एजेंसी, भोपाल। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह ने भाजपा द्वारा आज मनाये जा रहे संविधान हत्या दिवस के आयोजन पर कहा है कि इसकी जगह भाजपा को अपने शासनकाल के पिछले ग्यारह साल को लेकर “संविधान हत्या काल” का आयोजन करना चाहिये। यह एक ऐसा काल रहा है जब लगातार संविधान की हत्या की जाती रही है। गाहे-बगाहे संविधान को बदलने की बात भाजपा कहती रही है। अजयसिंह ने कहा कि आयरन लेडी इंदिरा गाँधी ने तो आपातकाल की बकायदा घोषणा की थी। यानी वह तो घोषित आपातकाल था और वर्तमान में पिछले ग्यारह साल से जनता अघोषित आपातकाल झेल रही है। इस काल में जनता मंहगाई और बेरोजगारी से हलाकान है। किसान रो रहे हैं और आत्महत्या को मजबूर हैं। मणिपुर जल रहा है। सभी पड़ोसी देशों से भारत के संबंध ठीक नहीं चल रहे हैं| जबकि 1975 में घोषित आपातकाल में जनता को कोई कष्ट नहीं था| ट्रेनें समय पर चल रही थी| सभी सरकारी दफ्तर, बैंक आदि समय से लग रहे थे| परीक्षाएं समय पर हो रही थी| कीमतें स्थिर थीं| परेशान तो केवल विपक्षी दल थे जिन्होंने सेना और पुलिस को भड़काकर विद्रोह करवाने की असफल कोशिश की थी। यही कारण था कि तत्समय की परिस्थतियों के मददेनज़र इन्दिराजी ने आपातकाल की घोषणा की थी, जिसे विनोबा भावे ने अनुशासन पर्व की संज्ञा दी थी|
अजयसिंह ने कहा भाजपा के संविधान हत्या दिवस के फर्जी आयोजन में जनता की कोई रुचि नहीं है। वह पूछ रही है कि महिलाओं की इज्जत लुटना कब बंद होगी। युवा पूछ रहे हैं कि पेपर लीक होना कब बंद होंगे और हमें रोजगार कब मिलेगा। किसान अपनी आय दोगुनी होने का इन्तज़ार का रहे हैं। मणिपुर की जनता आशा भरी निगाहों से प्रधानमंत्री की ओर निहार रही है| विश्वस्तरीय खिलाड़ी पूछ रहे हैं कि हमें न्याय कब मिलेगा। तमाम विपक्षी दल चुनाव आयोग से धांधली के आरोपों का समाधान चाहते हैं। गोदी मीडिया को छोड़कर जनता की समस्या को उठाने वाले मुख्य धारा के असली पत्रकार इन्हीं सब प्रश्नों का उत्तर प्रधानमन्त्री से चाहते हैं लेकिन पिछले ग्यारह वर्षों से उन्होंने न तो कोई प्रेस कान्फ्रेंस की और न ही किसी प्रश्न का उत्तर दिया। सिर्फ खुद ही खुद बोलते रहे, मन की बात थोपते रहे। डायलाग पर उनका कोई भरोसा नहीं है, सिर्फ मोनोलाग करते हैं।
सिंह ने कहा इन्दिराजी ने तो आमचुनाव हारने के बाद अपनी गल्तियों को स्वीकार कर लिया था लेकिन गल्तियों को स्वीकार करने का साहस वर्तमान सरकार में नहीं है। यही कारण था कि इंदिराजी पराजित होने के तीन साल बाद फिर से जोर-शोर के दोबारा सत्ता में लौटी। अच्छा होता यदि मोदी सरकार अपनी गल्तियों को स्वीकार कर उसमें सुधार करती और यह जो अघोषित आपातकाल चल रहा है उसे खत्म करती।


