एजेंसी, नई दिल्ली। संसद के दोनों सदनों राज्यसभा और लोकसभा ने आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीतने पर भारतीय क्रिकेट टीम को सोमवार को बधाई दी और इस जीत को देश के लिए बहुत गर्व का पल बताया। सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही बारह बजे शुरू होते ही पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने भारत की टी20 क्रिकेट विश्व कप में जीत की सदन को सूचना दी। सदन की ओर से भारतीय क्रिकेट टीम को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।
राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि कल देश के लिए गर्व का पल था, जब भारतीय क्रिकेट टीम ने नरेंद्र मोदी स्टेडियम में न्यूजीलैंड को बड़े अंतर से हराकर आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप का खिताब जीता। भारत की यह तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप जीत है, और विशेष बात यह है कि यह भारतीय टीम का लगातार दूसरा खिताब है। भारतीय टीम ने पिछला संस्करण भी जीता था। उन्होंने कहा कि यह कामयाबी और भी ऐतिहासिक है क्योंकि भारत आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप जीतने वाला पहला मेजबान देश बन गया है, जिससे यह सफलता देश के लिए और भी खास बन गई है। पूरे टूर्नामेंट में टीम के शानदार प्रदर्शन ने देश भर के लाखों क्रिकेट प्रेमियों को बहुत खुशी और गर्व दिया है। सदन की ओर से, उन्होंने इस शानदार कामयाबी के लिए खिलाड़ियों, सहयोगी स्टाफ और भारतीय क्रिकेट से जुड़े सभी लोगों को दिल से बधाई दी। यह सदन आने वाले वर्षों में उनके लगातार सफल होने की कामना करता है।
वहीं दूसरी ओर, राहुल गांधी ने संसद भवन परिसर में मीडिया के सामने कहा कि ईरान-इजराइल जंग से हमारी अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान होगा। उन्होंने शेयर बाजार की स्थिति का हवाला देते हुए पीएम मोदी पर ईरान-इजराइल युद्ध और यूएस डील पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने कहा कि पीएम मोदी ने अमेरिका के साथ जो समझौता किया है, उससे देश को बड़ा झटका लगने वाला है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आखिर चर्चा करने में क्या दिक्कत है? क्या ईरान-इजराइल का मामला जरूरी नहीं है? ईंधन की कीमत और आर्थिक तबाही चर्चा के जरूरी मामले नहीं हैं? उन्होंने कहा कि ये जनता के मुद्दे हैं और विपक्ष इन पर चर्चा चाहता है, लेकिन सरकार इससे बच रही है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार यूएस डील के मुद्दे पर चर्चा से इसलिए भाग रही है क्योंकि इससे प्रधानमंत्री की स्थिति सामने आ जाएगी कि कैसे उनके साथ समझौता किया गया और उन्हें किस तरह दबाव में लिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पीएम पार्लियामेंट से भाग गए हैं। इसी मुद्दे पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया। विपक्ष ने प्रधानमंत्री पर देश के हितों के साथ समझौता करने का आरोप लगाया। इस विरोध प्रदर्शन में राहुल गांधी और अखिलेश यादव सहित कई नेता शामिल हुए, जिनके हाथों में ‘भारत को नेतृत्व की जरूरत है, चुप्पी की नहीं’ लिखे बैनर थे। विपक्षी सांसदों ने अमेरिका के सामने समर्पण बंद करने के नारे लगाए और संसद में युद्ध के प्रभाव पर चर्चा की मांग की। इस बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया के संकट पर अपना बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति की ओर लौटने का समर्थक है और क्षेत्र के सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने पर जोर देता है।
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बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन उन्होंने कहा कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर सैन्य हमले और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद भारत सरकार के लिए नागरिकों की सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार जैसे राष्ट्रीय हित सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। जयशंकर ने कहा कि भारत शांति के पक्ष में है और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की वकालत करता है। उन्होंने बताया कि भारत ने शुरू से ही चिंता व्यक्त की और सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया। हालांकि, विपक्षी सदस्यों ने इस मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा किया और अनुमति न मिलने पर सदन से बाहर चले गए। विदेश मंत्री ने बताया कि मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति की एक मार्च को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में बैठक हुई थी, जिसमें खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा की समीक्षा की गई। खाड़ी क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा और लगभग 200 अरब अमेरिकी डॉलर के व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि संघर्ष के दौरान व्यापारिक जहाजों पर हमलों के कारण भारतीय नाविक प्रभावित हुए हैं और एक भारतीय नाविक अभी भी लापता है। सरकार ने जनवरी से लगातार यात्रा परामर्श जारी किए हैं और अब तक लगभग 67,000 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से क्षेत्र से लौट आए हैं। विदेश मंत्रालय ने विशेष नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, ओमान, जॉर्डन और इजराइल के नेताओं से बात की है। विदेश मंत्री ने खुद ईरान के विदेश मंत्री से 28 फरवरी और 5 मार्च को बातचीत की और बताया कि मानवीय आधार पर भारत ने 4 मार्च को ईरानी जहाज को कोच्चि में रुकने की अनुमति दी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार भारत के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।




