एजेंसी, नई दिल्ली। इंडियन एयरफोर्स 6 नए हवा में ईंधन भरने वाले विमान को मिलने जा रहे हैं। भारत-इजराइल साझेदारी से बढ़ेगी ताकत भारतीय वायुसेना अब अपनी हवाई ताकत को एक नए लेवल पर ले जाने जा रही है। जल्द ही भारत करीब 8,000 करोड़ रुपये की लागत से 6 नए मिड-एयर रिफ्यूलर विमान खरीदने जा रहा है। खास बात यह है कि ये विमान इजराइल की कंपनी इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज द्वारा बनाए जाएंगे।
15 साल से लंबित योजना अब होगी पूरी
वायुसेना पिछले 15 सालों से अपने पुराने रिफ्यूलिंग विमानों को बदलने की कोशिश कर रही थी। फिलहाल इंडियन एयरफोर्स के पास 6आई। एल-78एम.के.आई टैंकर विमान हैं, जो रूस से 2003-04 में लिए गए थे। लेकिन अब ये विमान पुराने हो चुके हैं और इनके रखरखाव में मुश्किलें आ रही हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पुर्जों की सप्लाई में भी दिक्कतें बढ़ गई हैं। यही कारण है कि भारत ने अब इजराइल के साथ यह नई डील करने का फैसला लिया है।
कैसे बनेंगे ये नए टैंकर विमान
इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज की बेडेक एविएशन ग्रुप छह पुराने बोइंग 767 पैसेंजर विमान खरीदेगी और उन्हेंमल्टी-मिशन टैंकर परिवहन में बदलेगी। ये विमान एक साथ कई काम करेंगे। जैसे हवा में ईंधन भरना, सैनिकों और उपकरणों की ढुलाई करना, और जरूरत पड़ने पर निगरानी मिशन में काम आना। इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज को इस काम में लगभग 40 साल का अनुभव है। कंपनी ने अब तक 12 देशों के लिए दर्जनों विमान इस तरह कन्वर्ट किए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने हाल ही में भारत की हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ भी साझेदारी की है, जिससे भविष्य में ये विमान भारत में आंशिक रूप से बनाए और मेंटेन किए जा सकेंगे।
‘मेड इन इंडिया’ से जुड़ेगा बड़ा हिस्सा
इस डील में 30% मेड इन इंडिया ऑफसेट शामिल है। यानी इस प्रोजेक्ट में भारत की एचएएल और निजी कंपनियों की भी अहम भूमिका होगी। इससे देश में नई नौकरियां पैदा होंगी और एविएशन सेक्टर में टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा।
वायुसेना की ताकत दोगुनी
इन नए रिफ्यूलिंग विमानों के आने से भारतीय वायुसेना की ताकत लगभग दोगुनी हो जाएगी. इससे राफेल, सुखोई-30 जैसे फाइटर जेट बिना बीच में रुके लंबी दूरी तक मिशन पूरा कर सकेंगे। यानी भारतीय फाइटर जेट अब आसानी से हिंद महासागर से लेकर चीन की सीमाओं तक बिना रुके उड़ान भर पाएंगे। यह डील सिर्फ एक खरीद नहीं, बल्कि भारत-इजराइल रक्षा सहयोग की नई मिसाल है। इससे भारत की एयर स्ट्राइक क्षमता, लॉजिस्टिक सपोर्ट और लंबी दूरी की मिशन क्षमता में भारी बढ़ोतरी होगी। उम्मीद है कि यह समझौता साल 2025 के अंत तक साइन हो जाएगा, जिससे भारतीय वायुसेना के पंख और भी मजबूत होंगे।


