नई दिल्ली : निजी सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। वित्त वर्ष 2022-23 के लिए प्रोविडेंट फंड (पीएफ) अकाउंट पर 8.15 फीसदी ब्याज मिलेगा। केंद्र सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है। इससे पहले वित्त वर्ष 2021-22 में पीएफ पर ब्याज 8.10 फीसदी था। एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (ईपीएफओ) ने मार्च में पीएफ पर ब्याज दरें 0.05 फीसदी बढ़ाने की सिफारिश की थी। ईपीएफओ ने 24 जुलाई (सोमवार) को इसका ऑर्डर जारी किया। 1952 में पीएफ पर ब्याज दर केवल 3 फीसदी थी। हालांकि, इसके बाद इसमें बढ़ोतरी होती गई। पहली बार 1972 में यह 6 फीसदी के ऊपर पहुंची। 1984 में यह पहली बार 10 फीसदी के ऊपर पहुंची। पीएफ धारकों के लिए सबसे अच्छा समय 1989 से 1999 तक था।
इस दौरान पीएफ पर 12 फीसदी ब्याज मिलता था। इसके बाद ब्याज दर में गिरावट आनी शुरू हो गई। 1999 के बाद ब्याज दर कभी भी 10 फीसदी के करीब नहीं पहुंची। 2001 के बाद से यह 9.50 फीसदी के नीचे ही रही है। पिछले सात सालों से यह 8.5 फीसदी या उससे कम रही है। देश के 6 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी पीएफ के दायरे में आते हैं। इपीएफओ एक्ट के तहत कर्मचारी की बेसिक सैलरी प्लस डीए का 12 फीसदी पीएफ अकाउंट में जाता है। कंपनी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी प्लस डीए का 12 फीसदी कॉन्ट्रीब्यूट करती है। कंपनी के 12 फीसदी कॉन्ट्रीब्यूशन में से 3.67 फीसदी पीएफ अकाउंट में जाता है और बाकी 8.33 फीसदी पेंशन स्कीम में जाता है।
मान लीजिए आपके पीएफ अकाउंट में 31 मार्च 2023 तक कुल 5 लाख रुपए जमा हैं। ऐसे में अगर 8.10 फीसदी की दर से ब्याज मिलता तो 5 लाख पर 40,500 रुपए ब्याज के रूप में मिलते। लेकिन अब ब्याज दर को बढ़ाकर 8.15 फीसदी करने के बाद आपको 40,750 रुपए मिलेंगे। पीएफ में ब्याज दर के फैसले के लिए सबसे पहले फाइनेंस इन्वेस्टमेंट एंड ऑडिट कमेटी की बैठक होती है। यह इस फाइनेंशियल ईयर में जमा हुए पैसों के बारे में हिसाब देती है। इसके बाद सीबीटी की बैठक होती है। सीबीटी के निर्णय के बाद वित्त मंत्रालय सहमति के बाद ब्याज दर लागू किया जाता है। ब्याज दर का निर्णय फाइनेंशियल ईयर के आखिर में होता है।


