एजेंसी, साणंद (गुजरात)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को गुजरात के साणंद में ‘माइक्रोन टेक्नोलॉजी’ की सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (एटीएमपी) सुविधा का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि लगभग एक दशक पहले तक भारत में डेटा और चिप्स पर चर्चा बहुत कम होती थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पहले देश की छवि केवल सॉफ्टवेयर क्षेत्र तक सीमित थी, किंतु आज भारत हार्डवेयर निर्माण के केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।
प्रधानमंत्री के संबोधन के मुख्य अंश
कार्य की गति और स्पष्ट नीति: प्रधानमंत्री ने बताया कि जून 2023 में इस परियोजना हेतु समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए, सितंबर 2023 में निर्माण कार्य शुरू हुआ और फरवरी 2026 में उत्पादन भी प्रारंभ हो गया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के विशेषज्ञ जानते हैं कि यह गति असाधारण है। जब नीयत साफ होती है, तो नीतियां भी स्पष्ट बनती हैं और निर्णय शीघ्र लिए जाते हैं।
भारत-अमेरिका साझेदारी
माइक्रोन की यह सुविधा भारत और अमेरिका के बीच प्रगाढ़ संबंधों का प्रतीक है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और चिप जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग वैश्विक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
चिप का बढ़ता महत्व
प्रधानमंत्री ने तुलना करते हुए कहा कि जिस प्रकार पिछली शताब्दी में तेल का महत्व था, इस शताब्दी में चिप की भूमिका वैसी ही होने वाली है। कोरोना काल की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में जो बीज बोए थे, आज उनके फल मिलने शुरू हो गए हैं।
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वैश्विक संदेश और निवेश
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया के लिए एक ही संदेश है—भारत तैयार है और भारत भरोसेमंद है। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान अब पूरी गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने रतन टाटा के साथ हुए संवाद का स्मरण करते हुए निवेश की महत्ता पर प्रकाश डाला।
परियोजना का विवरण और तकनीक
यह संयंत्र पूरी तरह से ‘एटीएमपी’ तकनीक पर आधारित है, जहां सेमीकंडक्टर चिप्स को जोड़ने, उनकी जांच करने, उन पर आवश्यक चिन्ह अंकित करने और फिर उनकी पैकेजिंग का कार्य किया जाएगा। लगभग 22,516 करोड़ रुपये की लागत से बना यह संयंत्र केंद्र सरकार के ‘मेक इन इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ की पहली बड़ी परियोजना है। इसके माध्यम से पहली बार ‘मेड इन इंडिया’ सेमीकंडक्टर मेमोरी मॉड्यूल्स का व्यावसायिक उत्पादन और वितरण शुरू होगा। अब तक भारत माइक्रो चिप्स की आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर रहा है, किंतु इस संयंत्र के शुरू होने से देश तकनीकी आत्मनिर्भरता, निवेश और रोजगार के नए अवसरों की ओर अग्रसर होगा।
गुजरात में बढ़ता सेमीकंडक्टर जाल
अमेरिकी कंपनी ‘माइक्रोन’ द्वारा स्थापित इस संयंत्र के अतिरिक्त गुजरात में तीन और महत्वपूर्ण इकाइयां आकार ले रही हैं। केंद्र सरकार ने साणंद और धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स तथा सीजी पावर के संयंत्रों को भी अनुमति प्रदान की है। चौथा संयंत्र ‘कीन्स सेमीकॉन प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा लगभग 3300 करोड़ रुपये के निवेश से साणंद में ही स्थापित किया जाना प्रस्तावित है।
नीतिगत बढ़त
गुजरात भारत का वह प्रथम राज्य है जिसने 2022 से 2027 के लिए विशिष्ट ‘सेमीकंडक्टर नीति’ तैयार की है। ‘गुजरात सेमीकंडक्टर नीति 2022-27’ के अंतर्गत परियोजनाओं को भारी वित्तीय सहायता (सब्सिडी) और प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। इसमें भूमि की खरीद पर मुद्रांक शुल्क (स्टांप ड्यूटी) की पूरी छूट और औद्योगिक उपयोग हेतु रियायती दरों पर जल आपूर्ति जैसे प्रावधान सम्मिलित हैं।


