एजेंसी, कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने बंगाल में वोटरों के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर भाजपा और चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना की है। बीस साल बाद एक बार फिर धरने पर बैठीं ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बंगाली मतदाताओं को उनके वोट देने के अधिकार से वंचित करने के लिए एक गहरी साजिश रची गई है। उन्होंने इस साजिश को बेनकाब करने की कसम खाई है। टीएमसी प्रमुख ने विरोध प्रदर्शन के दौरान कहा कि वे उन बाईस लोगों को मंच पर सबके सामने पेश करेंगी, जिन्हें मृत घोषित कर दिया गया है जबकि वे पूरी तरह जीवित हैं।
जीवित वोटरों को मृत बताने का लगाया आरोप
मुख्यमंत्री दोपहर करीब दो बजे कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित धरना स्थल पर पहुंचीं। इस विरोध प्रदर्शन में ममता बनर्जी के साथ उनकी पार्टी के मंत्री, विधायक और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि संशोधित मतदाता सूची में कई जीवित मतदाताओं को मृत दिखा दिया गया है। उन्होंने कहा कि वे उन मतदाताओं को धरना स्थल पर प्रस्तुत करेंगी जिन्हें चुनाव आयोग ने मृत घोषित कर दिया है। इससे पहले टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी चुनाव आयोग पर राजनीतिक रूप से प्रेरित होकर काम करने का आरोप लगाया था, जिससे लाखों योग्य मतदाता अपने अधिकार से दूर हो सकते हैं।
मतदाता सूची के मुद्दे पर ममता बनर्जी का सख्त रुख
वोटरों के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार अपनी आवाज उठा रही हैं। अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद वे एक बार फिर मुखर हो गई हैं और इसी विषय पर यह धरना दे रही हैं। ममता बनर्जी के धरना स्थल पर हजारों समर्थकों की भीड़ देखी गई। वहीं भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बनर्जी को धरने पर बैठने का अभ्यास करना चाहिए, क्योंकि वर्ष दो हजार छब्बीस में भाजपा के सत्ता में आने के बाद वे विपक्ष की नेता बन जाएंगी।
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चुनाव आयोग की कार्यशैली पर कड़े सवाल
तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है, जिसमें मुस्लिम बहुल मालदा और मुर्शिदाबाद की बड़ी आबादी को जांच के दायरे में रखा गया है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जाति व जनजाति को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, अकेले मालदा के कुछ क्षेत्रों में बयालीस प्रतिशत नाम ऐसे हैं जिन पर जांच की तलवार लटक रही है। मुर्शिदाबाद और उत्तर चौबीस परगना में भी बड़ी संख्या में मतदाता विचाराधीन श्रेणी में हैं।
इन जिलों में मिले सबसे अधिक संदिग्ध मामले
मुख्यमंत्री का यह धरना उस समय हो रहा है जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद न्यायिक अधिकारियों द्वारा लाखों मामलों का निपटारा किया जा रहा है। इस बीच, ओडिशा और झारखंड के लगभग दो सौ न्यायिक अधिकारी बंगाल के आठ प्रमुख जिलों में जांच करेंगे। आंकड़ों के अनुसार, मुर्शिदाबाद जिले में सबसे अधिक ग्यारह लाख से ज्यादा मामले हैं। मालदा में आठ लाख, उत्तर चौबीस परगना में करीब छह लाख और दक्षिण चौबीस परगना में पांच लाख बाईस हजार मामले विचाराधीन हैं।
बीस साल पुराना आंदोलन फिर हुआ ताजा
ममता बनर्जी के राजनीतिक सफर में धरने और आंदोलनों की बड़ी भूमिका रही है। लगभग बीस-इक्कीस साल पहले वर्ष दो हजार छह में उन्होंने सिंगूर मामले में कोलकाता में ऐतिहासिक धरना दिया था। उस समय तत्कालीन वामपंथी सरकार ने कार फैक्ट्री के लिए किसानों की जमीन ली थी, जिसका ममता ने कड़ा विरोध किया था।
पच्चीस दिनों की लंबी भूख हड़ताल
दिसंबर दो हजार छह में ममता बनर्जी ने कोलकाता के मेट्रो चैनल पर पच्चीस दिनों तक भूख हड़ताल की थी। उनकी हालत बिगड़ने पर तत्कालीन राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की अपील के बाद उन्होंने अपना उपवास तोड़ा था। उस आंदोलन ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया था और उसी की लहर पर सवार होकर वे वर्ष दो हजार ग्यारह में मुख्यमंत्री बनी थीं। अब एक बार फिर वे उसी पुराने अंदाज में नजर आ रही हैं।


