील इलाके में हुआ। चश्मदीदों और अधिकारियों के अनुसार, कैंप पर दागे गए पांच गोलों में से चार परिसर के भीतर ही फटे, जिसके तुरंत बाद उग्रवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी भी की। घायल जवानों का प्राथमिक उपचार फिलहाल कैंप के भीतर ही किया जा रहा है।
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हमले की खबर मिलते ही तिनसुकिया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मयंक कुमार झा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद तिनसुकिया जिले समेत ऊपरी असम के सभी संवेदनशील हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है। सीमावर्ती इलाकों में अतिरिक्त चौकसी बरती जा रही है ताकि उग्रवादियों की किसी भी अन्य हरकत को नाकाम किया जा सके।
गौरतलब है कि तिनसुकिया जिला पिछले कुछ समय से उग्रवादी गतिविधियों का केंद्र रहा है। पिछले साल अक्टूबर में भी इसी जिले के ककोपाठार इलाके में भारतीय सेना के एक कैंप को निशाना बनाया गया था। उस समय चलती गाड़ी से की गई गोलीबारी में तीन सैनिक घायल हुए थे और उस हमले की जिम्मेदारी भी इसी प्रतिबंधित संगठन ने ली थी। आगामी 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले इस तरह की घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।


