मोहन भागवत

विभाजित समाजों पर ही होते हैं हमले और युद्ध, आपसी एकता और सद्भावना से ही आएगी वैश्विक शांति : मोहन भागवत

देश/प्रदेश राजस्थान राष्ट्रीय

एजेंसी, जैसलमेर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत का कहना है कि दुनिया में हमले उन्हीं राष्ट्रों पर होते हैं जिनका समाज आंतरिक रूप से बंटा हुआ होता है। जैसलमेर में आयोजित चादर महोत्सव के दौरान एकता का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि विश्व में युद्ध और विवाद इसलिए नहीं रुक रहे हैं क्योंकि हम अपनी सामूहिक शक्ति को भूल चुके हैं। जब तक हम निजी स्वार्थों को छोड़कर एक मजबूत समाज के रूप में संगठित नहीं होंगे, तब तक वास्तविक शांति संभव नहीं है।

फूट और आपसी विवाद के कारण थमता नहीं है युद्ध
मोहन भागवत ने कहा कि जब कोई समाज अपनी एकता को नहीं पहचान पाता, तभी दुनिया में कलह का जन्म होता है। समाजों के बीच की फूट ही युद्धों को जारी रखती है। लोग अपने मन की दया और करुणा को भूल गए हैं। वे इस सत्य को नजरअंदाज कर रहे हैं कि बाहरी रूप से अलग दिखने के बावजूद हम सब एक ही हैं। संघ प्रमुख जैसलमेर में जैन समुदाय के चादर महोत्सव के उद्घाटन के अवसर पर धर्म सभा को संबोधित कर रहे थे।

वर्तमान समय में संयुक्त राष्ट्र हुआ निष्प्रभावी
संघ प्रमुख ने वैश्विक संस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रथम विश्व युद्ध के बाद दोबारा जंग रोकने के लिए ‘लीग ऑफ नेशंस’ बनाया गया, लेकिन वह विफल रहा। इसके बाद द्वितीय विश्व युद्ध हुआ और फिर संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की गई। लेकिन आज के समय में संयुक्त राष्ट्र की स्थिति सबके सामने है। आज यह संस्था पूरी तरह बेअसर साबित हो रही है और वर्तमान में चल रहे युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

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बंटे हुए समाज को बनाया जाता है निशाना
मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि ये झगड़े इसलिए होते हैं क्योंकि मानव समाज अपनी अखंडता को नहीं समझ पा रहा है। आज का समय अत्यंत कठिन है और चारों ओर अपने धर्म व समाज को ऊंचा दिखाने की होड़ मची है। उन्होंने कहा कि ये हमले इसलिए हो रहे हैं क्योंकि समाज सोया हुआ और विभाजित है। इतिहास गवाह है कि हमले हमेशा उसी समाज पर होते हैं जो गुटों में बंटा होता है।

देशभक्ति से ही भारत बनेगा विश्वगुरु
मोहन भागवत ने आह्वान किया कि यदि हम अपने जीवन से भेदभाव और स्वार्थ को त्याग दें और देश के लिए समर्पित हो जाएं, तो एक आदर्श समाज का निर्माण होगा। इससे सभी विवाद समाप्त हो जाएंगे और भारत न केवल वैभवशाली बनेगा, बल्कि विश्वगुरु बनकर एक सुखी और सुंदर दुनिया की नींव रखेगा।

सद्भावना ही है हर विवाद का समाधान
आपसी भाईचारे पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए केवल समझौता या तर्क काफी नहीं होता। इसका सही रास्ता केवल सद्भावना है। बिना आपसी प्रेम और सद्भाव के कोई स्थायी हल नहीं निकल सकता। हमें पूरे समाज को इसी सकारात्मक सोच के साथ तैयार करना होगा।

शोषणमुक्त और समतायुक्त समाज की आवश्यकता
मोहन भागवत ने कहा कि सभी कलह मिटाने और धर्म की रक्षा के लिए एक ऐसे समाज की जरूरत है जहां हर व्यक्ति अपनी परंपरा के अनुसार मोक्ष का मार्ग चुन सके। एक सुखी विश्व के लिए हमें भेदरहित, स्वार्थरहित और शोषणमुक्त समाज बनकर खड़ा होना होगा।

ई-रिक्शा से किया भ्रमण और मंदिर में की पूजा
कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से पहले भागवत जी ने जैसलमेर के सोनार किले की गलियों में ई-रिक्शा के माध्यम से भ्रमण किया और पार्श्वनाथ जैन मंदिर में मत्था टेका। उन्होंने दादा गुरुदेव की याद में एक स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट भी जारी किया। आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरी जी के मार्गदर्शन में चल रहे इस तीन दिवसीय महोत्सव में शनिवार को दुनिया भर से आए श्रद्धालु सामूहिक पाठ करेंगे।

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